Wednesday, 4 September 2019

राजनीति नक्सलवाद 3

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राजनीति पारदर्शिता

मित्रो पिछले लेखों में हमने राष्ट्रीय समस्या जातिवाद पर विभिन्न तथ्यों को आधार बनाकर विश्लेषण किया अब समस्या का हल तो हमारे राजनेता और धर्मगुरु ही कर सकते हैं मैं सिर्फ यह कह सकता हूँ कि जातिवाद की समस्या का समाधान किये बगैर राष्ट्रीय एकता,समता की बात करना छलावा मात्र है।अब हम दूसरी राष्ट्रीय समस्या जिसका आकर और क्षेत्र धीरे धीरे बढ़ता जा रहा है और राजनीतिक दलों के लिए चुनावी हथियार बनता जा रहा है वह है नक्सलवाद मित्रो नक्सलवाद क्या है कम्युनिस्ट विचारधारा के लोंगो का सत्तापक्ष के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष ही नक्सलवाद है इसमें गरीबों के दिमाग में जमींदार और सरकार के खिलाफ जहर भरना है,लो जी भोले भाले गरीबो आपको लोकतंत्र में स्वतंत्रता मिली किसलिए आप से कोई मुफ्त काम नहीं करा सकता,आप समान शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं आप व्यापार कर सकते हैं आप गलत का विरोध कर सकते हैं आपने क्या किया पहले संगठित हुये फिर जिसने ये अधिकार आपको दिलाये उन्हीं का विरोध करने लगे खिलाड़ियों ने देखा ये तो मूर्ख हैं जहां सरकार में आपको प्रधान,ब्लाक प्रमुख,विधायक ,पुलिस मतलब आपको सरकार बनना था इसलिए स्वतंत्रता मिली आपनी बंदूक पकड़ी और आपका अधिकार दूसरों ने लिया आपको नक्सलवादी बना के अपराधी बना दिया आप शतप्रतिशत मूर्ख बना दिये गये बुद्धिजीवी लोगों के द्वारा और अब सालों तक राजनैतिक इस्तेमाल किये जाओगे।तुम खून किसका बहाते हो अपने भाईयों का अरे मूर्खों वो जवान भी गांवों के बच्चे हैं तुम्हारी तरह अभी तुम्हारा धर्म भी बदल के उल्टा पुलटा कुछ सिखा दिया जायेगा तुम सब प्रकृति के पुजारी हो शिव पार्वती की संतानों अपने अस्तित्व को पहचानो हथियार छोड़ो,हिंसा छोड़ो देश की मुख्य धारा से जुड़ो अन्यथा चुनाव के वक्त ऐसे ही इस्तेमाल होते रहोगे अभी तुम्हारे यहां लोग आने से डरते हैं सुधर जाओगे तो रोजगार बढ़ेगा टूरिज्म बढ़ेगा दुनियां कहां पहुंच गयी और तुमने क्या छवि बनायी वहां मत जाना नक्सली क्षेत्र है खतरा है कब तक पूंजीपति और राजनैतिक लोग तुम्हारा शोषण करेंगे जब तुम गलती ही नहीं करोगे तो टीवी पर बदनाम कैसे करेंगे प्रकृति की पूजा करो अनुशासित बनो।यदि अपनी छवि सुधारनी है तो सबसे पहले आत्मसमर्पण करो आगे हिंसा न करो सुरक्षा बलों का सहयोग करो बहुत सरकार योजनायें है आपको लाभ ही लाभ होगा।मित्रो हमारा देश अति प्राचीन व्यवस्था होने के नाते साम्यवाद सम्भव ही नहीं है सिर्फ विवाद और हिंसा होगी यदि इस तरह के प्रयास किये गये,हमारे देश में परम्परागत राजनीति और आधुनिक राजनीति में व्यवहारिक सामंजस्य और संतुलन ही हमें सही दिशा में ले जायेगा।सबसे मजेदार बात यह है कि विकास का सिद्धांत हमें आगे बढ़ने को प्रेरित करता है पर हमारे देश में राजनीतिक दल विचारधारा पर काम न करके समस्या को बढ़ावा देकर उसे प्रचार-प्रसार कर चुनावी मुद्दे बनाकर चुनाव लडते हैं समाधान का प्रपोजल और लक्ष्य किसी के घोषणापत्र में नहीं होता है।चुनावी प्रचार और घोषणापत्र उत्तर दक्षिण दिशा की तरह होते हैं मतदाता को कौन कितना अधिक उत्तेजित और संगठित कर लेता है इस बात की प्रतिस्पर्धा रहती है खैर।नक्सलवाद से मिलती जुलती समस्या को हमने बहुत करीब से देखा है,हमारा क्षेत्र चम्बल रेंज के अति करीब गंगा और यमुना के बीच में है,मेरे निवास से मात्र 30 किमी दूरी पर यमुना में चार नदियां मिलती हैं जिनमें एक चम्बल भी है अतः जंगल बहुत है चम्बल क्षेत्र वर्तमान में राजस्थान,मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश में विस्तारित है।मुगल सल्तनत की राजधानी आगरा भी करीब है अकबर के नवरत्नों में से एक राजा बीरबल उर्फ पांडे जी हमारे क्षेत्र के ही थे अत्यधिक खुराफाती होने की वजह से उन्हें मरवा दिया गया था हमें गर्व है उन्होंने निश्चित खूंटा सही जगह लगाया होगा।निष्कर्ष यह है कि प्रारंभ से आज तक हमारे क्षेत्र में कुछ अधिक उग्र और क्रान्तिकारी स्वभाव के लोग हैं आज भी भारतीय सेना की सभी शाखाओं में पर्याप्त संख्या में अपनी सेवायें दे रहे हैं तो स्वाभाविक है अंग्रेज सरकार में कैसे पीछे रहते तो नक्सलवाद की तरह हमारे क्षेत्र में प्रारम्भ किया युवाओं ने बागी होना अंग्रेज सरकार के हथियार लूटना और फिर उनको ठोकना उन्हें नाम दिया गया बागी बाद में वही डाकू कहे गये बहुत उच्च नैतिक स्तर पर अपना कार्य करते थे बस कानून को नहीं मानते थे।देश को आजादी मिली वही चीज फैशन बन गयी गुस्से में कोई घटना हो गयी जेल कौन जाये बागी बन जाते हैं डाकू बन उद्देश्य से भटक गये नैतिक स्तर गिर गया संत विनोबा भावे आये एक आन्दोलन चलाया बहुतों ने आत्मसमर्पण किया सड़क निर्माण इत्यादि विकास कार्य हुये।चम्बल क्षेत्र में काफी हद तक शान्ति स्थापित हुई जनता शिक्षित हुई।

