1)
मित्रो हमारे आदरणीय प्रधानसेवक जी ने अपनी दूसरी पारी प्रारम्भ कर दी है 2010 से भारतीय राजनीति पर फेसबुक के माध्यम से करीब से नजर रखने का अवसर प्राप्त हुआ और गूगल बाबा से ज्ञान की प्राप्ति इसके लिए विज्ञान के इन आविष्कारों का बहुत बहुत धन्यवाद।प्रधानसेवक जी की आक्रामक कार्यशैली के अनुरूप उन्होंने इस बार तीव्र गति से एक योग्य और साफ सुथरे मंत्रिमंडल का गठन किया वैसे राजनीति में ऐसे शब्द प्रायः कम ही लोगों पर फिट बैठते हैं फिर भी जो उपलब्ध थे उनमें बेहतर को चुना तुष्टिकरण भी आवश्यकतानुसार किया गया गठन में, मंत्रिमंडल का आकार छोटा होना अच्छी बात है वैसे भी व्यवस्था प्रशासनिक अधिकारी ही चलाते हैं।
2014 में प्रधानसेवक जी के पास अनुभव नहीं था व्यवस्था बहुत बड़ी मिली थी भ्रष्टाचार और महंगाई के बड़े मामले जनता के सामने उजागर हो चुके थे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों जनता के आक्रोश से निराश थे,प्रधानमंत्री जी ने अपने कार्पोरेट दिमाग का इस्तेमाल कर 100 स्मार्ट सिटी के साथ सभी मोर्चों पर काम प्रारम्भ किया और विपक्ष ने पूरी ऊर्जा कमी निकालने में अन्तत सत्ता पक्ष को विपक्ष की नकारात्मक मानसिकता का लाभ मिला गरीबों के लिए केंद्र की योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने में मोदी जी का प्रशासनिक अनुभव काम आया बड़े पूंजीवादीयों ने गजब का लाभ कमाया,पब्लिक सेक्टर और मध्यम वर्ग लगातार दबाव में रहे।पिछली सरकार प्रधानसेवक जी ने कार्पोरेट माइंड से चलाई जिससे हमारी डूबती हुई बैंकिंग व्यवस्था सही हुई और मंदी के दौर से निकलकर स्थिरता बनी बेरोजगारी बढ़ी ।
2019 के प्रारम्भ में ऐसा लग रहा है कि प्रधानसेवक जी प्रशासनिक अधिकारियों के दिशानिर्देश में कार्य करेंगे और देशहित के बड़े लक्ष्यों पर काम करेंगे,ऐसा ही होना भी चाहिए व्यापारी का मुख्य उद्देश्य रोजगार सृजन है वर्तमान में,अन्यथा आप कहीं भी सम्बद्ध करेंगे तो दलाली प्रारम्भ हो जायेगी नैतिक स्तर गिर चुका है व्यापार का।
हम हिन्दुस्तानी ईश्वर से प्रार्थना करते हैं देश का कल्याण हो और प्रधानसेवक जी के नेतृत्व में हिन्दुस्तान विश्व गुरू बने।
परन्तु हम हिन्दुस्तानी आपके पहले निर्णय का बहुत जबरदस्त विरोध करते हैं जो आपने मुस्लिम बच्चों को वजीफा देने के लिए और मदरसों के आधुनिकीकरण की बात कही है क्योंकि आप 130 करोड़ लोगों का नेतृत्व कर रहे हैं और यह तुष्टिकरण है।महात्मा गाँधी कहते थे कोई भी काम करना है अपने से करो मेरे दोनों बच्चे सेंट जोसेफ संस्था में पढ़ते हैं जो वेटिकन सें संचालित ईसाई मिशनरी स्कूल है दोनों बच्चे प्रतिदिन हनुमानचालीसा पाठ करते हैं और प्रत्येक रविवार को दादा-दादी के साथ गायत्री यज्ञ करते हैं।एक दिन मैं उनको ड्राप करने गया तो दोनों ने प्रवेश करते ही सेंट जोसेफ और जीसस को प्रणाम किया फिर आगे बढ़े मैनें तो नहीं कहा था पर हमारे धर्म और संस्कार नफरत नहीं सिखाते हैं और उस स्कूल में भी कोई भी शिक्षा ग्रहण कर सकता है।हां ईसाई मिशनरीज ने विगत वर्षों में धर्म परिवर्तन के प्रयास किये तो परिणाम गांधी परिवार और कांग्रेस को भुगतने पड़े।अब जब जनता चौकीदार है आप हैड चौकीदार और मैं सुपरवाइजर चौकीदार तो प्रधानसेवक जी आपके चरणवंदन नेता वाला दिमाग गुजरात में छोड़ दें अभी आप मुस्लिम को वजीफा देंगे फिर हिंदू को देंगे परिणाम फर्जी नाम लिखे जायेंगे कर्मचारी और मदरसे स्कूल प्रबन्धन मिल कर खा जायेंगे हिन्दू-मुस्लिम में दूरी बढ़ायी और चले गये विदेश यात्रा भ्रष्टाचार का नया दरवाजा खोल गये यही तो कांग्रेस ने किया था।अब जनता चौकीदार है कृपया अंग्रेजो की तरह राज करने की न सोचें पूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहाल करने कां प्रयास करें।
स्मार्ट प्रधानमंत्री स्मार्ट जनता ।
जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
2)
हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने पद सम्हालने के बाद पहला कदम मदरसों के लिए उठाया बहुत अच्छी बात है इतनी बड़ी व्यवस्था के लिए सभी की दुआयें आवश्यक होती हैं पर मतदाता 80% समाज का और आप दुआयें लेना चाहते हैं 20% की ये तो नाइंसाफी हो गयी परमात्मा तो सबकी बराबर सुनते हैं जैसे कि आप महादेव के भक्त हैं महादेव तो देवताओं और असुरों दोनों के देवता हैं वह वर्तमान में किये कर्म के फल के सिद्धांत को प्रतिपादित करते हैं जय महाकाल।परम आदरणीय प्रधानसेवक जी बिना लड़ाई किये कार्य भी सिद्ध हो जाये और अधिक से अधिक लाभ ले लिया जाये यह गुजराती से अच्छा कोई नहीं जानता अतः हम पूरे देश में आपसे ऐसे ही गुजरात माॅडल की आशा करते हैं आतंकवादी और अपराधियों पर कोई रहम नहीं किया जाना चाहिए ऐसी आम जनता आशा करती है।हमारे सरस्वती विद्या मंदिर में सभी धर्म के बच्चे,ईसाई मिशनरी स्कूल में सभी धर्म के बच्चे परन्तु मदरसों में केवल मुस्लिम बच्चे आखिर क्यों ये इतने उदार नहीं हैं कि स्वीकार नहीं अत्यन्त विचारणीय है।अब मुद्दा स्वयं प्रधानसेवक जी ने छेड़ा है अतः सभी चौकीदारों की जिम्मेदारी है कि चिन्तन करें देश का मामला है और अत्यंत महत्वपूर्ण भी है और सभी चौकीदारों का अधिकार भी तो मित्रो वैश्वीकरण हो चुका पूरे विश्व में उदार व्यवस्थाएं अत्यंत सुखद और सफल हैं सारी प्रतिभाओं का पलायन उसी दिशा में होता है जहाँ वह सुरक्षित और आरामदायक महसूस करते हैं।मदरसों पर बात करने से पहले आम आदमी के धर्म को हल्का फुल्का समझते हैं उदहारण के तौर पर मेरे पहले भगवान् हनुमानजी थे बहुत छोटा था सुबह ही मां ने उठाया और नहला दिया और बोलीं पापा के साथ मन्दिर जाओ आज बड़ा मंगल है भैया एक थाली में लड्डू और पूये लेकर चले देशी घी की खुश्बू मन तो हुआ पहले खाऊं पर जैसे-तैसे मंदिर पहुंचे गोद में चढ़कर घंटा बजाया फिर तिलक लगाकर भोग लगाया और जोर से बोला जय श्री राम जय बजरंगबली बाहर निकले प्रसाद बांटा घर पहुंचे धैर्य जबाब दे चुका था लड्डू और पूओं पर आक्रमण भैया पूरी धार्मिक प्रक्रिया में हनुमानजी को आनंद आया हो या न आया हो मैं तो बचपन के आनंद से सराबोर हो गया तो मित्रो धर्म क्या है जो हमने बचपन में सीखा जिसमें आनन्द आ जाये जहां उत्सव हो।मेरा दूसरा अनुभव माता-पिता के साथ 1984 में 9दिन का शानतिकुंज आश्रम में प्रवास तब गुरूदेव भी वहीं थे मैं ठहरा अति शैतान अकेला पूरे दिन आश्रम में भ्रमण और शैतानी जो मिले वही अनुशासन सिखाये अरे भैया अनुशासित हो जायेंगे तो नयी चीजें कैसे खोजेंगे अतः हम भी न सुधरने वाले प्रातःकाल में माताजी वहां सबसे मिलती थीं सब लाईन में जाते थे पैर छूते थे शैल दीदी एक बहुत छोटी कटोरी में कुछ आयुर्वेद का पेय पदार्थ पीने के लिए देती थीं मुझे बहुत अच्छा लगता था रोज दो तीन चक्कर मैं लाईन में लगकर पी आता था।एक दिन मेरा शैतान जाग गया चौथे चक्कर पर मुझे कार्य कर्ता ने रोका मैनें उनकी चुनौती स्वीकार की पांचवा छुपकर पूरा किया छठवां भी छुपकर पूरा किया और माताजी जैसे समझ गयीं उन्होंने बैठा लिया पास में और पूछा बार बार क्यों आते हो इतने प्रेम से पूछा तो मैंने कहा ये पेय पदार्थ मुझे पसंद है उन्होनें समझाया यह आयुर्वेदिक दवा है ज्यादा प्रयोग नुकसानदायक हो सकता है तो मित्रो उन नौ दिनों में मैनें धर्म से क्या सीखा अनुशासन,समूह में रहना इत्यादि।ईसाई चर्च में जाते हैं दीपक जलाते हैं मतलब अन्धकार से प्रकाश करते हैं फादर जल छिड़कते हैं पवित्रता से सम्बन्ध है मैं कभी चर्च नहीं गया सुना ऐसी ही प्रकियायें होती हैं प्रार्थना करते हैं अरे भैया प्रार्थना तो वही करोगे जो तुम्हारी जरूरत होगी तो व्यवसायी हो तो भगवान् के पास भी बहुत काम हैं महापुरूष सबके कल्याण की प्रार्थना करते हैं।अब आ जाओ इस्लाम पर बहुत आसान अजान और दुआ अरे भैया उठो जहां भी हो जैसे हो जिस हालत में हो ये हो गयी अजान और दुआ में परमात्मा को याद करो निराकार परमात्मा भैया हमारे धर्म में निराकार की साधना सन्यासी लोग करते हैं क्योंकि उनकी ऊर्जा को धारण करने के लिए यम,नियम,संयम,प्रत्याहार, प्राणायाम, ध्यान, धारणा और समाधि के अष्टक नियम का अनुपालन आवश्यक है।
