Monday, 30 September 2019

विश्व शांति 5




जय माता दी

या देवी सर्वभूतेषु मातृ-रूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ 
जो देवी सभी प्राणियों में माता के रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।

सभी मित्रों को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें।
धर्म की जय हो,अधर्म का नाश हो।प्राणियों में सद्भावना हो,विश्व का कल्याण हो।।इस भावना को हृदय में स्थापित कर हम विश्व शांति के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे,हर धर्म का सर्वोच्च उद्देश्य होता है ईश्वर का साक्षात्कार जो कोई भी दूसरे व्यक्ति को कभी नहीं करा सकता है मात्र विश्वास दिला सकता है कि दिव्य सत्ता है जो सर्वोच्च है और वही विश्वास ही परमात्मा है।परमात्मा परम सत्य है,सत्य एक है और समस्त विश्व में मार्ग अनेक हैं,ईश्वर एक है वही सर्वशक्तिमान है,सर्वव्यापी है।हर धर्म के महाज्ञानीयों ने जिन्होंने आत्म साक्षात्कार किया यही बताया हैं और सही बताया है।

विश्व में अशांति का प्रमुख कारणों में से भी एक धर्म हैं क्योंकि धर्म की ताकत है विश्वास और विश्वास हमें संगठित करता हैं, यही संगठन समस्या भी उत्पन्न करता हैं मित्रो जिसका संगठन शक्तिशाली हो जाता है,वह दूसरे धार्मिक संगठनों को गलत सिद्ध करने का प्रयास करता हैं जबकि उसे मालूम है सत्य एक हैं परंतु शक्ति के अहंकार में वह केवल अपने मार्ग को ही सही बताता हैं, दूसरे मार्गों को गलत या नीचा बताने लगता है तो समस्या की जड़ है अहंकार।मित्रो अहंकार का सबसे बड़ा शत्रु कौन है परमात्मा भैया विश्व के इतिहास को सही से पढ़िए और विश्लेषण करिए जिन शक्तियों का घमंड आप करते हो चाहे दैवीय शक्तियां हों अथवा भौतिक परमात्मा के लिए चुटकियों का खेल है।ये जो चमत्कार का खेल दिखा रहे हो बंदर मदारी वाला भगवान् का हंटर पड़ेगा तो आवाज भी नहीं आती है।🙌
मित्रो हम मनुष्य अपने अंदर के पशुता का दमन कर देवत्व का उदय अर्थात श्रेष्ठ मानव जिस मार्ग से बनते हैं वही धर्म है और इस मार्ग पर श्रद्धा और विश्वास की सीढ़ी से चढ़ते हैं।ईश्वर है ये तो स्वीकार करोगे ही कितने भी शक्तिशाली और अहंकारी हो,जीवन में प्रभुसत्ता अपने होने का अहसास करा ही देगी,अभी नवरात्रि में सोशल मीडिया पर मैं देख रहा था सभी माता से शक्ति मांग रहे थे सबसे अधिक संख्या माँगने वालों की थी शक्ति अर्थात् आप कमजोर हो यार मनुष्य का जन्म दिया और माँगा भी तो शक्ति क्या करोगे ?दुरूपयोग पक्का 😊भैया माता भी कह रहे हो और विश्वास भी नहीं कर रहे हो।जिस योग्य होगे और जो तुम्हारे हित में होगा माता प्रदान करेंगी,केवल माता मानो और प्रार्थना करो क्या करो?

या देवी सर्वभूतेषु मातृ-रूपेण संस्थिता। 

भैया माँगना है तो सदबुद्धि, सन्मार्ग,सद्भावना, शांति मांगो।माता रानी प्रसन्न हो जायेंगी,विश्व का कल्याण होगा।
प्रार्थना की शक्ति सबसे बड़ी शक्ति है,समस्त विश्व यदि सच्चे मन से विश्व के कल्याण के लिए प्रार्थना करें तो विश्व शांति अत्यंत आसान लक्ष्य है,आप किसी भी भाषा,रंग,धर्म,जाति से हों सच्चे मन से सबके कल्याण की प्रार्थना करिए,कुछ समय में ही विश्व शांति स्थापित हो सकती है।

जय हिंद वन्दे मातरम् 
सुधीर तिवारी 
क्रमशः


Thursday, 26 September 2019

गाँधीवाद,धर्म और स्वतंत्रता आंदोलन 2

मित्रो आधुनिक इतिहास में महात्मा गाँधीजी ने भारत के धर्म के मर्म को अर्थात तत्व दर्शन को स्वतंत्रता आंदोलन के नेतृत्व में हथियार बनाया और सफल हुए,अफ्रीका से आकर साबरमती आश्रम से पदयात्रा और श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीराम का सहारा लेकर हमारे स्वतंत्रता आंदोलन की नाव पार करायी।हमें गर्व है अपनी जन्मभूमि पर कि यहाँ विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का विकास हुआ,जिसमें धर्म,अर्थ,विज्ञान हर क्षेत्र में हमारे ॠषियों ने पूर्ण व्यवहारिक और वैज्ञानिक विधि से विकास किया जिसे वैदिक युग कहते हैं।
मित्रो आजकल चर्चा वैश्वीकरण की बहुत की जाती हैं, भैया इतिहास के अनुसार मौर्य साम्राज्य में पश्चिम की रानी थी और विदेशों में सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार पूरे एशिया में किया था।आज जनसंख्या अधिक और आवागमन के साधन आसान होने से वैश्वीकरण में हिस्सेदारी बढ़ गयी है और आम व्यक्ति भी दुनिया के सम्पर्क में है।अति सुंदर बात हैं दुनिया है ही इतनी सुंदर उस पर मनुष्य का जन्म परमात्मा ने दिया किसलिए कि रचना करो,विकास करो।हमारा देश धार्मिक और आध्यात्मिक देश है अतः यहाँ जितने भी परिवर्तन हुए हैं उनका मूल आधार धर्म ही रहा है।यही बात महात्मा गाँधी जी ने समझी और उसका अनुपालन किया और राष्ट्रपिता कहे गये।धर्म के अनुसार स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व ही उन्हें व्यक्ति से दर्शन में परिवर्तित करता है।
हमारे देश के इतिहास को हम हल्की नजर से देखेंगे तो पायेंगे मौर्य शासन के बाद हमारे राजाओं का संगठित न होना और राज्यों का विखंडन उसी दौरान विदेशी आक्रमणों ने धीरे-धीरे हमें कमजोर किया और अंततः अकबर महान ने मुगल साम्राज्य स्थापित किया और हम लगभग उत्तर भारत में पूर्ण गुलाम हो गये।पश्चिम से हमारे पुराने सम्बंध थे अत्याचार और गुलामी हम सहन कर रहे थे कुछ अंग्रेज जहांगीर के शासन में व्यापार के लिए आना शुरू हुए अर्थात नई तकनीक के साथ पश्चिम ने विस्तार शुरू किया।उसके बाद के मुगल शासक औरंगजेब ने गलती कर दी भैया बहुत बड़ी गलती कर दी,मंदिर लूटने तक तो ठीक था इन्होंने क्या किया तलवार की नोंक पर धर्म परिवर्तन मतलब धार्मिक जनता पर अत्याचार घोर पाप क्या हुआ भैया महाकाल का स्मार्ट सिटी कैलाश पर्वत हिल गया और खुल गया तीसरा नेत्र अर्थात दूरदृष्टि,परमात्मा ने भक्तों को सताने वालों पर विशेष दृष्टि लगा दी जो अभी तक लगी है,सुधर जाओ नहीं तो नष्ट हो जाओगे यदि बेवजह की हिंसा धन या स्वयं के अहंकार के लिए करोगे तो तुम शैतान हो और शैतान का परमात्मा क्या करता है,हर धर्म का ज्ञानी व्यक्ति बता देगा।
भैया अंग्रेजों ने हमें शैतानी शक्ति से बचाया हिंसा और धर्म परिवर्तन को रोका,परमात्मा का कार्य किया सेवा की,रक्षा की वही कार्य किया जो राम कृष्ण ने किया था।भोले के भक्तों की रक्षा की महादेव ने कृपा की भैया आशीर्वाद दिया आपका राज्य समस्त विश्व में हो गया ठीक है।
फिर क्या किया आपने भी वही गलती प्रारंभ कर दी,मंदिर तोड़ने लगे और महादेव के भक्तों का इतिहास समाप्त करने लगे।धार्मिक और आध्यात्मिक देश में धर्म को छेड़ने लगे,सभ्यता और संस्कृति को छेड़ने लगे भैया हम भारतीय पहले ही इतने उदारवादी हैं कि जो हमें अच्छा लगता है विश्व में किसी भी धर्म या सम्प्रदाय से हो तुरंत स्वीकार कर लेते हैं।फिर आपने ऐसी हिमाकत क्यों की जब हम चरमपंथ से तौबा करते हैं और अपने बच्चों को भी सत्य,प्रेम और अहिंसा सिखाते हैं,आपने भक्तों को सताया क्या हुआ महादेव सक्रिय हो गये और परिणाम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन।
धर्मो रक्षति रक्षतः!

जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः


Wednesday, 25 September 2019

गाँधीवाद,धर्म और स्वतंत्रता आंदोलन 1

सत्य,प्रेम और अहिंसा
मित्रो महात्मा गाँधी केवल व्यक्ति नहीं एक आधुनिक दर्शन हैं और उनका दर्शन सत्य,प्रेम और अहिंसा पर आधारित है।एक साधारण व्यक्ति से महात्मा तक की यात्रा तय करने में उन्होंने जो स्वयं के साथ प्रयोग किए इसलिए मोहनदास करमचंद गाँधी व्यक्ति से गाँधी दर्शन बन गये और जननायक बनकर हमारे स्वतंत्रता आंदोलन को अंतिम मुकाम तक पहुंचाया।

सत्यम शिवम सुंदरम हमारे भारतीय दर्शन मे सत्य को ही ईश्वर बताया गया है।वेद,उपनिषद्, पुराण,श्रीमद्भगवद्गीता हर धार्मिक ग्रन्थ और हर धर्मगुरू ने सत्य को सर्वोपरि माना है।महात्मा गाँधी जी का लक्ष्य स्वतंत्रता आंदोलन को सही दिशा देना था अतः उन्होंने सत्य के मार्ग को अपनाया और स्वयं सत्यमार्गी बने और हमारे धर्म को आधार बनाकर नेतृत्व किया और सफल हुए।
प्रेम शब्द से तो पशु भी परिचित हैं,हम तो मनुष्य हैं तो मित्रो जीवन में बिना इस दर्शन के कोई भी चल ही नहीं सकता और महात्मा गाँधी जी को सारे देश की जनता को आजादी के लिए मानसिक रूप से संगठित करना था तो उन्होंने प्रेम को चुना यदि वह कहते अंग्रेजो से नफरत करो तो शायद सबको संगठित नहीं कर पाते।पूर्ण सकारात्मक सोच किसी भी कार्य की सफलता का मूल आधार सोच होती है।अतः गाँधी दर्शन बन गया😊
अहिंसा परमो धर्म:,धर्मम हिंसा तदैव च।श्रीमद्भगवद्गीता का श्लोक है अर्थात अहिंसा परम धर्म है परंतु धर्म की रक्षा के लिए हिंसा उचित है।महात्मा गाँधीजी ने आधा श्लोक लिया क्योंकि स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी जिम्मेदारी जनांदोलन खड़ा करने की थी,सारी जनता को संगठित करने की थी और साथ में यह भी जिम्मेदारी नेतृत्व की होती है कि कम से कम निर्दोष व्यक्तियों का बलिदान हो आखिर सरकार से लड़ना है।आधा श्लोक नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने लिया और हमारे स्वतंत्रता आंदोलन को सफल कराया और अपनी जिम्मेदारी को अत्यंत जिम्मेदारी से निभाया।
हमारे स्वतंत्रता आंदोलन का हर क्रांतिकारी नायक था और महानायक थे परमपूजनीय महात्मा गाँधी और नेताजी सुभाषचंद्र बोस दोनों ने धर्म का कार्य किया देश की रक्षा से बड़ा कोई धर्म हो ही नहीं सकता है।
मोहनदास करमचंद गाँधी ने प्राचीन भारतीय धार्मिक दर्शन के तत्व दर्शन को व्यक्तिगत जीवन में आत्मसात कर तीन आंदोलन चलाये प्रथम सविनय अवज्ञा आंदोलन,द्वितीय असहयोग आंदोलन और तीसरा भारत छोड़ो आंदोलन समानांतर अंग्रेज सरकार पर हिंसक हमले और आजाद हिंद फौज का दबाव साथ ही अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिस्थितियां
हमें आजादी दिलवाने में सहयोगी बनीं अंततः महात्मा गाँधी की उपाधि से नवाजा गया।
जय हिंद वन्दे मातरम्।
सुधीर तिवारी
क्रमशः

