Wednesday, 25 September 2019

गाँधीवाद,धर्म और स्वतंत्रता आंदोलन 1

सत्य,प्रेम और अहिंसा
मित्रो महात्मा गाँधी केवल व्यक्ति नहीं एक आधुनिक दर्शन हैं और उनका दर्शन सत्य,प्रेम और अहिंसा पर आधारित है।एक साधारण व्यक्ति से महात्मा तक की यात्रा तय करने में उन्होंने जो स्वयं के साथ प्रयोग किए इसलिए मोहनदास करमचंद गाँधी व्यक्ति से गाँधी दर्शन बन गये और जननायक बनकर हमारे स्वतंत्रता आंदोलन को अंतिम मुकाम तक पहुंचाया।

सत्यम शिवम सुंदरम हमारे भारतीय दर्शन मे सत्य को ही ईश्वर बताया गया है।वेद,उपनिषद्, पुराण,श्रीमद्भगवद्गीता हर धार्मिक ग्रन्थ और हर धर्मगुरू ने सत्य को सर्वोपरि माना है।महात्मा गाँधी जी का लक्ष्य स्वतंत्रता आंदोलन को सही दिशा देना था अतः उन्होंने सत्य के मार्ग को अपनाया और स्वयं सत्यमार्गी बने और हमारे धर्म को आधार बनाकर नेतृत्व किया और सफल हुए।
प्रेम शब्द से तो पशु भी परिचित हैं,हम तो मनुष्य हैं तो मित्रो जीवन में बिना इस दर्शन के कोई भी चल ही नहीं सकता और महात्मा गाँधी जी को सारे देश की जनता को आजादी के लिए मानसिक रूप से संगठित करना था तो उन्होंने प्रेम को चुना यदि वह कहते अंग्रेजो से नफरत करो तो शायद सबको संगठित नहीं कर पाते।पूर्ण सकारात्मक सोच किसी भी कार्य की सफलता का मूल आधार सोच होती है।अतः गाँधी दर्शन बन गया😊
अहिंसा परमो धर्म:,धर्मम हिंसा तदैव च।श्रीमद्भगवद्गीता का श्लोक है अर्थात अहिंसा परम धर्म है परंतु धर्म की रक्षा के लिए हिंसा उचित है।महात्मा गाँधीजी ने आधा श्लोक लिया क्योंकि स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी जिम्मेदारी जनांदोलन खड़ा करने की थी,सारी जनता को संगठित करने की थी और साथ में यह भी जिम्मेदारी नेतृत्व की होती है कि कम से कम निर्दोष व्यक्तियों का बलिदान हो आखिर सरकार से लड़ना है।आधा श्लोक नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने लिया और हमारे स्वतंत्रता आंदोलन को सफल कराया और अपनी जिम्मेदारी को अत्यंत जिम्मेदारी से निभाया।
हमारे स्वतंत्रता आंदोलन का हर क्रांतिकारी नायक था और महानायक थे परमपूजनीय महात्मा गाँधी और नेताजी सुभाषचंद्र बोस दोनों ने धर्म का कार्य किया देश की रक्षा से बड़ा कोई धर्म हो ही नहीं सकता है।
मोहनदास करमचंद गाँधी ने प्राचीन भारतीय धार्मिक दर्शन के तत्व दर्शन को व्यक्तिगत जीवन में आत्मसात कर तीन आंदोलन चलाये प्रथम सविनय अवज्ञा आंदोलन,द्वितीय असहयोग आंदोलन और तीसरा भारत छोड़ो आंदोलन समानांतर अंग्रेज सरकार पर हिंसक हमले और आजाद हिंद फौज का दबाव साथ ही अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिस्थितियां
हमें आजादी दिलवाने में सहयोगी बनीं अंततः महात्मा गाँधी की उपाधि से नवाजा गया।
जय हिंद वन्दे मातरम्।
सुधीर तिवारी
क्रमशः

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