इस्लाम कहता है दुआ में अल्लाह हो अकबर परम सत्य है अरबी भाषा है जिसका मतलब है ईश्वर महानतम है, God is great. तो भैया जो हमने अपने धर्म से सीखा है वह ये है कि जीवन से मृत्यु तक एक उत्सव यात्रा है उसका पूरा आनन्द लें और वर्तमान में जो संसाधन उपलब्ध हों उनका उपभोग करें और सभ्यता के विकास में परिस्थितियों से सामंजस्य बैठाते हुये अपने आदर्शों से समझौता न करते हुये अपना योगदान दें।साकार की पूजा करें जिस भगवान् को जो पसन्द वो खिलाएं भगवान् प्रसन्न हों तो ठीक अन्यथा स्वयं खाकर अपने को प्रसन्न करें।
जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः
3)
भैया हमारे भगवान सूंड वाले हैं पूंछ वाले हैं बैल पर चलते हैं शेर पर चलते हैं चार हाथ वाले हैं पांच मुंह वाले हैं जब भक्त प्रसन्न तो भगवान प्रसन्न कम से कम दिखते तो हैं अब भविष्य में शायद उन्हें मर्सिडीज पसन्द आ जाये या लड्डू गोपाल जेसीबी की जिद्द कर जायें कि झूला नहीं अब ट्रैक्टर चलायेंगे भगवान् भावना के भूखे हैं प्रेम के भूखे हैं सत्य के भूखे हैं अरे भैय्या 56 भोग भगवान को जब हम श्रद्धापूर्वक भावना से अर्पित करके ग्रहण करते हैं तो उसका स्वाद अलग होता है ठीक वैसे जैसे पत्नी अगर प्रेम से भोजन कराये तो स्वाद अलग और गुस्से में तो आप सभी समझदार हैं,इसलिए कहा जाता है बच्चे तो भगवान् की मूरत होते हैं।ये हमें साकार पूजा जो प्रतीकात्मक हैं हमें सिखाती हैं दैनिक जीवन में अनुशासन,नियम,प्रेम,करूणा,दया इत्यादि और मित्रो हम इसमें अति प्रसन्न हैं अन्य धर्मों का हमेशा सम्मान करते रहे हैं जब गुलामी में हमारे पूर्वज उन नियमों प्रसन्न और प्रगतिशील रहे तो अब तो कोई सवाल ही नहीं है।अब बात करते हैं हिन्दुस्तान में जैन धर्म और बौद्ध धर्म,सिक्ख सम्प्रदाय ये सब सीधे हमारे वैदिक धर्म से जुड़े हैं और सबका मुख्य कार्यालय कैलाश पर्वत है,जो हमें कम करके आंकते हैं उनके लिए लिख रहा हूँ आप कतई भ्रमित न हों कि अलग अलग हैं हां अति प्राचीन हैं।हमारे देश में ईसाई और इस्लाम धर्म विदेश से आये हैं यदि सृष्टि के आरम्भ से खोज की जाये तो इनका केन्द्र भी यहीं निकलेगा।मित्रो ईसाई धर्म भी जीसस मतलब अवतार को भगवान् मानते हैं, इस्लाम में मुहम्मद साहब को भगवान् मानते हैं वो भी अवतार थे हमारे धर्म में जैसे कृष्ण,राम कई अवतार हुये उससे बहुत पहले वैदिक युग कृष्ण भगवान् ने श्रीमद्भागवत गीता बोलते हुये यह स्वीकार किया था हे अर्जुन मैं ही परमेश्वर हूँ वह ग्रन्थ वेदान्त का सार है मतलब उसके बहुत पहले वेद लिखे जा जुके थे।ज्यादा गहराई में चले गये वापस आते हैं मित्रो सारांश यह है सृष्टि के आरम्भ का केन्द्र एक है ब्रह्मांड में हमने सूर्य और चन्द्र दोनों को गणना में मुख्य रखा और हमसे कोई कोई ज्ञानी भाई बन्धु नाराज होकर चला गया होगा उसने चन्द्र को मुख्य केन्द्र माना और ईसाई और इस्लाम का उदय हुआ हमारे राम सूर्यवंशी थे और कृष्ण चन्द्रवंशी वर्तमान में विज्ञान के माध्यम से हम चन्द्रमा तक पहुंच पाये हैं और पुराणों के अनुसार हमारे पूंछ वाले भगवान् हनुमान जी बचपन में सूर्य को निगल गये थे अतः अन्य ब्रह्मांड की भी सम्भावना है लगे रहो।ANYWAY IMAGINATION IS ALWAYS MORE POWERFUL THAN DETERMINATION. अब हम मुख्य मुद्दे पर चलते हैं एक आम आदमी के जीवन में धर्म का महत्व क्या है मित्रो उसकी जन्म से मृत्यु तक के संस्कार,व्यक्तिगत दिनचर्या, पारिवारिक व्यवस्था,धार्मिक त्योहार इत्यादि सभी धर्म ही नही बल्कि क्षेत्रों के अलग अलग हैं और सरकार उन्हें विधिवत् सम्पन्न भी करवाती है।अब विवाद करता कौन है किसी धर्म का व्यक्ति नहीं करता है आप संविधान को कुरान से जोड़ते हैं एक पवित्र धार्मिक ग्रन्थ का एक प्रशासनिक ग्रन्थ से तुलना करते हैंं संविधान में तो व्यवहारिक संशोधन समयानुसार किये जायेंगे कुरान में नहीं किये जायेंगे आपके धर्मगुरू आज के अनुसार कुछ नया लिख सकते हैं अल्लाह का सन्देश जिससे आपका कल्याण हो जहां तक मुझे लगता है आपसे बहुत अधिक शक्तिशाली लोग विश्व में हैं हिंसा और चरमपंथ छोड़ना ही होगा शिक्षित और सभ्य बनना ही पड़ेगा सहनशील बनना होगा यदि शान्ति स्थापित करना चाहते हैं अन्यथा आपकी मर्जी हम संगठित रहेंगे शतप्रतिशत।
जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः
4)
मित्रो मैनें कुरान नहीं पढ़ी है कोई उपलब्ध कराये हिन्दी/इंग्लिश तो शायद और अच्छा विश्लेषण कर सकूं हां तो धर्म का तत्वज्ञान यह है कि किसी मनुष्य,समुदाय,समाज,राष्ट्र या विश्व का स्तर श्रेष्ठ उत्कृष्ट बनाना और पिछले कुछ वर्षों से तीन तलाक के मुद्दे पर जो टीवी पर बहस मैनें सुनी उसमें मौलवी जो मदरसों को संचालित करते हैं उन्होंने सबने एक साथ उसका विरोध किया आपने क्या किया सबसे पहले अपनी पत्नियों का अपमान किया,अपनी बहनों का अपमान किया,महिलाओं का अपमान किया पहले हमारे पूर्वज भी बहुविवाह करते थे,फिर रखैल का प्रचलन आया आज हमारे समाज में एकल पत्नी व्यवस्था है और यदि कोई ऐसा करे तो पत्नी झगड़ा करेगी और माता-पिता,बहनें सब पत्नी के पक्ष में चप्पल सेवा भी प्रदान कर सकते हैं और सबसे शर्मिन्दगी की बात यह की सारे मौलवी टीवी पर गला फाड़ कर हवाला दे रहे थे सबसे पवित्र ग्रन्थ कुरान का शरम करो महिलाओं को तुम्हारे विरोध में खुल कर आना पड़ा इसीलिए तुम औरतों को दबाकर रखते हो,हिंसक बन कर रहते हो कि अय्याशी कर सको।दूसरी बात जब चुनाव आता है उसके आगे पीछे तुम्हारा इस्लाम खतरे में आ जाता है कयों भाई कोई भी बात हुई तुम्हारे हिसाब से सरकार नहीं बनी तुम्हारे मन का नेता नहीं जीता इस्लाम खतरे में आ गया अरे भाईयो जब अल्लाह सबसे बड़ा है आप निराकार की पूजा करते हो तो आपको अल्लाह पर भरोसा नहीं है क्या कि वो आपकी रक्षा करेगा या तो आप अल्लाह के अनुसार चलो या अल्लाह को अपने अनुसार चला लो अभी आपकी हरकते ऐसी हैं कि अल्लाह को आपके अनुसार चलना होगा ऐसा नहीं हैं हमारे धर्म में भी हैं बोल दिया जय श्री राम राम कौन थे राम ने रावण मारा था रावण कौन था पंडित था सारे पंडित हमारे दुश्मन हैं जय श्री राम बहुत मिल जायेंगे ऐसे भैया राम मर्यादा पुरुषोत्तम विष्णु अवतार थे इतना वो समझना नहीं चाहते ठीक है।तो अल्लाह के बंदो श्रेष्ठ बनो भाईचारा कायम करो जो पूर्वजों ने हिंसा और गलतियां की हैं वो थीरे धीरे लोग भूलेंगे प्रेम में बहुत शक्ति है।
अब चलते ईसाई धर्म की ओर आप लोग आधुनिक,प्रयोगवादी, व्यवहारिक, वैज्ञानिक और आशावादी, सकारात्मक, रचनात्मक दृष्टिकोण लेकर पूंजीवाद के सहारे जीसस के सन्देश सबसे प्रमुख सन्देश सेवा लेकर चले अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत कार्य किये छोटा सा उदहारण हमारे शहर में 28 साल पहले सेंट जोसेफ संस्था खोलकर लगभग 28000 बच्चों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर तैयार करना रोजगारपरक शिक्षा देना और दूसरा सेवा का उदहारण कानपुर में मरियमपुर हास्पिटल खोलना ब्रिटिश टाईम में जिसकी सेवायें लाखों लोग आज भी लेते हैं परन्तु अब वही सेवा शिक्षा और स्वास्थ्य मेवा बन गयी है लूट मची है अतः आपके धर्म का सन्देश खतरे में है।ईसाई धर्म द्वारा हिन्दुस्तान में गलत कार्य विगत कुछ वर्षों में बहुत तेजी से धर्मांतरण वो धन देकर अत्यन्त घटिया और निन्दनीय है।मेरा जानने वाला एक वर्कर मिला मैनें उससे हालचाल पूछा बताया भाई साहब ईसाई बन गये रूचि जागी पूरा विवरण समझा 10000 प्राप्त हुये थे दो साल बाद मिला उसने सर गंजा करवा रखा था मैने पूछा क्या हुआ बोला भाई मर गया था तो मैनें कहा तुम तो ईसाई बन गया था वो हंसा बोला भाई साहब उसके बाद दो बार और बन चुका हूँ वो महाशय दलित समाज में चमार जाति से थे ये हिन्दुस्तान है मेरी जान आपने क्या किया हमारे देश की अच्छी खासी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस डुबा दी ईसाईत के चक्कर में मैं श्रेष्ठ हूँ इस चक्कर में अरे जिस दिन पूरे विश्व से गरीबी मिट जायेगी और जिसको आध्यात्मिक ज्ञान में रूचि होगी उसे ब्राह्मण ही बनना होगा वेद ही पढना होगा क्योंकि वेद परमात्मा ने नहीं बोले हैं हमारे ॠषियों के तपबल से उत्पन्न प्रज्ञा है।धर्म पर हम विश्व में आध्यात्मिक गुरू थे हैं और सर्वदा रहेंगे।धर्म पर चर्चा समाप्त अब प्रधानसेवक द्वारा मदरसों के आधुनिकीकरण पे चर्चा करेंगे।
जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः
5)
प्रधानसेवक जी ने शपथ लेते ही तुष्टिकरण की नीति अपनाते हुये पहली घोषणा की सिर्फ मुस्लिम बच्चों को वजीफा देंगे और मदरसों का आधुनिकीकरण करेंगे।यदि आप सही है तो किसी का भी तुष्टिकरण बेईमानी है और मदरसों के आधुनिकीकरण में आप क्या करेंगे निर्माण कार्य,लैपटॉप इत्यादि और वजीफा के नाम पर नकद खाते में मतलब जम कर भ्रष्टाचार का प्रारम्भ हो गया और वहाँ बच्चों को कैसी मानसिकता के शिक्षक शिक्षा देंगे वह पूरा देश टीवी पर बहस में देखता है मतलब आप स्वयं चरमपंथ को बढ़ावा दे रहे हैं।माननीय प्रधानसेवक जी चरणवंदन के साथ विनम्र निवेदन है आप मेरे बाप की उम्र के हैं और देश के सबसे बड़े मंदिर संसद के सबसे बड़े पंडित हैं अतः यह आपकी जिम्मेदारी है कि धारा 30 पर पुनर्विचार करें और देश में एक समान शिक्षा नीति लागू करें अन्यथा भविष्य में अमीर गरीब की शिक्षा में जो विभाजन हो रहा है और समानांतर आर्थिक असमानता तेजी से बड़ी है विवाद का मुख्य कारण हो सकता है जो कतई देशहित में नहीं होगा मौकापरस्त ताकतें अस्थिरता पैदा करेंगी।हमें अपने देश में चरमपंथ और शरणार्थी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करने चाहिए,आज हमें आवश्यकता है अपने देश के मुस्लिम भाईयों विशेषतः मौलवियों के दिमाग के आधुनिकीकरण की इन सबको पाकिस्तानी नेटवर्क से शतप्रतिशत विच्छेद करके पहले विकसित देशों के इस्लामिक मौलवियों से शिक्षा दिलवा कर वैश्वीकरण के दौर में इनका आधुनिकीकरण करिये इसके बाद ही कोई बजट दीजिए अच्छे दिमाग का व्यक्ति एक पेड़ के नीचे भी अच्छी शिक्षा दे सकता है हमारे देश के मुस्लिम बच्चों को रोजगारपरक,वैश्विक और आधुनिक शिक्षा दी जाये जिससे वो चरमपंथ से दूर हटकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निर्धारित करें।
अभी ठीक चुनाव के बाद जिस तरह का माहौल बन रहा है इसके क्या मायने निकाले जाये कि समाज में अज्ञात भय व्याप्त हो जाये या सत्ता पक्ष के खिलाफ जनता भड़क जाये या सत्तापक्ष की ही कूटनीति की ऐसे माहौल में विपक्ष की क्या प्रतिक्रिया होती है विचारणीय है।हमारा देश बहुत बड़ा है प्रतिदिन बहुत सी घटनायें होती हैं राजनीतिक प्रबंधन अपने फायदे नुकसान के अनुसार मीडिया मैनेजमेंट करते हैं परन्तु मजबूत सरकार बनने के बाद तीन बड़ी घटनायें अन्तरराष्ट्रीय माफिया/आतंकवादी या हमारे दुश्मन देश की साजिश भी हो सकती हैं एयरफोर्स दुर्घटना बिना युद्ध के हमारे तेरह जवान शहीद,कश्मीर में सीआरपीएफ के पांच जवान शहीद और बंगाल में डाक्टर की रोहिंगया शरणार्थीयों द्वारा पिटाई और उस उस घटना का जबरदस्त राजनीतिक प्रबन्धन मीडिया में क्योंकि दीदी ने चुनाव प्रचार में आपकी भाषा में प्रचार किया और 18 जवानों की शहादत के बाद कोई राजनीतिक प्रबन्धन नहीं मीडिया मैनेजमेंट नहीं क्योंकि अब चुनाव हो चुका है जबकि पुलवामा के बाद आप टीवी पर ऐसे दिख रहे थे जैसे पाकिस्तान मिट गया अब कोई नहीं बचा सकता जब आप शहीदों की परिक्रमा कर रहे थे वाह प्रधानसेवक जी वाह कौन है आपका इवेंट मैनेजर
जय हिंद वन्दे मातरम ।
सुधीर तिवारी
क्रमशः
6)
मित्रो संसद सुचारू रूप से प्रारम्भ अब प्रधानसेवक जी को अपना कार्य करने देते कुछ समय बाद विश्लेषण करेंगे ये हमारा सौभाग्य है कि हमें कर्मशील और ऊर्जावान प्रधानसेवक मिला है।मैनें 2010 में फेसबुक ज्वॉइन किया था राजनीति में रूचि है और कांग्रेस विचारधारा से हमेशा प्रभावित रहे हैं लिहाजा फेसबुक पर भी उसी प्रारम्भ से फालो किया तो जो पसन्द आया शेयर करते रहे मतलब डिजिटल प्रचारक कांग्रेस के बने रहे डाॅ मनमोहन सिंह निश्चित रूप से एक सज्जन,ईमानदार व्यक्ति हैं और विश्व स्तर के अर्थशास्त्री और एक सफल प्रधानसेवक रहे उनके नेतृत्व में हमारे देश की अर्थव्यवस्था ने बुलन्दियां हासिल की और उच्चतम वृद्धि दर पर अर्थव्यवस्था पहुंची हमें उन पर गर्व है।सोनिया गाँधी जी ने यूपीए की कमान सम्हाल कर डिनर डिप्लोमेसी से काफी हद तक स्थिरता रखी और देश को आगे बढाने में पूर्ण योगदान दिया।गठबंधन की सरकार चलाना बहुत टेढ़ी बात है अतः भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण चरम सीमा पर हुआ और सोनिया जी के ईसाई होने के नाते ईसाई संगठनो ने लाभ उठाते हुये कई राज्यों में जबरदस्त धर्मांतरण हुआ जिसके परिणामस्वरूप राहुल और प्रियंका को नकार दिया गया ये भी एक कारण है दूसरा कारण है जनता में वंशवाद का विरोध राहुल जी और प्रियंका जी सर्वे करवा लें अब समय बदल गया है आम जनता नेता को इज्जत की नजर से नहीं देखती है उनके बच्चों को शतप्रतिशत नफरत की नजर से देखती है टेलीविजन होने से सब टीवी देखते हैं और जागरूक हैं आज जो संसद में कर हो रहा था इस पर आम जनता की प्रतिक्रिया कि लडाना चाहते हैं और शांत हो जाते हैं अब ओवैसी चीखेगा अल्लाह हू अकबर तो जिस जनता ने 800 साल गुलामी झेली और वर्तमान में अभी बंगाल में डाॅकटर कांड,टिंवकल कांड और केरल में महिला पुलिस कांड और फिर संसद में जय श्री राम कांग्रेस का कर दिया काम तमाम सीधा मतलब है कि हम वन्दे मातरम् नहीं कहेंगे मतलब तुम भारत बनाओ मतलब विपक्ष हमारे मुसलमान भाई हिन्दुत्व वाला चाहते हैं उन्हें धर्मनिरपेक्षता रास नहीं आ रही है।आदरणीय राहुल जी सीधे हैं उनके स्वतन्त्र विचार नहीं हैं,आरम्भ करने की क्षमता नहीं है हां दृढ़निशचयी हैं मोदीजी का धैर्य जबाव दे गया विगत चुनाव में मानना पड़ेगा परन्तु भारतीय राजनीति में सफल नहीं हो सकते विपक्षी ही लाभ उठाते रहेंगे।आप को अब आना चाहिए था विगत चुनाव में आकर दो दिनों में आपका काम तमाम कर दिया चमचों ने राजनीति में भारतीय राजनीति में अगले 20 सालों तक हिन्दूवादी राजनीति हावी रहनी है यदि जनसंख्या नियंत्रण कानून ले आये हमेशा के लिए रहेगी अन्यथा पुनः इस्लामिक राजनीति हावी होगी।बाड्रा जी को पहले ही लपेट रखा है अतः गांधी परिवार सम्मानित मार्गदर्शन करे और नयी कांग्रेस का गठन होने हिन्दुत्व वाली कांग्रेस स्वतंत्रता आंदोलन वाली कांग्रेस,वल्लभ भाई,अम्बेदकर,नेता जी,नेहरू-गांधी वाली कांग्रेस जिसके नाम से हमारी विश्व में पहचान है जिसके 70 सालों के कामों से हम हवाबाजी कर रहे हैं।
वर्तमान कांग्रेस से हम शर्मिन्दा हैं।
जय श्री राम जय श्री कृष्ण
हर हर महादेव
क्रमशः
7)
मित्रो आजकल समाचारों पुनः बाबा राम रहीम चर्चा में है हरामखोर ड्राइवर था दो गुरू थे मस्ताना और शाह बाद में कब्जा कर लिया इसने इसके पहले जो संत थे परमात्मा की कृपा थी उनपर अच्छे भी थे उनका उत्तराधिकारी बनकर लोगों की भावनाओं का शोषण किया,ऐसा मैनें सुना है जानकारी गलत भी हो सकती है।परन्तु मैनें स्वयं इसका इंटरव्यू सुना एकबार उसमें ये आत्मा को बुलाने की बात कराने की बात कर रहा था मतलब स्वयं को श्रेष्ठ दिव्य पुरूष और सामने वाला उसकी दिव्य शक्तियों से डरे इस तरह का प्रचार केंद्र अज्ञात आत्मा जिसे आप न देख सकते हैं न सुन सकते हैं न महसूस कर सकते हैं मतलब भय का भूत बस यही व्यापार है अंधविश्वास का और पूरे विश्व में है सिर्फ हमारे देश में ही नहीं विकसित देशों में भी है मित्रो।मेरा स्वभाव बचपन से प्रयोगवादी और अंधविश्वास को न मानने का रहा है मेरे पूर्वज भी इन बातों पर विश्वास नहीं करते थे अर्थात शिक्षित थे उसी स्वभाव के तहत 1994 में जब मेरी उम्र17+ साल थी आत्मा से सम्बन्धित प्रयोग किया इलाहाबाद में शिक्षा के दौरान एक सीनियर महोदय ने प्रभाव बनाने के लिए आत्मा पर भाषण दिया और बताया कि वो आत्मा से बात तो नहीं करा सकते पर सिक्के के माध्यम से हां या न में प्रश्न का उत्तर दिलवा सकते हैं महाशय झारखंड से थे बहुत आत्मविश्वास था बताया उनके गुरू ने सामने करके दिखाया है मैं ठहरा प्रयोगवादी मैनें कहा सर आज ही चलते हैं साईकिल निकाली और दोनों एक ईसाई कब्रिस्तान काफी बड़ा था ऊंची चहारदीवारी चारो ओर बड़ा गेट हम लोगों ने सोचा अन्दर कैसे प्रवेश किया जाय थोड़ा डर लगा फिर साहस किया साईकिल को चहारदीवारी के किनारे लगाया और कूद गये अन्दर कब्रिस्तान में एक झाड़ी तोड़ी गयी और एक कब्र साफ की महाशय ने प्रयास किया कोई सफलता नहीं मिली,तीन चार कब्रों पर महाशय ने प्रयास किया कोई सफलता नहीं मिली तब तक डर निकल चुका था घरेलु माहौल हो गया था उसके बाद देशी तरीके से भैया मैं शुरू कब्र साफ करूं कभी पीटर कभी जोसफ कभी डिसिल्वा नाम पढूं फिर कहूं उठो अंकल भैया अंदर तीन घंटे जगाया कोई नहीं जागा तब तक थक चुके थे भूख भी लगने लगी थी सुबह होने वाली थी बाहर निकलने की तैयारी की जैसे ही चहारदीवारी से कूदे दो प्रकाश सामने से तेज चमकते हुये दिखाई दिये और बहुत तेज घरररररररररररररररर की आवाज किसकी आवाज हम लोगों ने जल्दी से साईकिल उठायी और कहा आ गये भूत तब तक आवाज आयी रूक और हम रूक गये भैया भूत नहीं थे पुलिस थी उन्होंने पूछा क्या कर रहे थे अन्दर झूठ बोलने की आदत है नहीं आज भी नहीं है वो सब भी अन्धविश्वास पर भरोसा करते थे कम से कम 100 गालियां दी और आत्मा के दर्शन करा दिये विश्वविद्यालय परिचय पत्र होने के कारण छोड़ दिया।यह सच्ची घटना है
जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः
8)
पिछले लेख में मैंने ईसाई कब्रिस्तान में बहुत प्रयास किया पर आत्मा नहीं मिली गालियां अवश्य मिली,अब हम आज फिर एक अन्धविश्वास से जुड़ी एक सच्ची घटना की चर्चा करेंगे जिसे भय का भूत कहते हैं।यह सच घटना मेरी मां ने सुनायी थी मेरे नाना के भाई थे लिखे पढ़े थे बहुत पुरानी बात है ग्रामीण भारत था,उस दौरान आज का चलन नहीं था सब आपस में निकलते राम राम करते हुए निकलते थे नाना बाहर बैठे हुये थे पड़ोस के गांव का एक किसान निकला और नाना से राम राम किया उन्होंने पूछा कहां जा रहे हो उसने बोला दादा बुखार आ गया मौलवी ताबीज बना देता है बुखार सही हो जायेगा।नाना हास्य और व्यंग्य के अच्छे ज्ञाता थे उन्होंने कहा मैं भी बना लेता हूँ इधर आओ तुम्हारा बुखार सही हो जायेगा उसको वाईरल फीवर था नाना ने मां को बुलाया कागज और पेन मंगाया और उसमें काफी देर तक लिखते रहे फिर उससे कहा घर से बाहर नहीं निकलना उबला हुआ पानी पीना और स्वच्छता रखना बहुत ही सादा भोजन करना ताबीज दांये हाथ में बांध लेना और शर्त यह ताबीज कोई दूसरा व्यक्ति न देखे न पढ़े तीन दिन बाद आना बुखार सही हो जायेगा ताबीज मुझे ही वापस करना नहीं तो बुखार फिर आ जायेगा,सभी घर वालों ने कहा ये क्या किया उन्होंने कहा तीन दिन बाद बतायेंगे भोला भाला किसान चला गया।तीन दिन बाद आया बोला पंडित जी राम राम बहुत अच्छा ताबीज बनाये थे एक दिन में ही आराम मिल गया नाना ने कहा ताबीज लाओ उसने ताबीज दी नाना उसे खोलकर एक तीसरे व्यक्ति से पढ़वाया गंदी गंदी गालिया लिखी थी फिर उस किसान को समझाया कि तुमने जो नियम मैंने बताये थे उससे आराम मिला न कि ताबीज से ये सब अंधविश्वास है।और इसी तरह के भय के भूत पूरे विश्व में भ्रमण कर रहे हैं और भोले भाले लोग उनके शिकार हैं।
जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः
9)
मित्रो हमारी चर्चा अंधविश्वास पर चल रही थी उनमें भी अंधविश्वास का वह रूप जिसे समाज में चमत्कार या भय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है,दुनियां रहस्यों से भरी है रहस्य के प्रति जिज्ञासा ही आविष्कार को जन्म देती है।परंतु हजारों साल से भूत,प्रेत,पिशाच,आत्मा इत्यादि का पूरे विश्व में अत्यधिक भय है सब डरते हैं किसी को दिखा नहीं एहसास होता है लेकिन भय बहुत है और सबसे मजेदार पूरे विश्व में डाक्टर से अधिक संख्या में भूत भगाने वाले हैं गांव गांव में हैं चमत्कार दिखाते हैं कहीं भूत नृत्य करते हैं,कहीं कुछ करते हैं पर ये भूत न तो कम होते हैं न भागते हैं समाज में भय रहता है मेरे प्यारे मित्रो इसे कहते हैं भय का भूत इतना जबरदस्त अंधविश्वास फैला हुआ है और इंटेलिजेंट लोग उसमें भी तड़का लगा लेते हैं बाकायदा मीडिया पर शो आते हैं शशशशशशश कोई है इत्यादि मैं पिछले पोस्ट में बता चुका हूँ ईसाई कब्रिस्तान में आत्माएं नहीं मिली,उसके बाद नाना की कहानी में ताबीज का जिक्र हुआ सत्य घटनायें हैं मैंनें अपनी आंखो के सामने मौलवी साहब को भूत भगाते हुये देखा है,मित्रो 17 वर्ष की ही उम्र में मैने एक प्रयोग किया या समझिये अनजान स्थिति में हो गया मेरे निर्भय स्वभाव के चलते बचपन से अकेलापन और प्रकृति मुझे अत्यधिक प्रिय है अतः इलाहाबाद में छात्र जीवन में जिस दिन पढ़ने में एकाग्र नहीं होते थे उठाया अपना रथ मतलब साईकिल और चल दिए रात्रि विचरण पर अकेले सबसे पसंदीदा स्थान होता था संगम तट कई किमी की साइक्लिंग के बाद जहां गंगा और यमुना मिलती हैं वहीं पंडो के तख्त पड़े रहते थे लगा लेते थे आसन विराज हल्की सी बहते हुये पानी की आवाज चंद्रमा का प्रकाश असीम शान्ति बीच-बीच मेंं जब ट्रेन पास होती थी तभी भंग होती थी।यह कार्यक्रम दो वर्षों में 25-30 बार आधी रात से सुबह तक किया और संगम तट प्रसिद्ध है हमारे सनातन धर्म में अस्थि विसर्जन और पिंड दान के लिए भैया एक दो आत्मा,भूत-प्रेत कुछ तो दर्शन दे ही देते किसी ने नहीं दिया ये प्रयोग मेरे शौक ने करा दिया।इसका मतलब यह नहीं है कि मैं पराचेतना,आत्मा के अस्तित्व को नकार रहा हूँ मैं नकार रहा हूँ अंधविश्वास को मैं नकार रहा हूँ भय के भूत को जिसका डर मीडिया के द्वारा समाज में बैठाया जाता है जिसके डाक्टर हर तीसरे गांव में उपलब्ध हैं।अरे भैया आत्मा क्या है श्रीमद्भागवत गीता पढ़ लो गीता प्रेस वाले बहुत सस्ते में उपलब्ध करा रहें हैं श्रीकृष्ण भगवान् ने ताल ठोंक के बताया है भूत प्रेत क्या शिवपुराण पढ़ लो बहुत सारी पुस्तकें हैं शर्त ये है अच्छे लेखक या अनुवादक की पुस्तक पढ़ना अन्यथा भ्रमित भी हो सकते हो हमारे ग्रन्थों को विकृत करके भ्रम फैलाने का कार्य भी किया गया हैंं सुनियोजित तरीके से।
जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः
10)
मित्रो हमारी बात अंधविश्वास पर चल रही थी अब ये हर धर्म,सम्प्रदाय में समस्त विश्व में किसी न किसी रूप में अपना अस्तित्व बनाये हुये है,मेरा व्यक्तिगत अनुभव यह है यदि आप निर्भय हैं तो यदि कहीं कोई अदृश्य ऊर्जा है भी तो आपके सामने नहीं आ सकती क्यों भाई क्योंकि आत्मा ही परमात्मा है आप ईश्वर की सबसे शक्तिशाली और सुंदर रचना हो आपके पास बुद्धि है विवेक हैं नेतृत्व करने की क्षमता हैं, सोचने की क्षमता है ज्ञान है फिर भी आप डर रहे हो वो भी अज्ञात से धिक्कार हैं, मृत्यु से वो तो सदा सत्य सबको मरना ही है तो डरना कैसा बस समझ लो भूत की समस्या समाप्त हो गयी।यदि मर भी गये तो आत्मा तो अमर है अविनाशी है तुम भी भूत बन जाना और मौज लेना बिना टिकट के अन्तराष्ट्रीय विचरण करो न ईएमआई का झंझट न मोह माया मस्त आज एशिया में तो कल अरब दो दिन बाद यूरोप ज्यादा मस्ती करोगे तो फिर डरना कैसा।अब अंधविश्वास के साथ मामला आता है तकनीक,विज्ञान का जिसे हम अपने यहाँ तंत्र,मंत्र,यंत्र कहते हैं पूरे विश्व में अलग अलग तरीके हैं परंतु अस्तित्व हर स्थान पर है हमारा देश अति प्राचीन व्यवस्था है अतः हर गांव में एक न एक बीमारी का भगत/तांत्रिक या डॉक्टर कोई न कोई मिल जाता है और वह उस विज्ञान को अंधविश्वास की श्रेणी में लाकर संदेहास्पद कर देता है।यद्यपि सत्य यह है कि हमारे प्राचीन तंत्र,मंत्र और यंत्र पूर्ण वैज्ञानिक हैं आप उनको पूर्ण वैज्ञानिक माध्यमों से सत्यापित कर सकते हैं उदहारण के तौर पर अभी एम्स ने गायत्री मंत्र पर रिसर्च की और सकारात्मक परिणाम बताये।हमें शर्म आनी चाहिए विदेशों में लोग हमारी प्राचीन चीजों पर रिसर्च कर रहे हैं हम मजबूत सरकार से विनम्र निवेदन करते हैं कि तंत्र,मंत्र,यंत्र को विधिवत् शोध और शिक्षा में शामिल किया जाये जिससे योग की तरह हमारी प्राचीन वैज्ञानिक विधियां जिन्हें अन्धविश्वास और हेय दृष्टि से देखा जाता है उनकी वास्तविकता पूरे विश्व को पता लगे और देश के अंदर व्याप्त अंधविश्वास समाप्त हो।
इन शक्तियों का नकारात्मक प्रयोग समाज में न होने पाये।
जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
समाप्त।