Monday, 23 September 2019

विश्व शांति 4

विश्व शांति 4
यदि व्यक्तिगत मन शांत हो जाये,समझ लो विश्व शांति हो गयी है।सबसे सरल रहस्य है और सबसे कठिन है इसको प्राप्त करना फिर भी सहनशक्ति और सकारात्मक सोच आपका सहयोग करेगी।
मित्रो पिछले लेख में हमने स्वयं के मन की शांति और परिवार की शांति पर चर्चा की यदि वास्तविक जीवन में हर व्यक्ति यह उपलब्धि प्राप्त कर ले तो लगभग विश्व शांति के करीब पहुंच जायेंगे क्योंकि हमारे अंदर प्रेम,सद्भाव,सहकारिता,सेवा,करूणा,सामंजस्य,सहनशीलता,दया इत्यादि सद्गुण और सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न हो जायेगी जिससे हमारा आत्मबल कई गुना अधिक रहेगा केवल शांति ही नहीं अन्य कई सारे ईश्वरीय वरदान वरन् ये समझ लो ईश्वर की संगत ही प्राप्त होने लगेगी।अरे वाह इतनी अच्छी बातें हां भैया और इसमें निवेश क्या है कुछ भी नहीं सारे दिन लगे रहते हो,सबको समय देते हो अति व्यस्त हो मित्रो किसलिए व्यस्त हो,सबसे पहले अपने लिए उसके बाद परिवार के लिए और करते क्या हो,सबको समय देते हो स्वयं को समय नहीं देते और परिवार को समय नहीं देते हो।जिन्दगी जीना भूल गये हो फिर कहते हो कि अशांत हो,परेशान हो।बुद्धिजीवी हो या मूर्ख स्वयं निश्चित करो,निवेशक बनके अशांति लाते हो बिना निवेश के शांति मुफ्त में मिल जायेगी नहीं चाहिए पक्के बुद्धू हो और मुझे मूर्ख सिद्ध कर दोगे दो मिनट में इतने बुद्धिमान हो,परंतु अपने को शांत नहीं कर पाओगे।बावली पूँछ हो दिमाग खोलो प्रसन्नमेव जयते जो प्रसन्न है वही विजयी है,श्रमेव जयते होता तो हल्कू किसान जीत जाता मित्रो मनुष्य हो संतुलित जीवन जीयो गधे मत बनो फिर गुलाम बन जाओगे।बुद्धि,श्रम,वीरता सबका संतुलन रखो मध्य मार्गी बनो परिस्थितियों में ढलकर निखरना सीखो।
भैया स्वयं के मन की शांति और परिवार की शांति चाहते हो तो अशांति से भागने से तो शांति नहीं मिलेगी क्योंकि आंतरिक शांति प्रेम यहाँ नहीं कलह है क्या करते हैं हम स्थान बदल देते हैं,उससे कुछ समय के लिए शांति मिल जायेगी परंतु कुछ समय बाद ही जस की तस स्थिति बन जायेगी।मनोवैज्ञानिक भी कहते हैं जगह बदल दीजिए भैया सीधा पूछिए आप अशांत हैं क्यों अशांत हैं,कारण समझिए और अशांति के मार्ग को बंद कर दीजिए।
बहुत सुंदर सही जगह पहुंच गये लिखते लिखते भैया अशांति के कारण क्या हो सकते हैं आप अपने डॉक्टर स्वयं बन सकते हैं कैसे कलह किससे हुई इस पर चिंतन न करें बरन कलह क्यों हुई इस पर विचार करें अशांति के कारण स्वयं खोज लेंगे मुख्य कारण सामान्यत: मन की अस्थिरता,भ्रम,भय,शक,प्रेम का अभाव,नकारात्मक चिंतन,वासना इत्यादि हैं जो अधिकतम इंद्रियों से सम्बंधित हैं और यह कारण व्यक्तिगत और परिवार में अशांति के कारण हैं।
अब अशांति के कारणों को रोकना कैसे है एक तो तरीका है अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और दृढ़ निश्चय इसमें मानसिक शक्ति से सम्पन्न व्यक्ति ही सफल हो सकता है और दूसरा मार्ग है परमात्मा की शरण अर्थात प्रार्थना,ध्यान,योग,यज्ञ समस्त विश्व में धर्म के माध्यम से परमात्मा की बात सुनो एवं अपनी समस्या परमात्मा से कहो।अंध श्रद्धा एवं अंध विश्वास से दूर रहो,परमात्मा के बारे में सुनो और स्वयं को भ्रष्टाचार से बचाकर भी रखो अन्यथा कहीं ऐसा न हो कि अशांति को नष्ट करने के चक्कर में महाअशांति ले आओ।समस्त विश्व में हर धर्म में भ्रष्टाचार है और कोई धर्म गलत शिक्षा नहीं देता है,सबके अपने अपने स्वार्थ हैं नजरअंदाज करते हुए स्वयं के मन को स्थिर एवं मजबूत बनाते हुए अपने परिवार में आदर्श परिवार के सिद्धांत अर्थात शांति,प्रेम और सहकारिता को स्थापित करिए विश्व शांति होकर रहेगी।हम बदलेंगे युग बदलेगा😊
जागरूक बनो,धार्मिक बनो,परमात्मा की सुनो वो तुम्हारी सुनेगा।

जय हिंद
वन्दे मातरम्
क्रमशः

Saturday, 21 September 2019

विश्व शांति 3

अरे भैया ये शांति शांति विश्व शांति लगा रखा है आखिर शांति क्या है,ये जो बता रहे हो समझ से परे है ठीक बात है मित्रो व्यवहारिक जीवन में एक सैनिक युद्ध के बाद छुट्टी पर घर जाता है तब जो मानसिक स्थिति होती है वह शांति है।किसी छोटे बच्चे को भूख लगी हो और मां उसे भोजन से तृप्त करा दे क्या हो गया बच्चा शांत होकर सो गया वह शांति है।किसान की पकी हुई फसल सुरक्षित मंडी या घर तक पहुँच जाये तब जो मानसिक अनुभूति किसान को होगी वह शांति होगी।विद्यार्थियों की परीक्षा समाप्त होने पर जैसी गहरी नींद आती है वह शांति है।ऐसी पचासों घटनायें हमारे जीवनशैली में हैं जो तनाव लाती हैं उसके बाद शांति मिलती हैंं, अगर यह शांति हैंं तो विश्व शांति असम्भव है मित्रो क्योंकि जीवन में तनाव न हो ऐसा हो ही नहीं सकता तब तो विश्व शांति अस्थायी है भैया आपका लक्ष्य झूठा है।बिल्कुल नहीं मित्रो यह तो हमारे जीवन के कर्तव्य हैं उनमें जो तनाव और उसके बाद शांति हैंं उसमें सुख हैंं, आनंद है यह जीवन की पूर्ण रचनात्मक और सकारात्मक क्रिया है।इस तरह की सकारात्मक जीवनशैली का अकेले,परिवार,समाज या सामूहिक आनंद लीजिए।
मित्रो विश्व शांति मिशन के लक्ष्य को समझने के लिए हमें पहले अशांति अर्थात नकारात्मक कारणों के द्वारा व्यक्तिगत जीवन,परिवार,समाज,देश अथवा समस्त विश्व में अशांति के मूल कारणों का विश्लेषण अत्यंत आवश्यक है।
भैया हमारे पास पासपोर्ट भी नहीं है मजेदार बात है और बात कर रहे हैं विश्व शांति की क्योंकि मेरे पास दिल्ली मेट्रो शहर में 19 वर्ष कार्य करने का अनुभव है और हमारे गूगल बाबा हैं और अपना व्यक्तिगत दृष्टिकोण है।
मित्रो व्यक्तिगत जीवन में अशांति का कारण क्या है?जब हम केंद्र में केवल स्वयं को रखकर विश्लेषण करेंगे तो पायेंगे कि अपनी मानसिक अशांति का कारण हम स्वयं हैं और कोई नहीं क्योंकि हमारी आवश्यकताएं तो अत्यंत कम हैं परंतु हमारी इच्छाएँ अनंत हैं और दुख और अशांति का सबसे मुख्य कारण इच्छाएं हैं और इस समस्या का साधारण सा व्यवहारिक समाधान हैं आवश्यकताएं कम करिए,प्रकृति के अनुरूप जीवन जीने का प्रयास करिये।मित्रो इसके अलावा कई अन्य कारण हैं जो हमें मानसिक अशांति देते हैं ईर्ष्या,द्वेष,दूसरों से तुलना,मोह,वासना,लालच,क्रोध इत्यादि जिन्हें हम इच्छाशक्ति अथवा आध्यात्मिक तरीके सभी धर्मों में बताए गये हैं,उनका अनुपालन करते हुए श्रेष्ठ मानव बन सकते हैं।
अब हम बात करेंगे परिवार में अशांति का कारण क्या है,मित्रो यह हम सबका परम सौभाग्य है कि हमारा जन्म भारत भूमि पर हुआ है क्योंकि परिवार नामक सफल संस्था हमारे यहाँ व्यवस्थित रूप से चल रही है और सबसे बड़ी और गौरव की बात यह है कि किसी भी धर्म,सम्प्रदाय के लोग हों पारिवारिक व्यवस्था लगभग सभी की एक जैसी है।वैश्वीकरण के इस दौर में जहां विज्ञान आसमान छू रहा है,वहीं समस्त विश्व अभी सामाजिक और पारिवारिक व्यवस्था एवं श्रेष्ठ जीवन कैसे जिया जाये इसके लिए संघर्ष कर रहा है हमें हमारे पूर्वज एक सुदृढ़ सामाजिक,सांस्कृतिक व्यवस्था देकर गये थे।विदेशी आक्रमणों और संस्कृतियों के आदान-प्रदान से विकृतियां उत्पन्न होना स्वाभाविक है परंतु फिर भी हम श्रेष्ठ हैं,हम अनुशासित और विकसित हैं।परिवार में अशांति का सबसे मुख्य कारण हैंं अपेक्षा भैया अपेक्षा रखोगे उपेक्षा होगी पक्का अशांति होनी है तो क्या करना प्रेम करना हैंं, सहयोग करना हैंं और अपेक्षा बिल्कुल नहीं समझ लो परिवार स्वर्ग से सुंदर हो गया।मित्रो अपने अपने कर्तव्य करिए,भावनात्मक रूप से विश्लेषण करिए एक दो सदस्य चालाक होंगे नजरअंदाज करिए शांति के लिए थोड़ा बहुत त्याग सबको करना ही पड़ेगा।
मित्रो व्यक्तिगत और परिवार की अशांति के कारण और समाधान पर अपने दृष्टिकोण से विश्लेषण का मार्ग प्रशस्त किया,करना तो हर व्यक्ति को स्वयं के विवेक से परिस्थितियों के अनुसार ही होगा।
व्यक्तिगत शांति के लिए आवश्यकताएं कम करिए और धर्म के मार्ग पर चलिए अर्थात् प्रार्थना,ध्यान इत्यादि करिए।परिवार की शांति के लिए अपेक्षा न करें और प्रेम और सहयोग को अधिक महत्व दें।

जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः

Monday, 16 September 2019

विश्व शांति 2

मित्रो जब प्रकृति ने हमें शांत स्वभाव का बनाया है,रचनात्मक बनाया है बिना इंद्रियो की आवश्यकता के हम अशांत हो ही नहीं सकते,जैसे ही आवश्यकता पूरी हुयी और हम शांत हो गये फिर भी इक्का-दुक्का ही शांत मिलता है,बेचैन अधिक मिलते हैं जहां जाओ परेशान दिखते हैं ऐसा लगता है जैसे सारा बोझ इन्होंने ही ले रखा हैंं भैया भ्रम है आप नहीं होंगे तब भी सारे कार्य सम्पन्न होंगे आप बेवजह अशांत हैं।परंतु इसमें मनुष्य का कोई दोष नहीं मन है ही ऐसा चंचल भैया ये बताओ आज तक किसी ने मन देखा चाहे जितना बड़ा न्यूरो साइंटिस्ट हो जाईये उससे पता करिए उसने मन देखा नहीं देखा क्या देखा मांस पेशियां नर्वस सिस्टम इत्यादि सब मिलकर कार्य करते हैं तब मस्तिष्क सक्रिय होता है और हमारी चेतना सक्रिय होती है और यही चेतना हमारा मन है।मन अदृश्य है पर वही सर्वस्व है इसीलिए कहा जाता है मन के हारे हार है मन के जीते जीत और यही विशेष उपहार है परमात्मा का मनुष्य को जो समस्त जीवों से श्रेष्ठ और परमात्मा जैसा बनाता है भैया सेकंड में कहीं भी पहुंच सकते हो चेतना के द्वारा बस आंख बंद की और सामने सूर्य चंद्रमा इत्यादि जो भी देख सकते हो एक सेकंड में मन पहुंच जायेगा सबसे तीव्र गति है और यदि अंतर्मन में से देखना सीख लिया तब तो पता नहीं परमात्मा क्या दिखा दें।मित्रो हम बात कर रहे थे अशांति की बस यदि इस मन को शांत कर लिया तो विश्व शांति का मार्ग मिल जायेगा,अरे यार मजाक कर रहे हो इतने प्रतिभाशाली लोग,शक्तिशाली,क्षमतावान लोग प्रयास कर रहे हैं और समस्या बढ़ रही है।अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन बढ़ते जा रहे हैं मन के शांत करने से विश्व शांति कैसे संभव हैंं, भैया ये जो प्रयास किये जा रहे हैं इसमें 80% व्यक्तियों के स्वयं के मन अशांत हैं और कारण एकमात्र अहंकार,भैया बहुत बुरा रोग है प्रभुता पाए किन्हें मद नाहीं परम सत्य परंतु विश्व शांति मिशन में इनका केवल इतना ही काम है कि अधिक से अधिक हिंसक गतिविधियों को और उनके संरक्षको को दंडित करें भैया शक्तिशाली हो तो सदुपयोग करिए शक्ति अन्यथा परमात्मा सर्वशक्तिमान है भूलना मत दंडित भी हो जाओगे और कहीं से गोली चलने या बम फूटने की आवाज भी नहीं आयेगी ऐसा मेरा पक्का विश्वास है वैसे अहंकारी को जल्द समझ में नहीं आता है।हां तो भैया मन के शांत करने से विश्व शांति पक्का प्रार्थना करते हो,दुआ करते हो,जप करते हो,यज्ञ करते हो अरे भैया ईश्वर,अल्लाह,जीसस,गुरू किसी पर तो विश्वास करते होगे और धर्म से जुड़े होगे अरे नहीं जुड़े हो तो आसमान की ओर देखो,प्रकृति की ओर देखो सकारात्मक मन से अपने लिए मांगते हो दिव्य शक्तियों से सच्चे मन से विश्व शांति के लिए मांगो,प्रार्थना करो परमात्मा सुनेगा पक्का सुनेगा भैया एक साथ सबकी मंगलकामना के लिए प्रार्थना करोगे तो परमात्मा ध्यान से जागेगा और विश्व शांति होगी।
यह तो हो गयी दिव्य और आध्यात्मिक प्रक्रिया जिसमें यदि विश्व की समस्त धार्मिक शक्तियां एक साथ लग जायेंगी तो एक नये विश्व का निर्माण सम्भव है,जैसे सपने मंचो से सभी जनता को दिखाते हैं और बंद कमरे में क्या कहने राधे राधे

जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः

Friday, 13 September 2019

विश्व शांति 1



विश्व शान्ति 1
शान्ति शब्द बहुत ही छोटा है मित्रो परंतु हर व्यक्ति,परिवार, समाज,राष्ट्र और विश्व के लिए सबसे बड़ा महत्व रखता है क्योंकि शान्ति के मार्ग से ही जीवन के सारे रचनात्मक और सकारात्मक परिणाम सम्भव हैं,अशांति तो अस्थिरता और विनाश का मुख्य कारण हैं यह पूर्ण नकारात्मक विचारों का परिणाम है।आज समस्त विश्व अस्थिरता और अशांति के दौर से गुजर रहा है वह भी तब जब हमने विज्ञान के माध्यम से अत्यधिक संशाधन और शक्ति संग्रह कर रखा हैं फिर इस अशांति का मूल कारण क्या हो सकता है।
विचारणीय है मित्रो शान्ति का सम्बन्ध सहनशीलता से है,आप कितना भी प्रेम करिए,सेवा करिए,दया रखिए,करूणा कीजिए यदि सहनशीलता नहीं है तो अशांति हो जायेगी।यह पूर्ण मनोवैज्ञानिक सत्य है आप प्रयोग करके देख लीजिए इतनी सकारात्मकता होने के बावजूद भी परिणाम अशांति ही होगा।
विश्व शांति तो बहुत बड़ी बात है जो उस मुद्दे पर वार्ता करते हैं या प्रवचन देते हैं या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सलाहकार हैं क्या उनके स्वयं के मन शांत हैं,बहुत चंद लोग मिलेगें भैया जब आपका मन ही शांत नहीं है तो शांति वार्ता कैसे करोगे और यदि की भी तो असफल होगी मन तो अहंकार,दम्भ से पीड़ित हैं,पहले मन को शांत करिए कैसे करेंगे सहनशील बनिये।सहनशीलता के साथ न्यायप्रिय होंगे तभी स्थायी शांति सम्भव है।
मित्रो यह तो हो गया सैद्धांतिक और आध्यात्मिक चिंतन शांति के लिए मन की शांति प्रथम आवश्यकता है।
शांत मन हमारे अंदर कई सारे सद्गुणों को विकसित करेगा जैसे धैर्य,विवेक,सहनशीलता इत्यादि इनमें सहनशीलता एक ऐसा गुण है जिससे आपके आसपास का वातावरण भी शांत होने लगेगा,अशांति और विपरीत परिस्थितियों में भी आप शान्त रह सकते हैं इसका मतलब यह कतई नहीं की आप नकारात्मकता को सहन करें और कुंठित या अवसादग्रस्त हो जायें यदि धोखे से यह भूल कर दी तो आप अपनी शान्ति के साथ आत्मा को भी मार देंगे अतः शान्ति के लिए समझौता नहीं करना है यदि समझौते शान्ति ला रहे हैं तो वह क्षणिक हैंं तो शान्ति के बदलाव करना हैंं आत्मा का उसको पवित्र और मजबूत बनाना और मन को शांत करना है।यह एक व्यक्ति की स्थायी शान्ति की प्रक्रिया है मित्रो एक बार यात्रा प्रारम्भ करो चिर स्थायी शान्ति मिलकर रहेगी।
प्रश्न कौन सी प्रक्रिया है भैया प्रकृति ने हमको जीवन दिया है तो जीने की कला भी दी हमने क्या किया अपना तो सत्यानाश किया ही पशुओं को भी नहीं छोड़ा,हम गिर गये इतना गिर गये की जीवन का उद्देश्य ही भूल गये क्या जिन्दगी जीना ही भूल गये।आज भी आप जंगल में जाईये हमसे अधिक अनुशासित और संगठित तो पशु रह रहे हैं अरे भैया जंगल छोड़िये शहरों में बंदरो को देख लीजिए अभी कुछ दिनों पहले की आंखो देखी घटना है एक बंदर को इलेक्ट्रिक पोल से शाॅक लगा नीचे गिरा वो भाई साहब पचास बंदर इकट्ठे हो गये उसको चारों ओर से घेर लिया बहुत देर तक पीटते रहे शायद उसकी चेतना वापस आ जाये पूरा रोड जाम कर दिया करीब 30 मिनट तक जाम रखा उन्होंने उसके बाद उसका शरीर ले गये मित्रो कहां ले गये किसी को पता नहीं,कभी किसी ने बंदर के मृत शरीर को लावारिस नहीं देखा होगा हमें उनसे शिक्षा क्या मिली उनमें संवेदना,प्रेम,संगठन, अनुशासन इत्यादि कई सारे प्राकृतिक गुण हैं और बंदर अशांति तभी फैलाते जब भूखे हों अथवा उनके परिवार का कोई सदस्य परेशानी में हो उनमें असुरक्षा की भावना हो अन्यथा कभी नहीं पशुओं में भी शान्ति प्राकृतिक है हम तो मनुष्य हैं परमात्मा की सर्वोत्तम रचना।
मनुष्य का प्राकृतिक स्वभाव शांत और संवेदनशील हैं, रचनात्मक हैं ठीक परमात्मा जैसा।

जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः

Sunday, 8 September 2019

धर्म और राजनीति 1

भारत आध्यात्मिक विश्व गुरू है सभी धर्मों का पिता वैदिक धर्म है सिर्फ तीन वेद सूक्तों से सिद्ध किया जा सकता है।
1 अथातो ब्रह्म जिज्ञासा!
अर्थात ब्रह्म कौन है।ब्रह्म को ही परमात्मा,ईश्वर,अल्लाह,गाॅड कहा जाता है।

2 ब्रह्मम सच्चिदानंदम!
अर्थात ब्रह्म सच्चिदानंद है।  सत+चित+आनन्द  existence+consciousness+bliss
जिसके पास यह तीनों परम( absolute)अवस्था में हैं,वही परमात्मा है।

3 अहं ब्रह्मासिम!
अर्थात मैं ही ब्रह्म हूँ ।मैं ही परमात्मा हूँ ।मैं ही ईश्वर हूँ
मित्रो परशुराम,राम,कृष्ण,महावीर जैन,गौतम बुद्ध,मोहम्मद साहब,जीसस इसी श्रेणी के भगवान् हैं।

इस सिद्धांत से परमात्मा है और वैदिक धर्म सभी धर्मों का पिता है।और ईश्वर एक है सत्य एक है मार्ग अनेक हैं ।
अतः सत्य को स्वीकार करो भारत विश्व का आध्यात्मिक विश्व गुरू था है और रहेगा।आपस में बेवजह नहीं लड़ो धर्म का राजनीति और व्यापार में न्यूनतम प्रयोग करो😊
शास्त्रार्थ सभी धर्मगुरु आपस में कर लें मैं परम आनन्द में हूँ😂😂😂

जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी 

Saturday, 7 September 2019

राजनीति मेरे समसामयिक विचार 10

1)
मित्रो हमारे आदरणीय प्रधानसेवक जी ने अपनी दूसरी पारी प्रारम्भ कर दी है 2010 से भारतीय राजनीति पर फेसबुक के माध्यम से करीब से नजर रखने का अवसर प्राप्त हुआ और गूगल बाबा से ज्ञान की प्राप्ति इसके लिए विज्ञान के इन आविष्कारों का बहुत बहुत धन्यवाद।प्रधानसेवक जी की आक्रामक कार्यशैली के अनुरूप उन्होंने इस बार तीव्र गति से एक योग्य और साफ सुथरे मंत्रिमंडल का गठन किया वैसे राजनीति में ऐसे शब्द प्रायः कम ही लोगों पर फिट बैठते हैं फिर भी जो उपलब्ध थे उनमें बेहतर को चुना तुष्टिकरण भी आवश्यकतानुसार किया गया गठन में, मंत्रिमंडल का आकार छोटा होना अच्छी बात है वैसे भी व्यवस्था प्रशासनिक अधिकारी ही चलाते हैं।
2014 में प्रधानसेवक जी के पास अनुभव नहीं था व्यवस्था बहुत बड़ी मिली थी भ्रष्टाचार और महंगाई के बड़े मामले जनता के सामने उजागर हो चुके थे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों जनता के आक्रोश से निराश थे,प्रधानमंत्री जी ने अपने कार्पोरेट दिमाग का इस्तेमाल कर 100 स्मार्ट सिटी के साथ सभी मोर्चों पर काम प्रारम्भ किया और विपक्ष ने पूरी ऊर्जा कमी निकालने में अन्तत सत्ता पक्ष को विपक्ष की नकारात्मक मानसिकता का लाभ मिला गरीबों के लिए केंद्र की योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने में मोदी जी का प्रशासनिक अनुभव काम आया बड़े पूंजीवादीयों ने गजब का लाभ कमाया,पब्लिक सेक्टर और मध्यम वर्ग लगातार दबाव में रहे।पिछली सरकार प्रधानसेवक जी ने कार्पोरेट माइंड से चलाई जिससे हमारी डूबती हुई बैंकिंग व्यवस्था सही हुई और मंदी के दौर से निकलकर स्थिरता बनी बेरोजगारी बढ़ी ।
2019 के प्रारम्भ में ऐसा लग रहा है कि प्रधानसेवक जी प्रशासनिक अधिकारियों के दिशानिर्देश में कार्य करेंगे और देशहित के बड़े लक्ष्यों पर काम करेंगे,ऐसा ही होना भी चाहिए व्यापारी का मुख्य उद्देश्य रोजगार सृजन है वर्तमान में,अन्यथा आप कहीं भी सम्बद्ध करेंगे तो दलाली प्रारम्भ हो जायेगी नैतिक स्तर गिर चुका है व्यापार का।
हम हिन्दुस्तानी ईश्वर से प्रार्थना करते हैं देश का कल्याण हो और प्रधानसेवक जी के नेतृत्व में हिन्दुस्तान विश्व गुरू बने।
परन्तु हम हिन्दुस्तानी आपके पहले निर्णय का बहुत जबरदस्त विरोध करते हैं जो आपने मुस्लिम बच्चों को वजीफा देने के लिए और मदरसों के आधुनिकीकरण की बात कही है क्योंकि आप 130 करोड़ लोगों का नेतृत्व कर रहे हैं और यह तुष्टिकरण है।महात्मा गाँधी कहते थे कोई भी काम करना है अपने से करो मेरे दोनों बच्चे सेंट जोसेफ संस्था में पढ़ते हैं जो वेटिकन सें संचालित ईसाई मिशनरी स्कूल है दोनों बच्चे प्रतिदिन हनुमानचालीसा पाठ करते हैं और प्रत्येक रविवार को दादा-दादी के साथ गायत्री यज्ञ करते हैं।एक दिन मैं उनको ड्राप करने गया तो दोनों ने प्रवेश करते ही सेंट जोसेफ और जीसस को प्रणाम किया फिर आगे बढ़े मैनें तो नहीं कहा था पर हमारे धर्म और संस्कार नफरत नहीं सिखाते हैं और उस स्कूल में भी कोई भी शिक्षा ग्रहण कर सकता है।हां ईसाई मिशनरीज ने विगत वर्षों में धर्म परिवर्तन के प्रयास किये तो परिणाम गांधी परिवार और कांग्रेस को भुगतने पड़े।अब जब जनता चौकीदार है आप हैड चौकीदार और मैं सुपरवाइजर चौकीदार तो प्रधानसेवक जी आपके चरणवंदन नेता वाला दिमाग गुजरात में छोड़ दें अभी आप मुस्लिम को वजीफा देंगे फिर हिंदू को देंगे परिणाम फर्जी नाम लिखे जायेंगे कर्मचारी और मदरसे स्कूल प्रबन्धन मिल कर खा जायेंगे हिन्दू-मुस्लिम में दूरी बढ़ायी और चले गये विदेश यात्रा भ्रष्टाचार का नया दरवाजा खोल गये यही तो कांग्रेस ने किया था।अब जनता चौकीदार है कृपया अंग्रेजो की तरह राज करने की न सोचें पूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहाल करने कां प्रयास करें।
स्मार्ट प्रधानमंत्री स्मार्ट जनता ।

जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी

2)
हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने पद सम्हालने के बाद पहला कदम मदरसों के लिए उठाया बहुत अच्छी बात है इतनी बड़ी व्यवस्था के लिए सभी की दुआयें आवश्यक होती हैं पर मतदाता 80% समाज का और आप दुआयें लेना चाहते हैं 20% की ये तो नाइंसाफी हो गयी परमात्मा तो सबकी बराबर सुनते हैं जैसे कि आप महादेव के भक्त हैं महादेव तो देवताओं और असुरों दोनों के देवता हैं वह वर्तमान में किये कर्म के फल के सिद्धांत को प्रतिपादित करते हैं जय महाकाल।परम आदरणीय प्रधानसेवक जी बिना लड़ाई किये कार्य भी सिद्ध हो जाये और अधिक से अधिक लाभ ले लिया जाये यह गुजराती से अच्छा कोई नहीं जानता अतः हम पूरे देश में आपसे ऐसे ही गुजरात माॅडल की आशा करते हैं आतंकवादी और अपराधियों पर कोई रहम नहीं किया जाना चाहिए ऐसी आम जनता आशा करती है।हमारे सरस्वती विद्या मंदिर में सभी धर्म के बच्चे,ईसाई मिशनरी स्कूल में सभी धर्म के बच्चे परन्तु मदरसों में केवल मुस्लिम बच्चे आखिर क्यों ये इतने उदार नहीं हैं कि स्वीकार नहीं अत्यन्त विचारणीय है।अब मुद्दा स्वयं प्रधानसेवक जी ने छेड़ा है अतः सभी चौकीदारों की जिम्मेदारी है कि चिन्तन करें देश का मामला है और अत्यंत महत्वपूर्ण भी है और सभी चौकीदारों का अधिकार भी तो मित्रो वैश्वीकरण हो चुका पूरे विश्व में उदार व्यवस्थाएं अत्यंत सुखद और सफल हैं सारी प्रतिभाओं का पलायन उसी दिशा में होता है जहाँ वह सुरक्षित और आरामदायक महसूस करते हैं।मदरसों पर बात करने से पहले आम आदमी के धर्म को हल्का फुल्का समझते हैं उदहारण के तौर पर मेरे पहले भगवान् हनुमानजी थे बहुत छोटा था सुबह ही मां ने उठाया और नहला दिया और बोलीं पापा के साथ मन्दिर जाओ आज बड़ा मंगल है भैया एक थाली में लड्डू और पूये लेकर चले देशी घी की खुश्बू मन तो हुआ पहले खाऊं पर जैसे-तैसे मंदिर पहुंचे गोद में चढ़कर घंटा बजाया फिर तिलक लगाकर भोग लगाया और जोर से बोला जय श्री राम जय  बजरंगबली बाहर निकले प्रसाद बांटा घर पहुंचे धैर्य जबाब दे चुका था लड्डू और पूओं पर आक्रमण भैया पूरी धार्मिक प्रक्रिया में हनुमानजी को आनंद आया हो या न आया हो मैं तो बचपन के आनंद से सराबोर हो गया तो मित्रो धर्म क्या है जो हमने बचपन में सीखा जिसमें आनन्द आ जाये जहां उत्सव हो।मेरा दूसरा अनुभव माता-पिता के साथ  1984 में 9दिन का शानतिकुंज आश्रम में प्रवास तब गुरूदेव भी वहीं थे मैं ठहरा अति शैतान अकेला पूरे दिन आश्रम में भ्रमण और शैतानी जो मिले वही अनुशासन सिखाये अरे भैया अनुशासित हो जायेंगे तो नयी चीजें कैसे खोजेंगे अतः हम भी न सुधरने वाले प्रातःकाल में माताजी वहां सबसे मिलती थीं सब लाईन में जाते थे पैर छूते थे शैल दीदी एक बहुत छोटी कटोरी में कुछ आयुर्वेद का पेय पदार्थ पीने के लिए देती थीं मुझे बहुत अच्छा लगता था रोज दो तीन चक्कर मैं लाईन में लगकर पी आता था।एक दिन मेरा शैतान जाग गया चौथे चक्कर पर मुझे कार्य कर्ता ने रोका मैनें उनकी चुनौती स्वीकार की पांचवा छुपकर पूरा किया छठवां भी छुपकर पूरा किया और माताजी जैसे समझ गयीं उन्होंने बैठा लिया पास में और पूछा बार बार क्यों आते हो इतने प्रेम से पूछा तो मैंने कहा ये पेय पदार्थ मुझे पसंद है उन्होनें समझाया यह आयुर्वेदिक दवा है ज्यादा प्रयोग नुकसानदायक हो सकता है तो मित्रो उन नौ दिनों में मैनें धर्म से क्या सीखा अनुशासन,समूह में रहना इत्यादि।ईसाई चर्च में जाते हैं दीपक जलाते हैं मतलब अन्धकार से प्रकाश करते हैं फादर जल छिड़कते हैं पवित्रता से सम्बन्ध है मैं कभी चर्च नहीं गया सुना ऐसी ही प्रकियायें होती हैं प्रार्थना करते हैं अरे भैया प्रार्थना तो वही करोगे जो तुम्हारी जरूरत होगी तो व्यवसायी हो तो भगवान् के पास भी बहुत काम हैं महापुरूष सबके कल्याण की प्रार्थना करते हैं।अब आ जाओ इस्लाम पर बहुत आसान अजान और दुआ अरे भैया उठो जहां भी हो जैसे हो जिस हालत में हो ये हो गयी अजान और दुआ में परमात्मा को याद करो निराकार परमात्मा भैया हमारे धर्म में निराकार की साधना सन्यासी लोग करते हैं क्योंकि उनकी ऊर्जा को धारण करने के लिए यम,नियम,संयम,प्रत्याहार, प्राणायाम, ध्यान, धारणा और समाधि के अष्टक नियम का अनुपालन आवश्यक है।
इस्लाम कहता है दुआ में अल्लाह हो अकबर परम सत्य है अरबी भाषा है जिसका मतलब है ईश्वर महानतम है, God is great. तो भैया जो हमने अपने धर्म से सीखा है  वह ये है कि जीवन से मृत्यु तक एक उत्सव यात्रा है उसका पूरा आनन्द लें और वर्तमान में जो संसाधन उपलब्ध हों उनका उपभोग करें और सभ्यता के विकास में परिस्थितियों से सामंजस्य बैठाते हुये अपने आदर्शों से समझौता न करते हुये अपना योगदान दें।साकार की पूजा करें जिस भगवान् को जो पसन्द वो खिलाएं भगवान् प्रसन्न हों तो ठीक अन्यथा स्वयं खाकर अपने को प्रसन्न करें।

जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः
3)
भैया हमारे भगवान सूंड वाले हैं पूंछ वाले हैं बैल पर चलते हैं शेर पर चलते हैं चार हाथ वाले हैं पांच मुंह वाले हैं जब भक्त प्रसन्न तो भगवान प्रसन्न कम से कम दिखते तो हैं अब भविष्य में शायद उन्हें मर्सिडीज पसन्द आ जाये या लड्डू गोपाल जेसीबी की जिद्द कर जायें कि झूला नहीं अब ट्रैक्टर चलायेंगे भगवान् भावना के भूखे हैं प्रेम के भूखे हैं सत्य के भूखे हैं अरे भैय्या  56 भोग भगवान को जब हम श्रद्धापूर्वक भावना से अर्पित करके ग्रहण करते हैं तो उसका स्वाद अलग होता है ठीक वैसे जैसे पत्नी अगर प्रेम से भोजन कराये तो स्वाद अलग और गुस्से में तो आप सभी समझदार हैं,इसलिए कहा जाता है बच्चे तो भगवान् की मूरत होते हैं।ये हमें साकार पूजा जो प्रतीकात्मक हैं हमें सिखाती हैं दैनिक जीवन में अनुशासन,नियम,प्रेम,करूणा,दया इत्यादि और मित्रो हम इसमें अति प्रसन्न हैं अन्य धर्मों का हमेशा सम्मान करते रहे हैं जब गुलामी में हमारे पूर्वज उन नियमों प्रसन्न और प्रगतिशील रहे तो अब तो कोई सवाल ही नहीं है।अब बात करते हैं हिन्दुस्तान में जैन धर्म और बौद्ध धर्म,सिक्ख सम्प्रदाय ये सब सीधे हमारे वैदिक धर्म से जुड़े हैं और सबका मुख्य कार्यालय कैलाश पर्वत है,जो हमें कम करके आंकते हैं उनके लिए लिख रहा हूँ आप कतई भ्रमित न हों कि अलग अलग हैं हां अति प्राचीन हैं।हमारे देश में ईसाई और इस्लाम धर्म विदेश से आये हैं यदि सृष्टि के आरम्भ से खोज की जाये तो इनका केन्द्र भी यहीं निकलेगा।मित्रो ईसाई धर्म भी जीसस मतलब अवतार को भगवान् मानते हैं, इस्लाम में मुहम्मद साहब को भगवान् मानते हैं वो भी अवतार थे हमारे धर्म में जैसे कृष्ण,राम कई अवतार हुये उससे बहुत पहले वैदिक युग कृष्ण भगवान् ने श्रीमद्भागवत गीता बोलते हुये यह स्वीकार किया था हे अर्जुन मैं ही परमेश्वर हूँ वह ग्रन्थ वेदान्त का सार है मतलब उसके बहुत पहले वेद लिखे जा जुके थे।ज्यादा गहराई में चले गये वापस आते हैं मित्रो सारांश यह है सृष्टि के आरम्भ का केन्द्र एक है ब्रह्मांड में हमने सूर्य और चन्द्र दोनों को गणना में मुख्य रखा और हमसे कोई कोई ज्ञानी भाई बन्धु नाराज होकर चला गया होगा उसने चन्द्र को मुख्य केन्द्र माना और ईसाई और इस्लाम का उदय हुआ हमारे राम सूर्यवंशी थे और कृष्ण चन्द्रवंशी वर्तमान में विज्ञान के माध्यम से हम चन्द्रमा तक पहुंच पाये हैं और पुराणों के अनुसार हमारे पूंछ वाले भगवान् हनुमान जी बचपन में सूर्य को निगल गये थे अतः अन्य ब्रह्मांड की भी सम्भावना है लगे रहो।ANYWAY IMAGINATION IS ALWAYS MORE POWERFUL THAN DETERMINATION. अब हम मुख्य मुद्दे पर चलते हैं एक आम आदमी के जीवन में धर्म का महत्व क्या है मित्रो उसकी जन्म से मृत्यु तक के संस्कार,व्यक्तिगत दिनचर्या, पारिवारिक व्यवस्था,धार्मिक त्योहार इत्यादि सभी धर्म ही नही बल्कि क्षेत्रों के अलग अलग हैं और सरकार उन्हें विधिवत् सम्पन्न भी करवाती है।अब विवाद करता कौन है किसी धर्म का व्यक्ति नहीं करता है आप संविधान को कुरान से जोड़ते हैं एक पवित्र धार्मिक ग्रन्थ का एक प्रशासनिक ग्रन्थ से तुलना करते हैंं संविधान में तो व्यवहारिक संशोधन समयानुसार किये जायेंगे कुरान में नहीं किये जायेंगे आपके धर्मगुरू आज के अनुसार कुछ नया लिख सकते हैं अल्लाह का सन्देश जिससे आपका कल्याण हो जहां तक मुझे लगता है आपसे बहुत अधिक शक्तिशाली लोग विश्व में हैं हिंसा और चरमपंथ छोड़ना ही होगा शिक्षित और सभ्य बनना ही पड़ेगा सहनशील बनना होगा यदि शान्ति स्थापित करना चाहते हैं अन्यथा आपकी मर्जी हम संगठित रहेंगे शतप्रतिशत।

जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः

 4)
मित्रो मैनें कुरान नहीं पढ़ी है कोई उपलब्ध कराये हिन्दी/इंग्लिश तो शायद और अच्छा विश्लेषण कर सकूं हां तो धर्म का तत्वज्ञान यह है कि किसी मनुष्य,समुदाय,समाज,राष्ट्र या विश्व का स्तर श्रेष्ठ उत्कृष्ट बनाना और पिछले कुछ वर्षों से तीन तलाक के मुद्दे पर जो टीवी पर बहस मैनें सुनी उसमें मौलवी जो मदरसों को संचालित करते हैं उन्होंने सबने एक साथ उसका विरोध किया आपने क्या किया सबसे पहले अपनी पत्नियों का अपमान किया,अपनी बहनों का अपमान किया,महिलाओं का अपमान किया पहले हमारे पूर्वज भी बहुविवाह करते थे,फिर रखैल का प्रचलन आया आज हमारे समाज में एकल पत्नी व्यवस्था है और यदि कोई ऐसा करे तो पत्नी झगड़ा करेगी और माता-पिता,बहनें सब पत्नी के पक्ष में चप्पल सेवा भी प्रदान कर सकते हैं और सबसे शर्मिन्दगी की बात यह की सारे मौलवी टीवी पर गला फाड़ कर हवाला दे रहे थे सबसे पवित्र ग्रन्थ कुरान का शरम करो महिलाओं को तुम्हारे विरोध में खुल कर आना पड़ा इसीलिए तुम औरतों को दबाकर रखते हो,हिंसक बन कर  रहते हो कि अय्याशी कर सको।दूसरी बात जब चुनाव आता है उसके आगे पीछे तुम्हारा इस्लाम खतरे में आ जाता है कयों भाई कोई भी बात हुई तुम्हारे हिसाब से सरकार नहीं बनी तुम्हारे मन का नेता नहीं जीता इस्लाम खतरे में आ गया अरे भाईयो जब अल्लाह सबसे बड़ा है आप निराकार की पूजा करते हो तो आपको अल्लाह पर भरोसा नहीं है क्या कि वो आपकी रक्षा करेगा या तो आप अल्लाह के अनुसार चलो या अल्लाह को अपने अनुसार चला लो अभी आपकी हरकते ऐसी हैं कि अल्लाह को आपके अनुसार चलना होगा ऐसा नहीं हैं हमारे धर्म में भी हैं बोल दिया जय श्री राम राम कौन थे राम ने रावण मारा था रावण कौन था पंडित था सारे पंडित हमारे दुश्मन हैं जय श्री राम बहुत मिल जायेंगे ऐसे भैया राम मर्यादा पुरुषोत्तम विष्णु अवतार थे इतना वो समझना नहीं चाहते ठीक है।तो अल्लाह के बंदो श्रेष्ठ बनो भाईचारा कायम करो जो पूर्वजों ने हिंसा और गलतियां की हैं वो थीरे धीरे लोग भूलेंगे प्रेम में बहुत शक्ति है।
अब चलते ईसाई धर्म की ओर आप लोग आधुनिक,प्रयोगवादी, व्यवहारिक, वैज्ञानिक और आशावादी, सकारात्मक, रचनात्मक दृष्टिकोण लेकर पूंजीवाद के सहारे जीसस के सन्देश सबसे प्रमुख सन्देश सेवा लेकर चले अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत कार्य किये छोटा सा उदहारण हमारे शहर में 28 साल पहले सेंट जोसेफ संस्था खोलकर लगभग 28000 बच्चों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर तैयार करना रोजगारपरक शिक्षा देना  और दूसरा सेवा का उदहारण कानपुर में मरियमपुर हास्पिटल खोलना ब्रिटिश टाईम में जिसकी सेवायें लाखों लोग आज भी लेते हैं परन्तु अब वही सेवा शिक्षा और स्वास्थ्य मेवा बन गयी है लूट मची है अतः आपके धर्म का सन्देश खतरे में है।ईसाई धर्म द्वारा हिन्दुस्तान में गलत कार्य विगत कुछ वर्षों में बहुत तेजी से धर्मांतरण वो धन देकर अत्यन्त घटिया और निन्दनीय है।मेरा जानने वाला एक वर्कर मिला मैनें उससे हालचाल पूछा बताया भाई साहब ईसाई बन गये रूचि जागी पूरा विवरण समझा 10000 प्राप्त हुये थे दो साल बाद मिला उसने सर गंजा करवा रखा था मैने पूछा क्या हुआ बोला भाई मर गया था तो मैनें कहा तुम तो ईसाई बन गया था वो हंसा बोला भाई साहब उसके बाद दो बार और बन चुका हूँ वो महाशय दलित समाज में चमार जाति से थे ये हिन्दुस्तान है मेरी जान आपने क्या किया हमारे देश की अच्छी खासी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस डुबा दी ईसाईत के चक्कर में मैं श्रेष्ठ हूँ इस चक्कर में अरे जिस दिन पूरे विश्व से गरीबी मिट जायेगी और जिसको आध्यात्मिक ज्ञान में रूचि होगी उसे ब्राह्मण ही बनना होगा वेद ही पढना होगा क्योंकि वेद परमात्मा ने नहीं बोले हैं हमारे ॠषियों  के तपबल से उत्पन्न प्रज्ञा है।धर्म पर हम विश्व में आध्यात्मिक गुरू थे हैं और सर्वदा रहेंगे।धर्म पर चर्चा समाप्त अब प्रधानसेवक द्वारा मदरसों के आधुनिकीकरण पे चर्चा करेंगे।

जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः

5)
प्रधानसेवक जी ने शपथ लेते ही तुष्टिकरण की नीति अपनाते हुये पहली घोषणा की सिर्फ मुस्लिम बच्चों को वजीफा देंगे और मदरसों का आधुनिकीकरण करेंगे।यदि आप सही है तो किसी का भी तुष्टिकरण बेईमानी है और मदरसों के आधुनिकीकरण में आप क्या करेंगे निर्माण कार्य,लैपटॉप इत्यादि और वजीफा के नाम पर नकद खाते में मतलब जम कर भ्रष्टाचार का प्रारम्भ हो गया और वहाँ बच्चों को कैसी मानसिकता के शिक्षक शिक्षा देंगे वह पूरा देश टीवी पर बहस में देखता है मतलब आप स्वयं चरमपंथ को बढ़ावा दे रहे हैं।माननीय प्रधानसेवक जी चरणवंदन के साथ विनम्र निवेदन है आप मेरे बाप की उम्र के हैं और देश के सबसे बड़े मंदिर संसद के सबसे बड़े पंडित हैं अतः यह आपकी जिम्मेदारी है कि धारा 30 पर पुनर्विचार करें और देश में एक समान शिक्षा नीति लागू करें अन्यथा भविष्य में अमीर गरीब की शिक्षा में जो विभाजन हो रहा है और समानांतर आर्थिक असमानता तेजी से बड़ी है विवाद का मुख्य कारण हो सकता है जो कतई देशहित में नहीं होगा मौकापरस्त ताकतें अस्थिरता पैदा करेंगी।हमें अपने देश में चरमपंथ और शरणार्थी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करने चाहिए,आज हमें आवश्यकता है अपने देश के मुस्लिम भाईयों विशेषतः मौलवियों के दिमाग के आधुनिकीकरण की इन सबको पाकिस्तानी नेटवर्क से शतप्रतिशत विच्छेद करके पहले विकसित देशों के इस्लामिक मौलवियों से शिक्षा दिलवा कर वैश्वीकरण के दौर में इनका आधुनिकीकरण करिये इसके बाद ही कोई बजट दीजिए अच्छे दिमाग का व्यक्ति एक पेड़ के नीचे भी अच्छी शिक्षा दे सकता है हमारे देश के मुस्लिम बच्चों को रोजगारपरक,वैश्विक और आधुनिक शिक्षा दी जाये जिससे वो चरमपंथ से दूर हटकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निर्धारित करें।
अभी ठीक चुनाव के बाद जिस तरह का माहौल बन रहा है इसके क्या मायने निकाले जाये कि समाज में अज्ञात भय व्याप्त हो जाये या सत्ता पक्ष के खिलाफ जनता भड़क जाये या सत्तापक्ष की ही कूटनीति की ऐसे माहौल में विपक्ष की क्या प्रतिक्रिया होती है विचारणीय है।हमारा देश बहुत बड़ा है प्रतिदिन बहुत सी घटनायें होती हैं राजनीतिक प्रबंधन अपने फायदे नुकसान के अनुसार मीडिया मैनेजमेंट करते हैं परन्तु मजबूत सरकार बनने के बाद तीन बड़ी घटनायें अन्तरराष्ट्रीय माफिया/आतंकवादी या हमारे दुश्मन देश की साजिश भी हो सकती हैं एयरफोर्स दुर्घटना बिना युद्ध के हमारे तेरह जवान शहीद,कश्मीर में सीआरपीएफ के पांच जवान शहीद और बंगाल में डाक्टर की रोहिंगया शरणार्थीयों द्वारा पिटाई और उस उस घटना का जबरदस्त राजनीतिक प्रबन्धन मीडिया में क्योंकि दीदी ने चुनाव प्रचार में आपकी भाषा में प्रचार किया और 18 जवानों की शहादत के बाद कोई राजनीतिक प्रबन्धन नहीं मीडिया मैनेजमेंट नहीं क्योंकि अब चुनाव हो चुका है जबकि पुलवामा के बाद आप टीवी पर ऐसे दिख रहे थे जैसे पाकिस्तान मिट गया अब कोई नहीं बचा सकता जब आप शहीदों की परिक्रमा कर रहे थे वाह प्रधानसेवक जी वाह कौन है आपका इवेंट मैनेजर

जय हिंद वन्दे मातरम ।
सुधीर तिवारी
क्रमशः


6)
मित्रो संसद सुचारू रूप से प्रारम्भ अब प्रधानसेवक जी को अपना कार्य करने देते कुछ समय बाद विश्लेषण करेंगे ये हमारा सौभाग्य है कि हमें कर्मशील और ऊर्जावान प्रधानसेवक मिला है।मैनें 2010 में फेसबुक ज्वॉइन किया था राजनीति में रूचि है और कांग्रेस विचारधारा से हमेशा प्रभावित रहे हैं लिहाजा फेसबुक पर भी उसी प्रारम्भ से फालो किया तो जो पसन्द आया शेयर करते रहे मतलब डिजिटल प्रचारक कांग्रेस के बने रहे डाॅ मनमोहन सिंह निश्चित रूप से एक सज्जन,ईमानदार व्यक्ति हैं और विश्व स्तर के अर्थशास्त्री और एक सफल प्रधानसेवक रहे उनके नेतृत्व में हमारे देश की अर्थव्यवस्था ने बुलन्दियां हासिल की और उच्चतम वृद्धि दर पर अर्थव्यवस्था पहुंची हमें उन पर गर्व है।सोनिया गाँधी जी ने यूपीए की कमान सम्हाल कर डिनर डिप्लोमेसी से काफी हद तक स्थिरता रखी और देश को आगे बढाने में पूर्ण योगदान दिया।गठबंधन की सरकार चलाना बहुत टेढ़ी बात है अतः भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण चरम सीमा पर हुआ और सोनिया जी के ईसाई होने के नाते ईसाई संगठनो ने लाभ उठाते हुये कई राज्यों में जबरदस्त धर्मांतरण हुआ जिसके परिणामस्वरूप राहुल और प्रियंका को नकार दिया गया ये भी एक कारण है दूसरा कारण है जनता में वंशवाद का विरोध राहुल जी और प्रियंका जी सर्वे करवा लें अब समय बदल गया है आम जनता नेता को इज्जत की नजर से नहीं देखती है उनके बच्चों को शतप्रतिशत नफरत की नजर से देखती है टेलीविजन होने से सब टीवी देखते हैं और जागरूक हैं आज जो संसद में कर हो रहा था इस पर आम जनता की प्रतिक्रिया कि लडाना चाहते हैं और शांत हो जाते हैं अब ओवैसी चीखेगा अल्लाह हू अकबर तो जिस जनता ने 800 साल गुलामी झेली और वर्तमान में अभी बंगाल में डाॅकटर कांड,टिंवकल कांड और केरल में महिला पुलिस कांड और फिर संसद में जय श्री राम कांग्रेस का कर दिया काम तमाम सीधा मतलब है कि हम वन्दे मातरम् नहीं कहेंगे मतलब तुम भारत बनाओ मतलब विपक्ष हमारे मुसलमान भाई हिन्दुत्व वाला चाहते हैं उन्हें धर्मनिरपेक्षता रास नहीं आ रही है।आदरणीय राहुल जी सीधे हैं उनके स्वतन्त्र विचार नहीं हैं,आरम्भ करने की क्षमता नहीं है हां दृढ़निशचयी हैं मोदीजी का धैर्य जबाव दे गया विगत चुनाव में मानना पड़ेगा परन्तु भारतीय राजनीति में सफल नहीं हो सकते विपक्षी ही लाभ उठाते रहेंगे।आप को अब आना चाहिए था विगत चुनाव में आकर दो दिनों में आपका काम तमाम कर दिया चमचों ने राजनीति में भारतीय राजनीति में अगले 20 सालों तक हिन्दूवादी राजनीति हावी रहनी है यदि जनसंख्या नियंत्रण कानून ले आये हमेशा के लिए रहेगी अन्यथा पुनः इस्लामिक राजनीति हावी होगी।बाड्रा जी को पहले ही लपेट रखा है अतः गांधी परिवार सम्मानित मार्गदर्शन करे और नयी कांग्रेस का गठन होने हिन्दुत्व वाली कांग्रेस स्वतंत्रता आंदोलन वाली कांग्रेस,वल्लभ भाई,अम्बेदकर,नेता जी,नेहरू-गांधी वाली कांग्रेस जिसके नाम से हमारी विश्व में पहचान है जिसके 70 सालों के कामों से हम हवाबाजी कर रहे हैं।
वर्तमान कांग्रेस से हम शर्मिन्दा हैं।
जय श्री राम जय श्री कृष्ण
हर हर महादेव
क्रमशः


7)
मित्रो आजकल समाचारों पुनः बाबा राम रहीम चर्चा में है हरामखोर ड्राइवर था दो गुरू थे मस्ताना और शाह बाद में कब्जा कर लिया इसने इसके पहले जो संत थे परमात्मा की कृपा थी उनपर अच्छे भी थे उनका उत्तराधिकारी बनकर लोगों की भावनाओं का शोषण किया,ऐसा मैनें सुना है जानकारी गलत भी हो सकती है।परन्तु मैनें स्वयं इसका इंटरव्यू सुना एकबार उसमें ये आत्मा को बुलाने की बात कराने की बात कर रहा था मतलब स्वयं को श्रेष्ठ दिव्य पुरूष और सामने वाला उसकी दिव्य शक्तियों से डरे इस तरह का प्रचार केंद्र अज्ञात आत्मा जिसे आप न देख सकते हैं न सुन सकते हैं न महसूस कर सकते हैं मतलब भय का भूत बस यही व्यापार है अंधविश्वास का और पूरे विश्व में है सिर्फ हमारे देश में ही नहीं विकसित देशों में भी है मित्रो।मेरा स्वभाव बचपन से प्रयोगवादी और अंधविश्वास को न मानने का रहा है मेरे पूर्वज भी इन बातों पर विश्वास नहीं करते थे अर्थात शिक्षित थे उसी स्वभाव के तहत 1994 में जब मेरी उम्र17+ साल थी आत्मा से सम्बन्धित प्रयोग किया इलाहाबाद में शिक्षा के दौरान एक सीनियर महोदय ने प्रभाव बनाने के लिए आत्मा पर भाषण दिया और बताया कि वो आत्मा से बात तो नहीं करा सकते पर सिक्के के माध्यम से हां या न  में प्रश्न का उत्तर दिलवा सकते हैं महाशय झारखंड से थे बहुत आत्मविश्वास था बताया उनके गुरू ने सामने करके दिखाया है मैं ठहरा प्रयोगवादी मैनें कहा सर आज ही चलते हैं साईकिल निकाली और दोनों एक ईसाई कब्रिस्तान काफी बड़ा था ऊंची चहारदीवारी चारो ओर बड़ा गेट हम लोगों ने सोचा अन्दर कैसे प्रवेश किया जाय थोड़ा डर लगा फिर साहस किया साईकिल को चहारदीवारी के किनारे लगाया और कूद गये अन्दर कब्रिस्तान में एक झाड़ी तोड़ी गयी और एक कब्र साफ की महाशय ने प्रयास किया कोई सफलता नहीं मिली,तीन  चार कब्रों पर महाशय ने प्रयास किया कोई सफलता नहीं मिली तब तक डर निकल चुका था घरेलु माहौल हो गया था उसके बाद देशी तरीके से भैया मैं शुरू कब्र साफ करूं कभी पीटर कभी जोसफ कभी डिसिल्वा नाम पढूं फिर कहूं उठो अंकल भैया अंदर तीन घंटे जगाया कोई नहीं जागा तब तक थक चुके थे भूख भी लगने लगी थी सुबह होने वाली थी बाहर निकलने की तैयारी की जैसे ही चहारदीवारी से कूदे दो प्रकाश सामने से तेज चमकते हुये दिखाई दिये और बहुत तेज घरररररररररररररररर की आवाज किसकी आवाज हम लोगों ने जल्दी से साईकिल उठायी और कहा आ गये भूत तब तक आवाज आयी रूक और हम रूक गये भैया भूत नहीं थे पुलिस थी उन्होंने पूछा क्या कर रहे थे अन्दर झूठ बोलने की आदत है नहीं आज भी नहीं है वो सब भी अन्धविश्वास पर भरोसा करते थे कम से कम 100 गालियां दी और आत्मा के दर्शन करा दिये विश्वविद्यालय परिचय पत्र होने के कारण छोड़ दिया।यह सच्ची घटना है

जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः

8)
पिछले लेख में मैंने ईसाई कब्रिस्तान में बहुत प्रयास किया पर आत्मा नहीं मिली गालियां अवश्य मिली,अब हम आज फिर एक अन्धविश्वास से जुड़ी एक सच्ची घटना की चर्चा करेंगे जिसे भय का भूत कहते हैं।यह सच घटना मेरी मां ने सुनायी थी मेरे नाना के भाई थे लिखे पढ़े थे बहुत पुरानी बात है ग्रामीण भारत था,उस दौरान आज का चलन नहीं था सब आपस में निकलते राम राम करते हुए निकलते थे नाना बाहर बैठे हुये थे पड़ोस के गांव का एक किसान निकला और नाना से राम राम किया उन्होंने पूछा कहां जा रहे हो उसने बोला दादा बुखार आ गया मौलवी ताबीज बना देता है बुखार सही हो जायेगा।नाना हास्य और व्यंग्य के अच्छे ज्ञाता थे उन्होंने कहा मैं भी बना लेता हूँ इधर आओ तुम्हारा बुखार सही हो जायेगा उसको वाईरल फीवर था नाना ने मां को बुलाया कागज और पेन मंगाया और उसमें काफी देर तक लिखते रहे फिर उससे कहा घर से बाहर नहीं निकलना उबला हुआ पानी पीना और स्वच्छता रखना बहुत ही सादा भोजन करना ताबीज दांये हाथ में बांध लेना और शर्त यह ताबीज कोई दूसरा व्यक्ति न देखे न पढ़े तीन दिन बाद आना बुखार सही हो जायेगा ताबीज मुझे ही वापस करना नहीं तो बुखार फिर आ जायेगा,सभी घर वालों ने कहा ये क्या किया उन्होंने कहा तीन दिन बाद बतायेंगे भोला भाला किसान चला गया।तीन दिन बाद आया बोला  पंडित जी राम राम बहुत अच्छा ताबीज बनाये थे एक दिन में ही आराम मिल गया नाना ने कहा ताबीज लाओ उसने ताबीज दी नाना उसे खोलकर एक तीसरे व्यक्ति से पढ़वाया गंदी गंदी गालिया लिखी थी फिर उस किसान को समझाया कि तुमने जो नियम मैंने बताये थे उससे आराम मिला न कि ताबीज से ये सब अंधविश्वास है।और इसी तरह के भय के भूत पूरे विश्व में भ्रमण कर रहे हैं और भोले भाले लोग उनके शिकार हैं।

जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः

9)
मित्रो हमारी चर्चा अंधविश्वास पर चल रही थी उनमें भी अंधविश्वास का वह रूप जिसे समाज में चमत्कार या भय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है,दुनियां रहस्यों से भरी है रहस्य के प्रति जिज्ञासा ही आविष्कार को जन्म देती है।परंतु हजारों साल से भूत,प्रेत,पिशाच,आत्मा इत्यादि का पूरे विश्व में अत्यधिक भय है सब डरते हैं किसी को दिखा नहीं एहसास होता है लेकिन भय बहुत है और सबसे मजेदार पूरे विश्व में डाक्टर से अधिक संख्या में भूत भगाने वाले हैं गांव गांव में हैं चमत्कार दिखाते हैं कहीं भूत नृत्य करते हैं,कहीं कुछ करते हैं पर ये भूत न तो कम होते हैं न भागते हैं समाज में भय रहता है मेरे प्यारे मित्रो इसे कहते हैं भय का भूत इतना जबरदस्त अंधविश्वास फैला हुआ है और इंटेलिजेंट लोग उसमें भी तड़का लगा लेते हैं बाकायदा मीडिया पर शो आते हैं शशशशशशश कोई है इत्यादि मैं पिछले पोस्ट में बता चुका हूँ ईसाई कब्रिस्तान में आत्माएं नहीं मिली,उसके बाद नाना की कहानी में ताबीज का जिक्र हुआ सत्य घटनायें हैं मैंनें अपनी आंखो के सामने मौलवी साहब को भूत भगाते हुये देखा है,मित्रो 17 वर्ष की ही उम्र में मैने एक प्रयोग किया या समझिये अनजान स्थिति में हो गया मेरे निर्भय स्वभाव के चलते बचपन से अकेलापन और प्रकृति मुझे अत्यधिक प्रिय है अतः इलाहाबाद में छात्र जीवन में जिस दिन पढ़ने में एकाग्र नहीं होते थे उठाया अपना रथ मतलब साईकिल और चल दिए रात्रि विचरण पर अकेले सबसे पसंदीदा स्थान होता था संगम तट कई किमी की साइक्लिंग के बाद जहां गंगा और यमुना मिलती हैं वहीं पंडो के तख्त पड़े रहते थे लगा लेते थे आसन विराज हल्की सी बहते हुये पानी की आवाज चंद्रमा का प्रकाश असीम शान्ति बीच-बीच मेंं जब ट्रेन पास होती थी तभी भंग होती थी।यह कार्यक्रम दो वर्षों में 25-30 बार आधी रात से सुबह तक किया और संगम तट प्रसिद्ध है हमारे सनातन धर्म में अस्थि विसर्जन और पिंड दान के लिए भैया एक दो आत्मा,भूत-प्रेत कुछ तो दर्शन दे ही देते किसी ने नहीं दिया ये प्रयोग मेरे शौक ने करा दिया।इसका मतलब यह नहीं है कि मैं पराचेतना,आत्मा के अस्तित्व को नकार रहा हूँ मैं नकार रहा हूँ अंधविश्वास को मैं नकार रहा हूँ भय के भूत को जिसका डर मीडिया के द्वारा समाज में बैठाया जाता है जिसके डाक्टर हर तीसरे गांव में उपलब्ध हैं।अरे भैया आत्मा क्या है श्रीमद्भागवत गीता पढ़ लो गीता प्रेस वाले बहुत सस्ते में उपलब्ध करा रहें हैं श्रीकृष्ण भगवान् ने ताल ठोंक के बताया है भूत प्रेत क्या शिवपुराण पढ़ लो बहुत सारी पुस्तकें हैं शर्त ये है अच्छे लेखक या अनुवादक की पुस्तक पढ़ना अन्यथा भ्रमित भी हो सकते हो हमारे ग्रन्थों को विकृत करके भ्रम फैलाने का कार्य भी किया गया हैंं सुनियोजित तरीके से।

जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः

10)
मित्रो हमारी बात अंधविश्वास पर चल रही थी अब ये हर धर्म,सम्प्रदाय में समस्त विश्व में किसी न किसी रूप में अपना अस्तित्व बनाये हुये है,मेरा व्यक्तिगत अनुभव यह है यदि आप निर्भय हैं तो यदि कहीं कोई अदृश्य ऊर्जा है भी तो आपके सामने नहीं आ सकती क्यों भाई क्योंकि आत्मा ही परमात्मा है आप ईश्वर की सबसे शक्तिशाली और सुंदर रचना हो आपके पास बुद्धि है विवेक हैं नेतृत्व करने की क्षमता हैं, सोचने की क्षमता है ज्ञान है फिर भी आप डर रहे हो वो भी अज्ञात से धिक्कार हैं, मृत्यु से वो तो सदा सत्य सबको मरना ही है तो डरना कैसा बस समझ लो भूत की समस्या समाप्त हो गयी।यदि मर भी गये तो आत्मा तो अमर है अविनाशी है तुम भी भूत बन जाना और मौज लेना बिना टिकट के अन्तराष्ट्रीय विचरण करो न ईएमआई का झंझट न मोह माया मस्त आज एशिया में तो कल अरब दो दिन बाद यूरोप ज्यादा मस्ती करोगे तो फिर डरना कैसा।अब अंधविश्वास के साथ मामला आता है तकनीक,विज्ञान का जिसे हम अपने यहाँ  तंत्र,मंत्र,यंत्र कहते हैं पूरे विश्व में अलग अलग तरीके हैं परंतु अस्तित्व हर स्थान पर है हमारा देश अति प्राचीन व्यवस्था है अतः हर गांव में एक न एक बीमारी का भगत/तांत्रिक या डॉक्टर कोई न कोई मिल जाता है और वह उस विज्ञान को अंधविश्वास की श्रेणी में लाकर संदेहास्पद कर देता है।यद्यपि सत्य यह है कि हमारे प्राचीन तंत्र,मंत्र और यंत्र पूर्ण वैज्ञानिक हैं आप उनको पूर्ण वैज्ञानिक माध्यमों से सत्यापित कर सकते हैं उदहारण के तौर पर अभी एम्स ने गायत्री मंत्र पर रिसर्च की और सकारात्मक परिणाम बताये।हमें शर्म आनी चाहिए विदेशों में लोग हमारी प्राचीन चीजों पर रिसर्च कर रहे हैं हम मजबूत सरकार से विनम्र निवेदन करते हैं कि तंत्र,मंत्र,यंत्र को विधिवत् शोध और शिक्षा में शामिल किया जाये जिससे योग की तरह हमारी प्राचीन वैज्ञानिक विधियां जिन्हें अन्धविश्वास और हेय दृष्टि से देखा जाता है उनकी वास्तविकता पूरे विश्व को पता लगे और देश के अंदर व्याप्त अंधविश्वास समाप्त हो।
इन शक्तियों का नकारात्मक प्रयोग समाज में न होने पाये।

जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
समाप्त।

राजनीति जम्मू-कश्मीर 6


1)
मित्रो आज का दिन भारतीय राजनीति के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जायेगा,आज तक हमारे देश में स्वतंत्रता अधूरी थी दो संविधान और दो ध्वज एक राष्ट्र अंग्रेजो की विभाजनकारी नीति हमें जाते जाते थोप गयी थी।आज हमारा राष्ट्र एक झंडा और एक संविधान के अंतर्गत आ गया है और संवैधानिक व्यवस्था में कश्मीर के नागरिकों को आज सच्ची आजादी मिली है,अब वह बिना भ्रमित हुये पूरे देश में शिक्षा,व्यापार,सम्बंध इत्यादि विकसित कर देश की मुख्य धारा से जुड़ें।पाकिस्तान हमारा दुश्मन मुल्क है कृपया जितनी जल्दी हो सके उससे दूरी बनायें,आतंकवाद का व्यापार कर रहा है एक बार तो नष्ट होना ही होगा तभी पुनर्निर्माण संभव है।मित्रो आज इतना बड़ा कदम हमारी सरकार ने उठाया और संवैधानिक तरीके से सफलतापूर्वक सम्पन्न भी हो जायेगा  इसके लिए सर्वप्रथम सारा देश बाबा साहेब डाॅ भीमराव अंबेडकर को धन्यवाद् करता है क्योंकि उनकी दूरदर्शिता की वजह से ही राज्यसभा में प्रस्ताव प्रस्तुत करने से पहले ही राष्ट्रपति महोदय उस पर साईन कर चुके थे,धारा 370 के अंत में बाबा साहब लिख गये थे This is temporary. पहले तो बाबा साहब ने शेख अब्दुल्ला को भगा ही दिया था😊।मित्रों डाॅ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की शहादत से अब तक हजारों शहादत और लाखों व्यक्तियों के जीवन को नर्क बनाने वाली समस्या की जड़ समाप्त हो गयी आज के दिन अतः स्वाभाविक रूप से ऐतिहासिक दिन है और राष्ट्रीय एकता और अखंडता की संवैधानिक सम्पूर्णता का दिन है समस्त देशवासियों को कोटि कोटि बधाईयां☺🙏

जय हिंद वन्दे मातरम्।
सुधीर तिवारी
क्रमशः

2)
भारतीय राजनीति में बहुत बड़ा निर्णय धारा 370 को समाप्त कर दो केंद्रशासित राज्यों में विभाजित करना पूर्ण संवैधानिक तरीके से किया गया है,समस्त विश्व से समर्थन प्राप्त हो चुका है अतः अब हम 73 वें स्वतंत्रता दिवस पर सारा देश एक राष्ट्र एक ध्वज एक संविधान का उत्सव मनायेगा सभी भारतवासियों को हार्दिक शुभकामनायें।आखिर जनता के द्वारा चुनी हुयी पूर्ण बहुमत की सरकार ने तिरंगे को पूर्ण आजादी दिलवा ही दी बहुत बहुत धन्यवाद अब हमारा विवाद हमारे पड़ोसी देश से नियंत्रण रेखा और आतंकवाद पर है जो चलता रहेगा,हमें गर्व है हमारा वर्तमान शासन प्रशासन आंतरिक और वाह्य हर तरह की समस्याओं से निपटने में सक्षम है।विपक्ष में जो अच्छे नेता हैं या तो मौन हैं या अपना वोटबैंक सुरक्षित कर रहे हैं कुछ राजनीतिक विदूषक जो अब पूरा देश जान चुका है अपने स्वभाव के अनुसार भड़काऊ और नकारात्मक बयानबाजी करके देश के नकारात्मक तत्वों को भी नेतृत्व दे रहे हैं उन सभी को भी स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं के साथ धन्यवाद अपना प्रयोजन जारी रखें हम जैसे लोग उनका उत्साह वर्धन करते रहेंगे।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी जी का इस निर्णय को असंवैधानिक कहना अत्यंत निंदनीय है आपको इंदिरा जी के समकक्ष प्रसारित कर रहें हैं मीडिया में और आप जनता को भड़काने का प्रयास कर रही हैं जबकि जम्मू-कश्मीर में हमारी सेना अति संवेदनशील स्थिति को सम्हाल रही हैंं, सारा देश शर्मिंदा है।भारतीय संविधान में राष्ट्रीय एकता और अखंडता सर्वोपरि हैंं,सारे निर्णय संविधान के दायरे में हुये हैं आपके अनुसार या तो संशोधन के अनुसार चलना चाहिए था या फिर जनमत संग्रह दोनों संविधान के बाद समस्या को विकृत और हमारी अखंडता को चुनौती देने के लिए किए गए कृत्य हैं,कतई स्वीकार नहीं किये जायेंगे।आज कश्मीर में जनमत संग्रह कल पश्चिम बंगाल,केरल,असम,पश्चिम उत्तर प्रदेश जनसंख्या बढ़ाओ जेहाद और आतंकवाद का सहारा लो और गला फाड़कर चिल्लाने लगो भारत तेरे टुकड़े होंगे और हम भारतवासी मान जायेंगे आपने कहा यह असंवैधानिक पूरा देश आपको इंदिरा जी समझ कर सही मानकर आपके पीछे चलेगा।प्रियंका जी राजनीति की पहले सेमेस्टर में ही फेल वो भी बुरी तरह पुनः प्रवेश का मौका भी नहीं रखा।
हम शर्मिन्दा हैं कि फेसबुक पर मैनें आप लोगों को प्रसारित किया।