मित्रो हमारे आदरणीय प्रधानसेवक जी ने अपनी दूसरी पारी प्रारम्भ कर दी है 2010 से भारतीय राजनीति पर फेसबुक के माध्यम से करीब से नजर रखने का अवसर प्राप्त हुआ और गूगल बाबा से ज्ञान की प्राप्ति इसके लिए विज्ञान के इन आविष्कारों का बहुत बहुत धन्यवाद।प्रधानसेवक जी की आक्रामक कार्यशैली के अनुरूप उन्होंने इस बार तीव्र गति से एक योग्य और साफ सुथरे मंत्रिमंडल का गठन किया वैसे राजनीति में ऐसे शब्द प्रायः कम ही लोगों पर फिट बैठते हैं फिर भी जो उपलब्ध थे उनमें बेहतर को चुना तुष्टिकरण भी आवश्यकतानुसार किया गया गठन में, मंत्रिमंडल का आकार छोटा होना अच्छी बात है वैसे भी व्यवस्था प्रशासनिक अधिकारी ही चलाते हैं।
2014 में प्रधानसेवक जी के पास अनुभव नहीं था व्यवस्था बहुत बड़ी मिली थी भ्रष्टाचार और महंगाई के बड़े मामले जनता के सामने उजागर हो चुके थे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों जनता के आक्रोश से निराश थे,प्रधानमंत्री जी ने अपने कार्पोरेट दिमाग का इस्तेमाल कर 100 स्मार्ट सिटी के साथ सभी मोर्चों पर काम प्रारम्भ किया और विपक्ष ने पूरी ऊर्जा कमी निकालने में अन्तत सत्ता पक्ष को विपक्ष की नकारात्मक मानसिकता का लाभ मिला गरीबों के लिए केंद्र की योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने में मोदी जी का प्रशासनिक अनुभव काम आया बड़े पूंजीवादीयों ने गजब का लाभ कमाया,पब्लिक सेक्टर और मध्यम वर्ग लगातार दबाव में रहे।पिछली सरकार प्रधानसेवक जी ने कार्पोरेट माइंड से चलाई जिससे हमारी डूबती हुई बैंकिंग व्यवस्था सही हुई और मंदी के दौर से निकलकर स्थिरता बनी बेरोजगारी बढ़ी ।
2019 के प्रारम्भ में ऐसा लग रहा है कि प्रधानसेवक जी प्रशासनिक अधिकारियों के दिशानिर्देश में कार्य करेंगे और देशहित के बड़े लक्ष्यों पर काम करेंगे,ऐसा ही होना भी चाहिए व्यापारी का मुख्य उद्देश्य रोजगार सृजन है वर्तमान में,अन्यथा आप कहीं भी सम्बद्ध करेंगे तो दलाली प्रारम्भ हो जायेगी नैतिक स्तर गिर चुका है व्यापार का।
हम हिन्दुस्तानी ईश्वर से प्रार्थना करते हैं देश का कल्याण हो और प्रधानसेवक जी के नेतृत्व में हिन्दुस्तान विश्व गुरू बने।
परन्तु हम हिन्दुस्तानी आपके पहले निर्णय का बहुत जबरदस्त विरोध करते हैं जो आपने मुस्लिम बच्चों को वजीफा देने के लिए और मदरसों के आधुनिकीकरण की बात कही है क्योंकि आप 130 करोड़ लोगों का नेतृत्व कर रहे हैं और यह तुष्टिकरण है।महात्मा गाँधी कहते थे कोई भी काम करना है अपने से करो मेरे दोनों बच्चे सेंट जोसेफ संस्था में पढ़ते हैं जो वेटिकन सें संचालित ईसाई मिशनरी स्कूल है दोनों बच्चे प्रतिदिन हनुमानचालीसा पाठ करते हैं और प्रत्येक रविवार को दादा-दादी के साथ गायत्री यज्ञ करते हैं।एक दिन मैं उनको ड्राप करने गया तो दोनों ने प्रवेश करते ही सेंट जोसेफ और जीसस को प्रणाम किया फिर आगे बढ़े मैनें तो नहीं कहा था पर हमारे धर्म और संस्कार नफरत नहीं सिखाते हैं और उस स्कूल में भी कोई भी शिक्षा ग्रहण कर सकता है।हां ईसाई मिशनरीज ने विगत वर्षों में धर्म परिवर्तन के प्रयास किये तो परिणाम गांधी परिवार और कांग्रेस को भुगतने पड़े।अब जब जनता चौकीदार है आप हैड चौकीदार और मैं सुपरवाइजर चौकीदार तो प्रधानसेवक जी आपके चरणवंदन नेता वाला दिमाग गुजरात में छोड़ दें अभी आप मुस्लिम को वजीफा देंगे फिर हिंदू को देंगे परिणाम फर्जी नाम लिखे जायेंगे कर्मचारी और मदरसे स्कूल प्रबन्धन मिल कर खा जायेंगे हिन्दू-मुस्लिम में दूरी बढ़ायी और चले गये विदेश यात्रा भ्रष्टाचार का नया दरवाजा खोल गये यही तो कांग्रेस ने किया था।अब जनता चौकीदार है कृपया अंग्रेजो की तरह राज करने की न सोचें पूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहाल करने कां प्रयास करें।
स्मार्ट प्रधानमंत्री स्मार्ट जनता ।
जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
2)
हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने पद सम्हालने के बाद पहला कदम मदरसों के लिए उठाया बहुत अच्छी बात है इतनी बड़ी व्यवस्था के लिए सभी की दुआयें आवश्यक होती हैं पर मतदाता 80% समाज का और आप दुआयें लेना चाहते हैं 20% की ये तो नाइंसाफी हो गयी परमात्मा तो सबकी बराबर सुनते हैं जैसे कि आप महादेव के भक्त हैं महादेव तो देवताओं और असुरों दोनों के देवता हैं वह वर्तमान में किये कर्म के फल के सिद्धांत को प्रतिपादित करते हैं जय महाकाल।परम आदरणीय प्रधानसेवक जी बिना लड़ाई किये कार्य भी सिद्ध हो जाये और अधिक से अधिक लाभ ले लिया जाये यह गुजराती से अच्छा कोई नहीं जानता अतः हम पूरे देश में आपसे ऐसे ही गुजरात माॅडल की आशा करते हैं आतंकवादी और अपराधियों पर कोई रहम नहीं किया जाना चाहिए ऐसी आम जनता आशा करती है।हमारे सरस्वती विद्या मंदिर में सभी धर्म के बच्चे,ईसाई मिशनरी स्कूल में सभी धर्म के बच्चे परन्तु मदरसों में केवल मुस्लिम बच्चे आखिर क्यों ये इतने उदार नहीं हैं कि स्वीकार नहीं अत्यन्त विचारणीय है।अब मुद्दा स्वयं प्रधानसेवक जी ने छेड़ा है अतः सभी चौकीदारों की जिम्मेदारी है कि चिन्तन करें देश का मामला है और अत्यंत महत्वपूर्ण भी है और सभी चौकीदारों का अधिकार भी तो मित्रो वैश्वीकरण हो चुका पूरे विश्व में उदार व्यवस्थाएं अत्यंत सुखद और सफल हैं सारी प्रतिभाओं का पलायन उसी दिशा में होता है जहाँ वह सुरक्षित और आरामदायक महसूस करते हैं।मदरसों पर बात करने से पहले आम आदमी के धर्म को हल्का फुल्का समझते हैं उदहारण के तौर पर मेरे पहले भगवान् हनुमानजी थे बहुत छोटा था सुबह ही मां ने उठाया और नहला दिया और बोलीं पापा के साथ मन्दिर जाओ आज बड़ा मंगल है भैया एक थाली में लड्डू और पूये लेकर चले देशी घी की खुश्बू मन तो हुआ पहले खाऊं पर जैसे-तैसे मंदिर पहुंचे गोद में चढ़कर घंटा बजाया फिर तिलक लगाकर भोग लगाया और जोर से बोला जय श्री राम जय बजरंगबली बाहर निकले प्रसाद बांटा घर पहुंचे धैर्य जबाब दे चुका था लड्डू और पूओं पर आक्रमण भैया पूरी धार्मिक प्रक्रिया में हनुमानजी को आनंद आया हो या न आया हो मैं तो बचपन के आनंद से सराबोर हो गया तो मित्रो धर्म क्या है जो हमने बचपन में सीखा जिसमें आनन्द आ जाये जहां उत्सव हो।मेरा दूसरा अनुभव माता-पिता के साथ 1984 में 9दिन का शानतिकुंज आश्रम में प्रवास तब गुरूदेव भी वहीं थे मैं ठहरा अति शैतान अकेला पूरे दिन आश्रम में भ्रमण और शैतानी जो मिले वही अनुशासन सिखाये अरे भैया अनुशासित हो जायेंगे तो नयी चीजें कैसे खोजेंगे अतः हम भी न सुधरने वाले प्रातःकाल में माताजी वहां सबसे मिलती थीं सब लाईन में जाते थे पैर छूते थे शैल दीदी एक बहुत छोटी कटोरी में कुछ आयुर्वेद का पेय पदार्थ पीने के लिए देती थीं मुझे बहुत अच्छा लगता था रोज दो तीन चक्कर मैं लाईन में लगकर पी आता था।एक दिन मेरा शैतान जाग गया चौथे चक्कर पर मुझे कार्य कर्ता ने रोका मैनें उनकी चुनौती स्वीकार की पांचवा छुपकर पूरा किया छठवां भी छुपकर पूरा किया और माताजी जैसे समझ गयीं उन्होंने बैठा लिया पास में और पूछा बार बार क्यों आते हो इतने प्रेम से पूछा तो मैंने कहा ये पेय पदार्थ मुझे पसंद है उन्होनें समझाया यह आयुर्वेदिक दवा है ज्यादा प्रयोग नुकसानदायक हो सकता है तो मित्रो उन नौ दिनों में मैनें धर्म से क्या सीखा अनुशासन,समूह में रहना इत्यादि।ईसाई चर्च में जाते हैं दीपक जलाते हैं मतलब अन्धकार से प्रकाश करते हैं फादर जल छिड़कते हैं पवित्रता से सम्बन्ध है मैं कभी चर्च नहीं गया सुना ऐसी ही प्रकियायें होती हैं प्रार्थना करते हैं अरे भैया प्रार्थना तो वही करोगे जो तुम्हारी जरूरत होगी तो व्यवसायी हो तो भगवान् के पास भी बहुत काम हैं महापुरूष सबके कल्याण की प्रार्थना करते हैं।अब आ जाओ इस्लाम पर बहुत आसान अजान और दुआ अरे भैया उठो जहां भी हो जैसे हो जिस हालत में हो ये हो गयी अजान और दुआ में परमात्मा को याद करो निराकार परमात्मा भैया हमारे धर्म में निराकार की साधना सन्यासी लोग करते हैं क्योंकि उनकी ऊर्जा को धारण करने के लिए यम,नियम,संयम,प्रत्याहार, प्राणायाम, ध्यान, धारणा और समाधि के अष्टक नियम का अनुपालन आवश्यक है।