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।
जय हिंद वन्दे मातरम् ।

3)
मित्रो आज कश्मीर में मजबूत सरकार के महत्वपूर्ण और राष्ट्रहित में लिए गये निर्णय के बाद प्रथम चरण में ढील दी गयी विपक्ष के लोग और आम आदमी भी जाकर वस्तु स्थिति देख सकते हैं,अत्यंत पुरानी बीमारी है तो राष्ट्र को मानसिक रूप से लम्बे इलाज के लिए तैयार रहना चाहिए यदि वहाँ की आम जनता सहयोग करेगी तो अतिशीघ्र इस समस्या को हमारा प्रशासन इतिहास बना देगा,ऐसा हम पूरे आत्मविश्वास से इसलिए कह सकते हैं क्योंकि हमारे पास आज विश्वस्तरीय संशाधन उपलब्ध हैं।
कल समाचार में देख रहा था कि पाकिस्तान आतंकवादी नेटवर्क को एक्टिवेट कर रहा हैंं,भैया सीधा जबाब इसका यह है कि आप भी कह दें गौरक्षक सक्रिय हो जाओ।मित्रो अभी चुनाव नहीं हैं और राष्ट्रीय अखंडता का मामला है,कश्मीर मुद्दा हिंदू मुस्लिम नहीं है यह अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का शिकार है हमारी राष्ट्रीय अस्मिता,अखंडता और एकता को चुनौती है अतः मीडिया या पाकिस्तान के किसी भी साम्प्रदायिक उकसाने वाली घटना को ध्यान न दें और धैर्य का परिचय देते हुये शासन और प्रशासन का सहयोग करें।मैं शर्मिंदा हूँ कि एक आम आदमी होते हुये मुझे यह लिखना पढ़ रहा है,यह जिम्मेदारी तो विपक्ष को निभानी चाहिए थी।☺अब चलते हैं पाकिस्तान की ओर भैया नई कार लाओ तब भी पड़ोसी को जलन होती है,आपने तो उनकी रोजी रोटी छीन ली 70 सालों से कश्मीर के नाम पर आतंकवाद और भारत को अस्थिर करने की कीमत मिलती थी,आपने धारा 370 समाप्त कर दी और साथ में केन्द्र शासित बौखलाए न तो क्या करे प्रतिक्रिया स्वाभाविक है,जीसे लो भारतीय सेना पर भरोसा रखो।हमारा सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि मजबूत सरकार के साथ मजबूत विपक्ष नहीं है और आरोप मुख्य चौकीदार पर लगाते हैं विपक्ष को नष्ट करने का यह असत्य है विपक्ष को आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता है वर्तमान में विपक्ष धृतराष्ट्र की तरह अडिग है, ढुलमुल नीति अब स्वीकार नहीं करेगा युवा देश धनबल,बाहुबल भविष्य में व्यक्तिगत मनोरंजन होंगे अतः जागो और नयी जिम्मेदारी सम्हालो विपक्षियो।

जय हिंद वंदे मातरम।
क्रमश:

4)
मित्रो आज से लगभग 100 वर्ष पहले स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान ओवैसी जैसे एक जिन्नासुर थे जिनकी ऊलजलूल हरकतों से तंग आकर बहुत से देशभक्त कांग्रेस से अलग होकर पीछे से स्वतंत्रता आंदोलन में सहयोग करते थे उन्हीं में से एक हमारे परम पूजनीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक श्री हेडगेवार जी थे,यह एक राष्ट्रभक्त समाजसेवी संगठन है पूर्ण हिन्दूवादी और देशभक्त होने के कारण कई बार संगठन पर आरोप लगे हैं स्वाभाविक है परिवार बड़ा हो तो विभिन्न मतों के लोग जुड़ते हैं परंतु किसी भी संगठन का चरित्र उसकी मूल भावना और क्रिया कलाप पर निर्भर करता हैं, पाकिस्तान के वजीरे आजम का 14 अगस्त के भाषण में बार बार आरएसएस पर उंगली उठाना यह सिद्ध करता है कि देश के दुश्मन परेशान हैं संगठन को प्रणाम।
आतंकवादी और चरमपंथी ताकतों के हौसले पस्त हैं,ऐसा दिख रहा है विचारणीय है यदि यह दबाव में है तो खतरनाक है और स्वेच्छा से है तो सुधारवादी है स्वागत है।हल्का फुल्का विश्लेषण करते हैं मित्रो भारत में अभी कुछ महीने पहले तक मानसिकता यह थी कि सरकार खिचड़ी बनेगी और फिर देखेंगे अचानक उल्टे परिणाम आये तो प्रारंभ हुआ तुष्टिकरण से पिछली सरकार में भी तुष्टिकरण से ही प्रारम्भ किया था याद करिए स्मृति ईरानी जी मानव संसाधन मंत्री बनी थी और उन्होंने 8000 मदरसों को एप्रूवल भी दिए थे होगी कुछ भविष्य की तैयारियां राम जाने हां तो इस बार भी तुष्टिकरण मतलब वजीफा और मदरसों का आधुनिकीकरण से प्रारम्भ हुआ बलात्कार और छिछोरापन से धारा 370 पर ठहर कर गाँधी परिवार की बैंड बजा के बारात निकाल दी गजब की आक्रामक राजनीति और अब आने वाली है मंदी जिसमें नजर यह रखनी है कि लाभ/हानि किसे होता है राधे राधे।गलत दिशा में चले गये मित्रो बात हो आतंकी भैयों की तो भैया एशिया में अशांति,मध्य एशिया में अशांति,अफ्रीका में भी रायता फैलता,कभी मिश्र में क्रांति,लीबिया में लफड़ा,श्रीलंका में लोचा,म्यांमार में लफड़ा,भारत,जर्मनी, इंग्लैंड, फ्रांस, अल्लाह का घर सऊदी अरब भी नहीं बख्शा,इस्राइल छोटा सा प्यारा देश उसके नाक में दम,रूस साफ सुथरे लोग टुकड़े कर दिये अरे पाप से डरते हो या नहीं।कश्मीर समस्या कहां है,नजर उठा कर देखो पूरे विश्व में सिर्फ समस्या ही समस्या है और हर जगह कारण चरमपंथी,धार्मिक उन्माद,गरीबी और अशिक्षा आधुनिक आतंकवाद में बेरोजगारी और अय्याशी भी नये कारण है।
चीन दूरदर्शी है अतः वह चरमपंथ को जन्म ही नहीं लेने देगा,आत्मनिरीक्षण करें।
कश्मीर पर जिन्होंने हमारा समर्थन किया उनका शुक्रिया,अन्य देश भी आतंकवाद पर अपनी राय स्पष्ट करें धर्म और मानवाधिकार के नाम पर इस तरह के कृत्यों को प्रोत्साहित करना विश्व के लिए विनाशकारी हो सकता है।

जय हिंद वन्दे मातरम्।
क्रमशः

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विपक्ष के नाम संदेश

मित्रो मैं विपक्ष की भावनाओं को समझ सकता हूँ,क्योंकि मैं भाजपा का समर्थक नहीं हूँ,परंतु इसका मतलब यह नहीं है कि उसके सही कार्यों को भी गलत सिद्ध करने का प्रयास करूँ यदि हमारा चिंतन और आचरण नकारात्मक होगा तभी ऐसा संभव है।हिंदू मुस्लिम और आपराधिक घटनायें,हिंसा,बलात्कार,जघन्य अपराध मनोवैज्ञानिक रूप से समाज को सामूहिक रूप से आक्रोशित करते हैं और सबसे आसान मार्ग है सनसनी फैला कर सामूहिक नकारात्मक माहौल तैयार कर सरकार को दबाव में लेकर वोट सरकार के खिलाफ डलवाने का ठीक है,सभी विपक्षी दल मुस्लिम वोट बैंक को आधार बनाकर बिना किसी विचारधारा के सत्तापक्ष को अपने अपने परिवार का इतिहास बताते हुए नीचे गिराना चाहते हैं,बुड़बक समझा है सबको या फिर मुस्लिम बाहुबल और वोटबैंक की दम पर उछल कूद कर रहे हो तुम सब राजनीति कर रहे हो या सर्कस का कौनो प्रोग्राम चला रहे हो।पहले ये चिंतन करो विपक्ष की दुर्गति क्यों हुयी आपकी अपनी गलतियों से आप पर भाजपा हावी क्यों हुयी क्योंकि उनकी विचारधारा हिन्दुत्व,राष्ट्रवाद,स्वदेशी आंदोलन,भ्रष्टाचार का जबरदस्त विरोध,परिपक्व नेतृत्व,अनुशासित संगठन इत्यादि पचासों सुनियोजित प्रबंधन की तकनीक और उसके बाद मोदी शाह जैसे प्रचारक और उनके पीछे समर्थन में हर तरह का व्यापारी तब जाकर आप सब की शानदार बारात निकाली है जनता का सहयोग लेते हुये,यही सत्य है।भैया विपक्षियों आप लोग क्या करते हो कोई भी कार्य हुआ बस विरोध करना है क्यों मुस्लिम वोटबैंक नाराज न हो जाये और हिन्दू संगठित न रह पाए अपनी अपनी जाति को संगठित रखना है तो सरकार का विरोध करना है,मूर्खों सरकार विरोध करते करते राष्ट्र का ही विरोध कर दिया नेतागिरी करोगे पुश्तैनी है अरे लाला की दुकान है क्या हर नयी पीढ़ी की नयी सोच नये सपने होते हैं तुम सबको एक ही डंडे से हांकने की सोच रहे हो,असंभव 2019 चल रहा है भाजपा की कार्यशैली को ही नये लड़के पसंद नहीं कर रहे हैं आप तो उन्हें 50 साल पीछे ले जा रहे हो,चिंतन और मनन करना सीखो नेतृत्व करना स्कूल में नहीं सीख सकते हो गुंडे,माफिया,व्यापारी, मीडिया आपको रिसोर्स दे सकते हैं नेतृत्व अपनी दम पर ही करना होगा नहीं कर सकते भाग जाओ मनोरंजन मत करो जनता का,अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष का मजाक बनवा दिया,देश चलायेंगे।

चलो ट्राई करो सकारात्मक विपक्ष बनने का कानून व्यवस्था के अलावा,सबसे महत्वपूर्ण कार्य शिक्षा और स्वास्थ्य हैं सत्तापक्ष के लिए जो सीधे आम जनता से जुड़े हैं और यदि आप विपक्ष में भी कुछ करते हैं सेवा से जुड़ा हुआ है अत्यंत लोकप्रियता मिलेगी।हम शिक्षा क्षेत्र को लेते हैं और सर्वे करिये कि क्या सरकारी स्कूल का बच्चा किसी अच्छे प्राईवेट स्कूल के बच्चे से प्रतिस्पर्धा कर सकता है कयों नहीं कर सकता है भाई उसका अधिकार है गरीब अमीर की शिक्षा समान होनी चाहिए,सुविधाएं भिन्न हो सकती हैं भैया अमीर का बच्चा है एसी कमरे में लेटे एक टीचर पढ़ाये गरीब को कोई दिक्कत नहीं होगी वह जमीन पर बैठ कर पढ़ लेगा लेकिन पुस्तक एक होनी चाहिए ताकि जब कॉम्पिटीशन में जाये तो वह भी प्रतिस्पर्धा कर सके।ज्ञान पर सबका अधिकार है,शिक्षा पर सबका अधिकार है सकारात्मक विपक्ष बनिए अत्यंत छोटा मुद्दा है,एक राष्ट्र एक ध्वज एक संविधान हो सकता है तो सभी के लिए समान शिक्षा क्यों नहीं हो सकती है।
मैं जानता हूँ  किसी माई के लाल विपक्ष में इतनी ताकत ही नहीं है कि ऐसा करने का साहस करे क्योंकि महात्मा गाँधी का नाम बेचकर तुम लोगों ने ही गंदगी की है,सारे प्राईवेट स्कूल ही तुम्हारे हैं बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ने जायेंगे शिक्षक वहाँ अधिक योग्य हैं वह तुम्हें हजम नहीं होगा, अधिकतम स्कूल ही नेताओं के हैं।
फिर भी प्रयास करो सकारात्मक विपक्ष बनने का शायद कल्याण हो जाये।

जय हिंद वन्दे मातरम्।
सुधीर तिवारी
क्रमशः


6)
अब चलते हैं कश्मीर मित्रो बहुत बड़ा खूबसूरत और सुन्दर स्वर्ग से तुलना कर सकते हैं हमारी भारत माता का मुकुट है कश्मीर और जम्मू राज्य जिसके एक छोटे से क्षेत्र  में 2 या 3 जिले मान लीजिए आतंकवाद है दक्षिण कश्मीर है शायद मुस्लिम बहुल आबादी है वहां पाकिस्तान की गन्दी सियासत में इस्लाम के नाम पर अय्याशी और रूपये के लिए वहां से कई वर्षों पहले हमारे हिन्दू भाईयों को भगा दिया वह सब वहां समृद्ध थे जमीनें मकान कब्जा कर लिए या सस्ते दामों में खरीद लिए अब्दुल्लाह परिवार हरामखोर परिवार अपनी राजनीति के लिए विदेशी एजेंट का काम करते हुये आतंकवाद को हवा देता रहा अरे भैया जैसे अपने यूपी में नेताओं के चमचे गुंडे भैया होते हैं वहां ज्यादा हैं।इसका मतलब तुम हमारे कश्मीरी पंडितो को भगा दोगे वहां से वो भी सिर्फ इसलिए कि तुम्हारी संख्या ज्यादा है,हमारे जवानों को मार दोगे और हम भारत माता की जय कहेंगे और शांत हो जायेंगे हमें लड़ना नही आता है ऐसी बात नहीं है हमें अपनी सेना और नेतृत्व पर अभी विश्वास है अन्यथा हमारा इतिहास ही युद्ध है रामायण,महाभारत।अब आप सियासत वाली बात करोगे कि कश्मीरी पंडित हैं इसलिए उनकी बात कर रहे हो आप रावण हो हां मैं रावण हूँ काम,क्रोध,मद,लोभ,दम्भ इत्यादि मेरे दस सिर हैं जो असुरता होनी चाहिए सारी असुरता मुझमें लेकिन मैनें सीता माता का अपहरण नहीं किया अतः मेरी लड़ाई राम से नहीं है मैं असुरों में सर्वोच्च दशानन हूँ और तुम्हें पता है आतंकवादीओं मेरा एक भाई मुझसे भी बलशाली असुर वही अमेरिका का राजा है हाहाहा मैं दशानन हूँ आतंकवादीओ अपने आका पाकिस्तान को बता दो एक भाई और है दशानन का शतानन जो इस ब्रह्मांड के अलावा दूसरे ब्रह्मांड में है जिसे भगवान् श्रीराम भी नहीं मार पाये थे माता सीता को चंडी रूप धारण करना पड़ा था।नासा वाले भविष्य में खोजेंगे उसे हां मैं रावण हूँ जो उखाडना है वो उखाड़ लो मैनें सीता का अपहरण नहीं किया😂😂😂मित्रो हमारे ग्रन्थों के अनुसार हम सब शिव पार्वती की सन्तान हैं पार्वती मां प्रकृति है और जो शिवलिंग है वह ब्रह्मांड है अर्थात इस ब्रह्मांड में हमारी उत्पत्ति प्रकृति के द्वारा हुई है अतः समस्त विश्व में प्रकृति को सम्मान से देखा जाता है हमारे ग्रन्थों के अनुसार समस्त सृष्टि सप्त ॠषियों की संतान हैं समस्त विश्व में उन में एक ऋषि धे कश्यप ऋषि जो एक मात्र राजा थे ऋषिकुल में वह कश्मीर क्षेत्र के ही राजा था उनकी 13 रानियां थीं उन्हीं की 42वीं पीढी में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था और मेरा गोत्र कश्यप है और एकमात्र ऐसा गोत्र है वैदिक धर्म में यदि किसी को अपना गोत्र न पता हो तो वह कश्यप गोत्र वैदिक मंत्रो के साथ धारण कर सकता है अतः हम भगवान राम के वास्तविक वंशज हुये तो असुरों के लिए दशानन और देवताओं के लिए राम के वंशज सियासत मत करिए जातिवाद पर ये राम और रावण नहीं लडेंगे वरन असुरों को असुरों से लड़ायेंगे और देवताओं को देवताओं से मिलवायेंगे।भाईयो जनसंख्या बढ़ गयी है देवासुर संग्राम की आवश्यकता नहीं हैं।उपरोक्त लेख जातिवादी सियासत के सन्दर्भ में मुझे सर्वोच्च गर्व है कि परम पिता परमात्मा ने अनन्त जीवों में मुझे मनुष्य बनाया अपने जैसा कि मैं एक अच्छा इंसान बनके रचनात्मक कार्य करते हुए जीवन यात्रा सम्पन्न करूं।

जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः

Wednesday, 4 September 2019

राजनीति नक्सलवाद 3

1)


राजनीति पारदर्शिता

मित्रो पिछले लेखों में हमने राष्ट्रीय समस्या जातिवाद पर विभिन्न तथ्यों को आधार बनाकर विश्लेषण किया अब समस्या का हल तो हमारे राजनेता और धर्मगुरु ही कर सकते हैं मैं सिर्फ यह कह सकता हूँ कि जातिवाद की समस्या का समाधान किये बगैर राष्ट्रीय एकता,समता की बात करना छलावा मात्र है।अब हम दूसरी राष्ट्रीय समस्या जिसका आकर और क्षेत्र धीरे धीरे बढ़ता जा रहा है और राजनीतिक दलों के लिए चुनावी हथियार बनता जा रहा है वह है नक्सलवाद मित्रो नक्सलवाद क्या है कम्युनिस्ट विचारधारा के लोंगो का सत्तापक्ष के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष ही नक्सलवाद है इसमें गरीबों के दिमाग में जमींदार और सरकार के खिलाफ जहर भरना है,लो जी भोले भाले गरीबो आपको लोकतंत्र में स्वतंत्रता मिली किसलिए आप से कोई मुफ्त काम नहीं करा सकता,आप समान शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं आप व्यापार कर सकते हैं आप गलत का विरोध कर सकते हैं आपने क्या किया पहले संगठित हुये फिर जिसने ये अधिकार आपको दिलाये उन्हीं का विरोध करने लगे खिलाड़ियों ने देखा ये तो मूर्ख हैं जहां सरकार में आपको प्रधान,ब्लाक प्रमुख,विधायक ,पुलिस मतलब आपको सरकार बनना था इसलिए स्वतंत्रता मिली आपनी बंदूक पकड़ी और आपका अधिकार दूसरों ने लिया आपको नक्सलवादी बना के अपराधी बना दिया आप शतप्रतिशत मूर्ख बना दिये गये बुद्धिजीवी लोगों के द्वारा और अब सालों तक राजनैतिक इस्तेमाल किये जाओगे।तुम खून किसका बहाते हो अपने भाईयों का अरे मूर्खों वो जवान भी गांवों के बच्चे हैं तुम्हारी तरह अभी तुम्हारा धर्म भी बदल के उल्टा पुलटा कुछ सिखा दिया जायेगा तुम सब प्रकृति के पुजारी हो शिव पार्वती की संतानों अपने अस्तित्व को पहचानो हथियार छोड़ो,हिंसा छोड़ो देश की मुख्य धारा से जुड़ो अन्यथा चुनाव के वक्त ऐसे ही इस्तेमाल होते रहोगे अभी तुम्हारे यहां लोग आने से डरते हैं सुधर जाओगे तो रोजगार बढ़ेगा टूरिज्म बढ़ेगा दुनियां कहां पहुंच गयी और तुमने क्या छवि बनायी वहां मत जाना नक्सली क्षेत्र है खतरा है कब तक पूंजीपति और राजनैतिक लोग तुम्हारा शोषण करेंगे जब तुम गलती ही नहीं करोगे तो टीवी पर बदनाम कैसे करेंगे प्रकृति की पूजा करो अनुशासित बनो।यदि अपनी छवि सुधारनी है तो सबसे पहले आत्मसमर्पण करो आगे हिंसा न करो सुरक्षा बलों का सहयोग करो बहुत सरकार योजनायें है आपको लाभ ही लाभ होगा।मित्रो हमारा देश अति प्राचीन व्यवस्था होने के नाते साम्यवाद सम्भव ही नहीं है सिर्फ विवाद और हिंसा होगी यदि इस तरह के प्रयास किये गये,हमारे देश में परम्परागत राजनीति और आधुनिक राजनीति में व्यवहारिक सामंजस्य और संतुलन ही हमें सही दिशा में ले जायेगा।सबसे मजेदार बात यह है कि विकास का सिद्धांत हमें आगे बढ़ने को प्रेरित करता है पर हमारे देश में राजनीतिक दल विचारधारा पर काम न करके समस्या को बढ़ावा देकर उसे प्रचार-प्रसार कर चुनावी मुद्दे बनाकर चुनाव लडते हैं समाधान का प्रपोजल और लक्ष्य किसी के घोषणापत्र में नहीं होता है।चुनावी प्रचार और घोषणापत्र उत्तर दक्षिण दिशा की तरह होते हैं मतदाता को कौन कितना अधिक उत्तेजित और संगठित कर लेता है इस बात की प्रतिस्पर्धा रहती है खैर।नक्सलवाद से मिलती जुलती समस्या को हमने बहुत करीब से देखा है,हमारा क्षेत्र चम्बल रेंज के अति करीब गंगा और यमुना के बीच में है,मेरे निवास से मात्र 30 किमी दूरी पर यमुना में चार नदियां मिलती हैं जिनमें एक चम्बल भी है अतः जंगल बहुत है चम्बल क्षेत्र वर्तमान में राजस्थान,मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश में विस्तारित है।मुगल सल्तनत की राजधानी आगरा भी करीब है अकबर के नवरत्नों में से एक राजा बीरबल उर्फ पांडे जी हमारे क्षेत्र के ही थे अत्यधिक खुराफाती होने की वजह से उन्हें मरवा दिया गया था हमें गर्व है उन्होंने निश्चित खूंटा सही जगह लगाया होगा।निष्कर्ष यह है कि प्रारंभ से आज तक हमारे क्षेत्र में कुछ अधिक उग्र और क्रान्तिकारी स्वभाव के लोग हैं आज भी भारतीय सेना की सभी शाखाओं में पर्याप्त संख्या में अपनी सेवायें दे रहे हैं तो स्वाभाविक है अंग्रेज सरकार में कैसे पीछे रहते तो नक्सलवाद की तरह हमारे क्षेत्र में प्रारम्भ किया युवाओं ने बागी होना अंग्रेज सरकार के हथियार लूटना और फिर उनको ठोकना उन्हें नाम दिया गया बागी बाद में वही डाकू कहे गये बहुत उच्च नैतिक स्तर पर अपना कार्य करते थे बस कानून को नहीं मानते थे।देश को आजादी मिली वही चीज फैशन बन गयी गुस्से में कोई घटना हो गयी जेल कौन जाये बागी बन जाते हैं डाकू बन उद्देश्य से भटक गये नैतिक स्तर गिर गया संत विनोबा भावे आये एक आन्दोलन चलाया बहुतों ने आत्मसमर्पण किया सड़क निर्माण इत्यादि विकास कार्य हुये।चम्बल क्षेत्र में काफी हद तक शान्ति स्थापित हुई जनता शिक्षित हुई।

जय हिंद वन्दे मातरम् ।
सुधीर तिवारी
क्रमशः


2)
 संत विनोबा भावे के प्रयासों और परिश्रम से बागियों ने आत्मसमर्पण किया सभी राज्यों की पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाये और चम्बल क्षेत्र से बागी इतिहास बन गये परंतु दुर्भाग्य उसी दौरान जातिवादी राजनीति का उदय हो रहा था हिंसा और अपराध समाज का हिस्सा है पर यदि उसे संरक्षण प्राप्त हो जाये तो तो अच्छे ढंग से फलती फूलती है और चम्बल क्षेत्र में डकैतों को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त हो गया धीरे धीरे वो बड़े गिरोह बन कर पुनः सक्रिय हुए और समाज में भय व्याप्त कर चुनावी फरमान जारी करने लगे बागी के स्थान पर डकैत बन गये जब क्षेत्रीय विरोध और प्रशासनिक दबाव बढ़ने लगा तो उन्होंने बाहर से अपहरण के कार्य शुरू किये और अपहरण को एक उद्योग के रूप में स्थापित किया अत्यधिक ताकतवर होने पर संरक्षण देने वालों से ही भिड़ गये अन्ततः पुलिस को खुली छूट दी गयी और मात्र कुछ महीनों में ही सभी मारे गये सबसे महत्वपूर्ण खुली छूट मिलना सुरक्षा बलों को जेबकतरे से आतंकवादी तक सब पता है कैसे समाप्त करना है उन्हें खुली छूट नहीं है उल्टा अपराधियों को छूट रहती है।अब हमारे यहां चम्बल क्षेत्र में बहुत अच्छी खेती और पशुपालन का कार्य होता है समृद्ध है शान्ति है कोई चुनावी फरमान नहीं होते हैं नक्सलवाद का एक छोटा सा रूप और उसका अन्त उसका राजनीतिक प्रयोग हमने स्वयं देखा है।दूसरा छोटा नक्सलवाद और पूंजीवाद और राजनीति का उदहारण भी हमारे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश बार्डर पर बांदा जिले में कई वर्षों से हैं वहां एक ददुआ डकैत के नाम से एक प्रसिद्ध थे उनका एक गिरोह था भैया उस क्षेत्र में जंगल में जो पेड़ हैं उनके पत्ते से ही बीड़ी बनती है वहां पर कोई न कोई गिरोह हमेशा सक्रिय रहता हैंं क्यों रहता है करोड़ो का व्यापार है बीड़ी और तम्बाकू का मोनोपोली के लिए प्रतिस्पर्धी न हों और जब चुनाव आये तो फरमान से वोट पड़ जाये भय से दो काम हो गये एक तीर से दो निशाने हो गये इसको हमारे यूपी में कहते हैं माफिया,बाहुबली इत्यादि जिसे उल्टा लटकाने का वादा माननीय गृहमंत्री ने यूपी की जनता से किया है।इसी सुव्यवस्थित और सुसंगठित रूप है नक्सलवाद जिसमें सबसे अधिक हमारे आदिवासी समाज का प्रयोग किया जाता है।

जय हिंद वन्दे मातरम् ।
सुधीर तिवारी
क्रमशः

3)
मित्रो पिछले लेखों में हम राष्ट्रीय समस्या नक्सलवाद पर चिंतन कर रहे थे,जिसमें हमने नक्सलवाद का अत्यंत छोटा रूप चम्बल और बुंदेलखंड के ददुआ को केंद्र बनाकर समझा था।इसी का अत्यंत बड़ा रूप देश में कई राज्यों में फैल चुका है।वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की समस्या पर हमारी सरकार ने पूर्ण पारदर्शी नीति जीरो टॉलरेंस ऑन टेररिज्म अपनायी और परिणाम सामने दिखने लगे हैं,यही पारदर्शिता की ताकत है आपको अपार जनसमर्थन मिलता है और आम जनता का आत्मविश्वास दृढ़ होता है,उसमें देशभक्ति की भावना बढ़ेगी।मजबूत सरकार इसी रणनीति का हिस्सा है और जनता का विश्वास पारदर्शिता से ही जीता जा सकता है,नेतृत्व समस्या का समाधान किस तरीके से और कितनी त्वरित गति से करता है खैर 70 वर्ष पुरानी समस्याओं का अत्यधिक राजनैतिक प्रयोग करते हुए नेतृत्व समाधान की ओर कदम बढ़ा रहा अत्यंत प्रसन्नता की बात है।कश्मीर समस्या हल होने से हिंदु और मुस्लिम सभी के जीवन में अमन,शांति बहाल होगी और वहाँ की आम जनता देश की मुख्य धारा से जुड़ेगी,विकास कार्य होंगे सब अच्छा ही होगा,मित्रो बीमारी पुरानी है अतः इलाज में दर्द भी अधिक होगा धैर्य बनाये रखें राष्ट्रीय एकता और अखंडता और आत्मसम्मान की बात है।हमें सावधानी कहां रखनी लुटेरों पर कारगिल युद्ध में काॅफीन घोटाला कर लिया था अतः विशेष रूप से सजग रहना होगा बड़ा ऑपरेशन है धूर्त अपनी हरकतों से बाज नहीं आयेंगे उधर हमारी सेना देश की रक्षा कर रही होगी इधर भ्रष्ट लूट मचा रहे होंगे इसीलिए हर जगह शतप्रतिशत पारदर्शिता आवश्यक है।सभी सरकारी संस्थानों को ऐसी स्थितियों में विशेष सक्रिय होना चाहिए क्योंकि मीडिया का सारा फोकस एक जगह केंद्रित हो जाता है।ठीक है😂

जय हिंद,वंदे मातरम्।
क्रमशः