इस्लाम कहता है दुआ में अल्लाह हो अकबर परम सत्य है अरबी भाषा है जिसका मतलब है ईश्वर महानतम है, God is great. तो भैया जो हमने अपने धर्म से सीखा है वह ये है कि जीवन से मृत्यु तक एक उत्सव यात्रा है उसका पूरा आनन्द लें और वर्तमान में जो संसाधन उपलब्ध हों उनका उपभोग करें और सभ्यता के विकास में परिस्थितियों से सामंजस्य बैठाते हुये अपने आदर्शों से समझौता न करते हुये अपना योगदान दें।साकार की पूजा करें जिस भगवान् को जो पसन्द वो खिलाएं भगवान् प्रसन्न हों तो ठीक अन्यथा स्वयं खाकर अपने को प्रसन्न करें।
जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः
3)
भैया हमारे भगवान सूंड वाले हैं पूंछ वाले हैं बैल पर चलते हैं शेर पर चलते हैं चार हाथ वाले हैं पांच मुंह वाले हैं जब भक्त प्रसन्न तो भगवान प्रसन्न कम से कम दिखते तो हैं अब भविष्य में शायद उन्हें मर्सिडीज पसन्द आ जाये या लड्डू गोपाल जेसीबी की जिद्द कर जायें कि झूला नहीं अब ट्रैक्टर चलायेंगे भगवान् भावना के भूखे हैं प्रेम के भूखे हैं सत्य के भूखे हैं अरे भैय्या 56 भोग भगवान को जब हम श्रद्धापूर्वक भावना से अर्पित करके ग्रहण करते हैं तो उसका स्वाद अलग होता है ठीक वैसे जैसे पत्नी अगर प्रेम से भोजन कराये तो स्वाद अलग और गुस्से में तो आप सभी समझदार हैं,इसलिए कहा जाता है बच्चे तो भगवान् की मूरत होते हैं।ये हमें साकार पूजा जो प्रतीकात्मक हैं हमें सिखाती हैं दैनिक जीवन में अनुशासन,नियम,प्रेम,करूणा,दया इत्यादि और मित्रो हम इसमें अति प्रसन्न हैं अन्य धर्मों का हमेशा सम्मान करते रहे हैं जब गुलामी में हमारे पूर्वज उन नियमों प्रसन्न और प्रगतिशील रहे तो अब तो कोई सवाल ही नहीं है।अब बात करते हैं हिन्दुस्तान में जैन धर्म और बौद्ध धर्म,सिक्ख सम्प्रदाय ये सब सीधे हमारे वैदिक धर्म से जुड़े हैं और सबका मुख्य कार्यालय कैलाश पर्वत है,जो हमें कम करके आंकते हैं उनके लिए लिख रहा हूँ आप कतई भ्रमित न हों कि अलग अलग हैं हां अति प्राचीन हैं।हमारे देश में ईसाई और इस्लाम धर्म विदेश से आये हैं यदि सृष्टि के आरम्भ से खोज की जाये तो इनका केन्द्र भी यहीं निकलेगा।मित्रो ईसाई धर्म भी जीसस मतलब अवतार को भगवान् मानते हैं, इस्लाम में मुहम्मद साहब को भगवान् मानते हैं वो भी अवतार थे हमारे धर्म में जैसे कृष्ण,राम कई अवतार हुये उससे बहुत पहले वैदिक युग कृष्ण भगवान् ने श्रीमद्भागवत गीता बोलते हुये यह स्वीकार किया था हे अर्जुन मैं ही परमेश्वर हूँ वह ग्रन्थ वेदान्त का सार है मतलब उसके बहुत पहले वेद लिखे जा जुके थे।ज्यादा गहराई में चले गये वापस आते हैं मित्रो सारांश यह है सृष्टि के आरम्भ का केन्द्र एक है ब्रह्मांड में हमने सूर्य और चन्द्र दोनों को गणना में मुख्य रखा और हमसे कोई कोई ज्ञानी भाई बन्धु नाराज होकर चला गया होगा उसने चन्द्र को मुख्य केन्द्र माना और ईसाई और इस्लाम का उदय हुआ हमारे राम सूर्यवंशी थे और कृष्ण चन्द्रवंशी वर्तमान में विज्ञान के माध्यम से हम चन्द्रमा तक पहुंच पाये हैं और पुराणों के अनुसार हमारे पूंछ वाले भगवान् हनुमान जी बचपन में सूर्य को निगल गये थे अतः अन्य ब्रह्मांड की भी सम्भावना है लगे रहो।ANYWAY IMAGINATION IS ALWAYS MORE POWERFUL THAN DETERMINATION. अब हम मुख्य मुद्दे पर चलते हैं एक आम आदमी के जीवन में धर्म का महत्व क्या है मित्रो उसकी जन्म से मृत्यु तक के संस्कार,व्यक्तिगत दिनचर्या, पारिवारिक व्यवस्था,धार्मिक त्योहार इत्यादि सभी धर्म ही नही बल्कि क्षेत्रों के अलग अलग हैं और सरकार उन्हें विधिवत् सम्पन्न भी करवाती है।अब विवाद करता कौन है किसी धर्म का व्यक्ति नहीं करता है आप संविधान को कुरान से जोड़ते हैं एक पवित्र धार्मिक ग्रन्थ का एक प्रशासनिक ग्रन्थ से तुलना करते हैंं संविधान में तो व्यवहारिक संशोधन समयानुसार किये जायेंगे कुरान में नहीं किये जायेंगे आपके धर्मगुरू आज के अनुसार कुछ नया लिख सकते हैं अल्लाह का सन्देश जिससे आपका कल्याण हो जहां तक मुझे लगता है आपसे बहुत अधिक शक्तिशाली लोग विश्व में हैं हिंसा और चरमपंथ छोड़ना ही होगा शिक्षित और सभ्य बनना ही पड़ेगा सहनशील बनना होगा यदि शान्ति स्थापित करना चाहते हैं अन्यथा आपकी मर्जी हम संगठित रहेंगे शतप्रतिशत।
जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः
4)
मित्रो मैनें कुरान नहीं पढ़ी है कोई उपलब्ध कराये हिन्दी/इंग्लिश तो शायद और अच्छा विश्लेषण कर सकूं हां तो धर्म का तत्वज्ञान यह है कि किसी मनुष्य,समुदाय,समाज,राष्ट्र या विश्व का स्तर श्रेष्ठ उत्कृष्ट बनाना और पिछले कुछ वर्षों से तीन तलाक के मुद्दे पर जो टीवी पर बहस मैनें सुनी उसमें मौलवी जो मदरसों को संचालित करते हैं उन्होंने सबने एक साथ उसका विरोध किया आपने क्या किया सबसे पहले अपनी पत्नियों का अपमान किया,अपनी बहनों का अपमान किया,महिलाओं का अपमान किया पहले हमारे पूर्वज भी बहुविवाह करते थे,फिर रखैल का प्रचलन आया आज हमारे समाज में एकल पत्नी व्यवस्था है और यदि कोई ऐसा करे तो पत्नी झगड़ा करेगी और माता-पिता,बहनें सब पत्नी के पक्ष में चप्पल सेवा भी प्रदान कर सकते हैं और सबसे शर्मिन्दगी की बात यह की सारे मौलवी टीवी पर गला फाड़ कर हवाला दे रहे थे सबसे पवित्र ग्रन्थ कुरान का शरम करो महिलाओं को तुम्हारे विरोध में खुल कर आना पड़ा इसीलिए तुम औरतों को दबाकर रखते हो,हिंसक बन कर रहते हो कि अय्याशी कर सको।दूसरी बात जब चुनाव आता है उसके आगे पीछे तुम्हारा इस्लाम खतरे में आ जाता है कयों भाई कोई भी बात हुई तुम्हारे हिसाब से सरकार नहीं बनी तुम्हारे मन का नेता नहीं जीता इस्लाम खतरे में आ गया अरे भाईयो जब अल्लाह सबसे बड़ा है आप निराकार की पूजा करते हो तो आपको अल्लाह पर भरोसा नहीं है क्या कि वो आपकी रक्षा करेगा या तो आप अल्लाह के अनुसार चलो या अल्लाह को अपने अनुसार चला लो अभी आपकी हरकते ऐसी हैं कि अल्लाह को आपके अनुसार चलना होगा ऐसा नहीं हैं हमारे धर्म में भी हैं बोल दिया जय श्री राम राम कौन थे राम ने रावण मारा था रावण कौन था पंडित था सारे पंडित हमारे दुश्मन हैं जय श्री राम बहुत मिल जायेंगे ऐसे भैया राम मर्यादा पुरुषोत्तम विष्णु अवतार थे इतना वो समझना नहीं चाहते ठीक है।तो अल्लाह के बंदो श्रेष्ठ बनो भाईचारा कायम करो जो पूर्वजों ने हिंसा और गलतियां की हैं वो थीरे धीरे लोग भूलेंगे प्रेम में बहुत शक्ति है।
अब चलते ईसाई धर्म की ओर आप लोग आधुनिक,प्रयोगवादी, व्यवहारिक, वैज्ञानिक और आशावादी, सकारात्मक, रचनात्मक दृष्टिकोण लेकर पूंजीवाद के सहारे जीसस के सन्देश सबसे प्रमुख सन्देश सेवा लेकर चले अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत कार्य किये छोटा सा उदहारण हमारे शहर में 28 साल पहले सेंट जोसेफ संस्था खोलकर लगभग 28000 बच्चों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर तैयार करना रोजगारपरक शिक्षा देना और दूसरा सेवा का उदहारण कानपुर में मरियमपुर हास्पिटल खोलना ब्रिटिश टाईम में जिसकी सेवायें लाखों लोग आज भी लेते हैं परन्तु अब वही सेवा शिक्षा और स्वास्थ्य मेवा बन गयी है लूट मची है अतः आपके धर्म का सन्देश खतरे में है।ईसाई धर्म द्वारा हिन्दुस्तान में गलत कार्य विगत कुछ वर्षों में बहुत तेजी से धर्मांतरण वो धन देकर अत्यन्त घटिया और निन्दनीय है।मेरा जानने वाला एक वर्कर मिला मैनें उससे हालचाल पूछा बताया भाई साहब ईसाई बन गये रूचि जागी पूरा विवरण समझा 10000 प्राप्त हुये थे दो साल बाद मिला उसने सर गंजा करवा रखा था मैने पूछा क्या हुआ बोला भाई मर गया था तो मैनें कहा तुम तो ईसाई बन गया था वो हंसा बोला भाई साहब उसके बाद दो बार और बन चुका हूँ वो महाशय दलित समाज में चमार जाति से थे ये हिन्दुस्तान है मेरी जान आपने क्या किया हमारे देश की अच्छी खासी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस डुबा दी ईसाईत के चक्कर में मैं श्रेष्ठ हूँ इस चक्कर में अरे जिस दिन पूरे विश्व से गरीबी मिट जायेगी और जिसको आध्यात्मिक ज्ञान में रूचि होगी उसे ब्राह्मण ही बनना होगा वेद ही पढना होगा क्योंकि वेद परमात्मा ने नहीं बोले हैं हमारे ॠषियों के तपबल से उत्पन्न प्रज्ञा है।धर्म पर हम विश्व में आध्यात्मिक गुरू थे हैं और सर्वदा रहेंगे।धर्म पर चर्चा समाप्त अब प्रधानसेवक द्वारा मदरसों के आधुनिकीकरण पे चर्चा करेंगे।
जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः
5)
प्रधानसेवक जी ने शपथ लेते ही तुष्टिकरण की नीति अपनाते हुये पहली घोषणा की सिर्फ मुस्लिम बच्चों को वजीफा देंगे और मदरसों का आधुनिकीकरण करेंगे।यदि आप सही है तो किसी का भी तुष्टिकरण बेईमानी है और मदरसों के आधुनिकीकरण में आप क्या करेंगे निर्माण कार्य,लैपटॉप इत्यादि और वजीफा के नाम पर नकद खाते में मतलब जम कर भ्रष्टाचार का प्रारम्भ हो गया और वहाँ बच्चों को कैसी मानसिकता के शिक्षक शिक्षा देंगे वह पूरा देश टीवी पर बहस में देखता है मतलब आप स्वयं चरमपंथ को बढ़ावा दे रहे हैं।माननीय प्रधानसेवक जी चरणवंदन के साथ विनम्र निवेदन है आप मेरे बाप की उम्र के हैं और देश के सबसे बड़े मंदिर संसद के सबसे बड़े पंडित हैं अतः यह आपकी जिम्मेदारी है कि धारा 30 पर पुनर्विचार करें और देश में एक समान शिक्षा नीति लागू करें अन्यथा भविष्य में अमीर गरीब की शिक्षा में जो विभाजन हो रहा है और समानांतर आर्थिक असमानता तेजी से बड़ी है विवाद का मुख्य कारण हो सकता है जो कतई देशहित में नहीं होगा मौकापरस्त ताकतें अस्थिरता पैदा करेंगी।हमें अपने देश में चरमपंथ और शरणार्थी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करने चाहिए,आज हमें आवश्यकता है अपने देश के मुस्लिम भाईयों विशेषतः मौलवियों के दिमाग के आधुनिकीकरण की इन सबको पाकिस्तानी नेटवर्क से शतप्रतिशत विच्छेद करके पहले विकसित देशों के इस्लामिक मौलवियों से शिक्षा दिलवा कर वैश्वीकरण के दौर में इनका आधुनिकीकरण करिये इसके बाद ही कोई बजट दीजिए अच्छे दिमाग का व्यक्ति एक पेड़ के नीचे भी अच्छी शिक्षा दे सकता है हमारे देश के मुस्लिम बच्चों को रोजगारपरक,वैश्विक और आधुनिक शिक्षा दी जाये जिससे वो चरमपंथ से दूर हटकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निर्धारित करें।
अभी ठीक चुनाव के बाद जिस तरह का माहौल बन रहा है इसके क्या मायने निकाले जाये कि समाज में अज्ञात भय व्याप्त हो जाये या सत्ता पक्ष के खिलाफ जनता भड़क जाये या सत्तापक्ष की ही कूटनीति की ऐसे माहौल में विपक्ष की क्या प्रतिक्रिया होती है विचारणीय है।हमारा देश बहुत बड़ा है प्रतिदिन बहुत सी घटनायें होती हैं राजनीतिक प्रबंधन अपने फायदे नुकसान के अनुसार मीडिया मैनेजमेंट करते हैं परन्तु मजबूत सरकार बनने के बाद तीन बड़ी घटनायें अन्तरराष्ट्रीय माफिया/आतंकवादी या हमारे दुश्मन देश की साजिश भी हो सकती हैं एयरफोर्स दुर्घटना बिना युद्ध के हमारे तेरह जवान शहीद,कश्मीर में सीआरपीएफ के पांच जवान शहीद और बंगाल में डाक्टर की रोहिंगया शरणार्थीयों द्वारा पिटाई और उस उस घटना का जबरदस्त राजनीतिक प्रबन्धन मीडिया में क्योंकि दीदी ने चुनाव प्रचार में आपकी भाषा में प्रचार किया और 18 जवानों की शहादत के बाद कोई राजनीतिक प्रबन्धन नहीं मीडिया मैनेजमेंट नहीं क्योंकि अब चुनाव हो चुका है जबकि पुलवामा के बाद आप टीवी पर ऐसे दिख रहे थे जैसे पाकिस्तान मिट गया अब कोई नहीं बचा सकता जब आप शहीदों की परिक्रमा कर रहे थे वाह प्रधानसेवक जी वाह कौन है आपका इवेंट मैनेजर
जय हिंद वन्दे मातरम ।
सुधीर तिवारी
क्रमशः
6)
मित्रो संसद सुचारू रूप से प्रारम्भ अब प्रधानसेवक जी को अपना कार्य करने देते कुछ समय बाद विश्लेषण करेंगे ये हमारा सौभाग्य है कि हमें कर्मशील और ऊर्जावान प्रधानसेवक मिला है।मैनें 2010 में फेसबुक ज्वॉइन किया था राजनीति में रूचि है और कांग्रेस विचारधारा से हमेशा प्रभावित रहे हैं लिहाजा फेसबुक पर भी उसी प्रारम्भ से फालो किया तो जो पसन्द आया शेयर करते रहे मतलब डिजिटल प्रचारक कांग्रेस के बने रहे डाॅ मनमोहन सिंह निश्चित रूप से एक सज्जन,ईमानदार व्यक्ति हैं और विश्व स्तर के अर्थशास्त्री और एक सफल प्रधानसेवक रहे उनके नेतृत्व में हमारे देश की अर्थव्यवस्था ने बुलन्दियां हासिल की और उच्चतम वृद्धि दर पर अर्थव्यवस्था पहुंची हमें उन पर गर्व है।सोनिया गाँधी जी ने यूपीए की कमान सम्हाल कर डिनर डिप्लोमेसी से काफी हद तक स्थिरता रखी और देश को आगे बढाने में पूर्ण योगदान दिया।गठबंधन की सरकार चलाना बहुत टेढ़ी बात है अतः भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण चरम सीमा पर हुआ और सोनिया जी के ईसाई होने के नाते ईसाई संगठनो ने लाभ उठाते हुये कई राज्यों में जबरदस्त धर्मांतरण हुआ जिसके परिणामस्वरूप राहुल और प्रियंका को नकार दिया गया ये भी एक कारण है दूसरा कारण है जनता में वंशवाद का विरोध राहुल जी और प्रियंका जी सर्वे करवा लें अब समय बदल गया है आम जनता नेता को इज्जत की नजर से नहीं देखती है उनके बच्चों को शतप्रतिशत नफरत की नजर से देखती है टेलीविजन होने से सब टीवी देखते हैं और जागरूक हैं आज जो संसद में कर हो रहा था इस पर आम जनता की प्रतिक्रिया कि लडाना चाहते हैं और शांत हो जाते हैं अब ओवैसी चीखेगा अल्लाह हू अकबर तो जिस जनता ने 800 साल गुलामी झेली और वर्तमान में अभी बंगाल में डाॅकटर कांड,टिंवकल कांड और केरल में महिला पुलिस कांड और फिर संसद में जय श्री राम कांग्रेस का कर दिया काम तमाम सीधा मतलब है कि हम वन्दे मातरम् नहीं कहेंगे मतलब तुम भारत बनाओ मतलब विपक्ष हमारे मुसलमान भाई हिन्दुत्व वाला चाहते हैं उन्हें धर्मनिरपेक्षता रास नहीं आ रही है।आदरणीय राहुल जी सीधे हैं उनके स्वतन्त्र विचार नहीं हैं,आरम्भ करने की क्षमता नहीं है हां दृढ़निशचयी हैं मोदीजी का धैर्य जबाव दे गया विगत चुनाव में मानना पड़ेगा परन्तु भारतीय राजनीति में सफल नहीं हो सकते विपक्षी ही लाभ उठाते रहेंगे।आप को अब आना चाहिए था विगत चुनाव में आकर दो दिनों में आपका काम तमाम कर दिया चमचों ने राजनीति में भारतीय राजनीति में अगले 20 सालों तक हिन्दूवादी राजनीति हावी रहनी है यदि जनसंख्या नियंत्रण कानून ले आये हमेशा के लिए रहेगी अन्यथा पुनः इस्लामिक राजनीति हावी होगी।बाड्रा जी को पहले ही लपेट रखा है अतः गांधी परिवार सम्मानित मार्गदर्शन करे और नयी कांग्रेस का गठन होने हिन्दुत्व वाली कांग्रेस स्वतंत्रता आंदोलन वाली कांग्रेस,वल्लभ भाई,अम्बेदकर,नेता जी,नेहरू-गांधी वाली कांग्रेस जिसके नाम से हमारी विश्व में पहचान है जिसके 70 सालों के कामों से हम हवाबाजी कर रहे हैं।
वर्तमान कांग्रेस से हम शर्मिन्दा हैं।
जय श्री राम जय श्री कृष्ण
हर हर महादेव
क्रमशः
7)
मित्रो आजकल समाचारों पुनः बाबा राम रहीम चर्चा में है हरामखोर ड्राइवर था दो गुरू थे मस्ताना और शाह बाद में कब्जा कर लिया इसने इसके पहले जो संत थे परमात्मा की कृपा थी उनपर अच्छे भी थे उनका उत्तराधिकारी बनकर लोगों की भावनाओं का शोषण किया,ऐसा मैनें सुना है जानकारी गलत भी हो सकती है।परन्तु मैनें स्वयं इसका इंटरव्यू सुना एकबार उसमें ये आत्मा को बुलाने की बात कराने की बात कर रहा था मतलब स्वयं को श्रेष्ठ दिव्य पुरूष और सामने वाला उसकी दिव्य शक्तियों से डरे इस तरह का प्रचार केंद्र अज्ञात आत्मा जिसे आप न देख सकते हैं न सुन सकते हैं न महसूस कर सकते हैं मतलब भय का भूत बस यही व्यापार है अंधविश्वास का और पूरे विश्व में है सिर्फ हमारे देश में ही नहीं विकसित देशों में भी है मित्रो।मेरा स्वभाव बचपन से प्रयोगवादी और अंधविश्वास को न मानने का रहा है मेरे पूर्वज भी इन बातों पर विश्वास नहीं करते थे अर्थात शिक्षित थे उसी स्वभाव के तहत 1994 में जब मेरी उम्र17+ साल थी आत्मा से सम्बन्धित प्रयोग किया इलाहाबाद में शिक्षा के दौरान एक सीनियर महोदय ने प्रभाव बनाने के लिए आत्मा पर भाषण दिया और बताया कि वो आत्मा से बात तो नहीं करा सकते पर सिक्के के माध्यम से हां या न में प्रश्न का उत्तर दिलवा सकते हैं महाशय झारखंड से थे बहुत आत्मविश्वास था बताया उनके गुरू ने सामने करके दिखाया है मैं ठहरा प्रयोगवादी मैनें कहा सर आज ही चलते हैं साईकिल निकाली और दोनों एक ईसाई कब्रिस्तान काफी बड़ा था ऊंची चहारदीवारी चारो ओर बड़ा गेट हम लोगों ने सोचा अन्दर कैसे प्रवेश किया जाय थोड़ा डर लगा फिर साहस किया साईकिल को चहारदीवारी के किनारे लगाया और कूद गये अन्दर कब्रिस्तान में एक झाड़ी तोड़ी गयी और एक कब्र साफ की महाशय ने प्रयास किया कोई सफलता नहीं मिली,तीन चार कब्रों पर महाशय ने प्रयास किया कोई सफलता नहीं मिली तब तक डर निकल चुका था घरेलु माहौल हो गया था उसके बाद देशी तरीके से भैया मैं शुरू कब्र साफ करूं कभी पीटर कभी जोसफ कभी डिसिल्वा नाम पढूं फिर कहूं उठो अंकल भैया अंदर तीन घंटे जगाया कोई नहीं जागा तब तक थक चुके थे भूख भी लगने लगी थी सुबह होने वाली थी बाहर निकलने की तैयारी की जैसे ही चहारदीवारी से कूदे दो प्रकाश सामने से तेज चमकते हुये दिखाई दिये और बहुत तेज घरररररररररररररररर की आवाज किसकी आवाज हम लोगों ने जल्दी से साईकिल उठायी और कहा आ गये भूत तब तक आवाज आयी रूक और हम रूक गये भैया भूत नहीं थे पुलिस थी उन्होंने पूछा क्या कर रहे थे अन्दर झूठ बोलने की आदत है नहीं आज भी नहीं है वो सब भी अन्धविश्वास पर भरोसा करते थे कम से कम 100 गालियां दी और आत्मा के दर्शन करा दिये विश्वविद्यालय परिचय पत्र होने के कारण छोड़ दिया।यह सच्ची घटना है
जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः
8)
पिछले लेख में मैंने ईसाई कब्रिस्तान में बहुत प्रयास किया पर आत्मा नहीं मिली गालियां अवश्य मिली,अब हम आज फिर एक अन्धविश्वास से जुड़ी एक सच्ची घटना की चर्चा करेंगे जिसे भय का भूत कहते हैं।यह सच घटना मेरी मां ने सुनायी थी मेरे नाना के भाई थे लिखे पढ़े थे बहुत पुरानी बात है ग्रामीण भारत था,उस दौरान आज का चलन नहीं था सब आपस में निकलते राम राम करते हुए निकलते थे नाना बाहर बैठे हुये थे पड़ोस के गांव का एक किसान निकला और नाना से राम राम किया उन्होंने पूछा कहां जा रहे हो उसने बोला दादा बुखार आ गया मौलवी ताबीज बना देता है बुखार सही हो जायेगा।नाना हास्य और व्यंग्य के अच्छे ज्ञाता थे उन्होंने कहा मैं भी बना लेता हूँ इधर आओ तुम्हारा बुखार सही हो जायेगा उसको वाईरल फीवर था नाना ने मां को बुलाया कागज और पेन मंगाया और उसमें काफी देर तक लिखते रहे फिर उससे कहा घर से बाहर नहीं निकलना उबला हुआ पानी पीना और स्वच्छता रखना बहुत ही सादा भोजन करना ताबीज दांये हाथ में बांध लेना और शर्त यह ताबीज कोई दूसरा व्यक्ति न देखे न पढ़े तीन दिन बाद आना बुखार सही हो जायेगा ताबीज मुझे ही वापस करना नहीं तो बुखार फिर आ जायेगा,सभी घर वालों ने कहा ये क्या किया उन्होंने कहा तीन दिन बाद बतायेंगे भोला भाला किसान चला गया।तीन दिन बाद आया बोला पंडित जी राम राम बहुत अच्छा ताबीज बनाये थे एक दिन में ही आराम मिल गया नाना ने कहा ताबीज लाओ उसने ताबीज दी नाना उसे खोलकर एक तीसरे व्यक्ति से पढ़वाया गंदी गंदी गालिया लिखी थी फिर उस किसान को समझाया कि तुमने जो नियम मैंने बताये थे उससे आराम मिला न कि ताबीज से ये सब अंधविश्वास है।और इसी तरह के भय के भूत पूरे विश्व में भ्रमण कर रहे हैं और भोले भाले लोग उनके शिकार हैं।
जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः
9)
मित्रो हमारी चर्चा अंधविश्वास पर चल रही थी उनमें भी अंधविश्वास का वह रूप जिसे समाज में चमत्कार या भय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है,दुनियां रहस्यों से भरी है रहस्य के प्रति जिज्ञासा ही आविष्कार को जन्म देती है।परंतु हजारों साल से भूत,प्रेत,पिशाच,आत्मा इत्यादि का पूरे विश्व में अत्यधिक भय है सब डरते हैं किसी को दिखा नहीं एहसास होता है लेकिन भय बहुत है और सबसे मजेदार पूरे विश्व में डाक्टर से अधिक संख्या में भूत भगाने वाले हैं गांव गांव में हैं चमत्कार दिखाते हैं कहीं भूत नृत्य करते हैं,कहीं कुछ करते हैं पर ये भूत न तो कम होते हैं न भागते हैं समाज में भय रहता है मेरे प्यारे मित्रो इसे कहते हैं भय का भूत इतना जबरदस्त अंधविश्वास फैला हुआ है और इंटेलिजेंट लोग उसमें भी तड़का लगा लेते हैं बाकायदा मीडिया पर शो आते हैं शशशशशशश कोई है इत्यादि मैं पिछले पोस्ट में बता चुका हूँ ईसाई कब्रिस्तान में आत्माएं नहीं मिली,उसके बाद नाना की कहानी में ताबीज का जिक्र हुआ सत्य घटनायें हैं मैंनें अपनी आंखो के सामने मौलवी साहब को भूत भगाते हुये देखा है,मित्रो 17 वर्ष की ही उम्र में मैने एक प्रयोग किया या समझिये अनजान स्थिति में हो गया मेरे निर्भय स्वभाव के चलते बचपन से अकेलापन और प्रकृति मुझे अत्यधिक प्रिय है अतः इलाहाबाद में छात्र जीवन में जिस दिन पढ़ने में एकाग्र नहीं होते थे उठाया अपना रथ मतलब साईकिल और चल दिए रात्रि विचरण पर अकेले सबसे पसंदीदा स्थान होता था संगम तट कई किमी की साइक्लिंग के बाद जहां गंगा और यमुना मिलती हैं वहीं पंडो के तख्त पड़े रहते थे लगा लेते थे आसन विराज हल्की सी बहते हुये पानी की आवाज चंद्रमा का प्रकाश असीम शान्ति बीच-बीच मेंं जब ट्रेन पास होती थी तभी भंग होती थी।यह कार्यक्रम दो वर्षों में 25-30 बार आधी रात से सुबह तक किया और संगम तट प्रसिद्ध है हमारे सनातन धर्म में अस्थि विसर्जन और पिंड दान के लिए भैया एक दो आत्मा,भूत-प्रेत कुछ तो दर्शन दे ही देते किसी ने नहीं दिया ये प्रयोग मेरे शौक ने करा दिया।इसका मतलब यह नहीं है कि मैं पराचेतना,आत्मा के अस्तित्व को नकार रहा हूँ मैं नकार रहा हूँ अंधविश्वास को मैं नकार रहा हूँ भय के भूत को जिसका डर मीडिया के द्वारा समाज में बैठाया जाता है जिसके डाक्टर हर तीसरे गांव में उपलब्ध हैं।अरे भैया आत्मा क्या है श्रीमद्भागवत गीता पढ़ लो गीता प्रेस वाले बहुत सस्ते में उपलब्ध करा रहें हैं श्रीकृष्ण भगवान् ने ताल ठोंक के बताया है भूत प्रेत क्या शिवपुराण पढ़ लो बहुत सारी पुस्तकें हैं शर्त ये है अच्छे लेखक या अनुवादक की पुस्तक पढ़ना अन्यथा भ्रमित भी हो सकते हो हमारे ग्रन्थों को विकृत करके भ्रम फैलाने का कार्य भी किया गया हैंं सुनियोजित तरीके से।
जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः
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मित्रो हमारी बात अंधविश्वास पर चल रही थी अब ये हर धर्म,सम्प्रदाय में समस्त विश्व में किसी न किसी रूप में अपना अस्तित्व बनाये हुये है,मेरा व्यक्तिगत अनुभव यह है यदि आप निर्भय हैं तो यदि कहीं कोई अदृश्य ऊर्जा है भी तो आपके सामने नहीं आ सकती क्यों भाई क्योंकि आत्मा ही परमात्मा है आप ईश्वर की सबसे शक्तिशाली और सुंदर रचना हो आपके पास बुद्धि है विवेक हैं नेतृत्व करने की क्षमता हैं, सोचने की क्षमता है ज्ञान है फिर भी आप डर रहे हो वो भी अज्ञात से धिक्कार हैं, मृत्यु से वो तो सदा सत्य सबको मरना ही है तो डरना कैसा बस समझ लो भूत की समस्या समाप्त हो गयी।यदि मर भी गये तो आत्मा तो अमर है अविनाशी है तुम भी भूत बन जाना और मौज लेना बिना टिकट के अन्तराष्ट्रीय विचरण करो न ईएमआई का झंझट न मोह माया मस्त आज एशिया में तो कल अरब दो दिन बाद यूरोप ज्यादा मस्ती करोगे तो फिर डरना कैसा।अब अंधविश्वास के साथ मामला आता है तकनीक,विज्ञान का जिसे हम अपने यहाँ तंत्र,मंत्र,यंत्र कहते हैं पूरे विश्व में अलग अलग तरीके हैं परंतु अस्तित्व हर स्थान पर है हमारा देश अति प्राचीन व्यवस्था है अतः हर गांव में एक न एक बीमारी का भगत/तांत्रिक या डॉक्टर कोई न कोई मिल जाता है और वह उस विज्ञान को अंधविश्वास की श्रेणी में लाकर संदेहास्पद कर देता है।यद्यपि सत्य यह है कि हमारे प्राचीन तंत्र,मंत्र और यंत्र पूर्ण वैज्ञानिक हैं आप उनको पूर्ण वैज्ञानिक माध्यमों से सत्यापित कर सकते हैं उदहारण के तौर पर अभी एम्स ने गायत्री मंत्र पर रिसर्च की और सकारात्मक परिणाम बताये।हमें शर्म आनी चाहिए विदेशों में लोग हमारी प्राचीन चीजों पर रिसर्च कर रहे हैं हम मजबूत सरकार से विनम्र निवेदन करते हैं कि तंत्र,मंत्र,यंत्र को विधिवत् शोध और शिक्षा में शामिल किया जाये जिससे योग की तरह हमारी प्राचीन वैज्ञानिक विधियां जिन्हें अन्धविश्वास और हेय दृष्टि से देखा जाता है उनकी वास्तविकता पूरे विश्व को पता लगे और देश के अंदर व्याप्त अंधविश्वास समाप्त हो।
इन शक्तियों का नकारात्मक प्रयोग समाज में न होने पाये।
जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
समाप्त।
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