जय हिंद वन्दे मातरम् ।
सुधीर तिवारी
क्रमशः


2)
 संत विनोबा भावे के प्रयासों और परिश्रम से बागियों ने आत्मसमर्पण किया सभी राज्यों की पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाये और चम्बल क्षेत्र से बागी इतिहास बन गये परंतु दुर्भाग्य उसी दौरान जातिवादी राजनीति का उदय हो रहा था हिंसा और अपराध समाज का हिस्सा है पर यदि उसे संरक्षण प्राप्त हो जाये तो तो अच्छे ढंग से फलती फूलती है और चम्बल क्षेत्र में डकैतों को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त हो गया धीरे धीरे वो बड़े गिरोह बन कर पुनः सक्रिय हुए और समाज में भय व्याप्त कर चुनावी फरमान जारी करने लगे बागी के स्थान पर डकैत बन गये जब क्षेत्रीय विरोध और प्रशासनिक दबाव बढ़ने लगा तो उन्होंने बाहर से अपहरण के कार्य शुरू किये और अपहरण को एक उद्योग के रूप में स्थापित किया अत्यधिक ताकतवर होने पर संरक्षण देने वालों से ही भिड़ गये अन्ततः पुलिस को खुली छूट दी गयी और मात्र कुछ महीनों में ही सभी मारे गये सबसे महत्वपूर्ण खुली छूट मिलना सुरक्षा बलों को जेबकतरे से आतंकवादी तक सब पता है कैसे समाप्त करना है उन्हें खुली छूट नहीं है उल्टा अपराधियों को छूट रहती है।अब हमारे यहां चम्बल क्षेत्र में बहुत अच्छी खेती और पशुपालन का कार्य होता है समृद्ध है शान्ति है कोई चुनावी फरमान नहीं होते हैं नक्सलवाद का एक छोटा सा रूप और उसका अन्त उसका राजनीतिक प्रयोग हमने स्वयं देखा है।दूसरा छोटा नक्सलवाद और पूंजीवाद और राजनीति का उदहारण भी हमारे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश बार्डर पर बांदा जिले में कई वर्षों से हैं वहां एक ददुआ डकैत के नाम से एक प्रसिद्ध थे उनका एक गिरोह था भैया उस क्षेत्र में जंगल में जो पेड़ हैं उनके पत्ते से ही बीड़ी बनती है वहां पर कोई न कोई गिरोह हमेशा सक्रिय रहता हैंं क्यों रहता है करोड़ो का व्यापार है बीड़ी और तम्बाकू का मोनोपोली के लिए प्रतिस्पर्धी न हों और जब चुनाव आये तो फरमान से वोट पड़ जाये भय से दो काम हो गये एक तीर से दो निशाने हो गये इसको हमारे यूपी में कहते हैं माफिया,बाहुबली इत्यादि जिसे उल्टा लटकाने का वादा माननीय गृहमंत्री ने यूपी की जनता से किया है।इसी सुव्यवस्थित और सुसंगठित रूप है नक्सलवाद जिसमें सबसे अधिक हमारे आदिवासी समाज का प्रयोग किया जाता है।

जय हिंद वन्दे मातरम् ।
सुधीर तिवारी
क्रमशः

3)
मित्रो पिछले लेखों में हम राष्ट्रीय समस्या नक्सलवाद पर चिंतन कर रहे थे,जिसमें हमने नक्सलवाद का अत्यंत छोटा रूप चम्बल और बुंदेलखंड के ददुआ को केंद्र बनाकर समझा था।इसी का अत्यंत बड़ा रूप देश में कई राज्यों में फैल चुका है।वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की समस्या पर हमारी सरकार ने पूर्ण पारदर्शी नीति जीरो टॉलरेंस ऑन टेररिज्म अपनायी और परिणाम सामने दिखने लगे हैं,यही पारदर्शिता की ताकत है आपको अपार जनसमर्थन मिलता है और आम जनता का आत्मविश्वास दृढ़ होता है,उसमें देशभक्ति की भावना बढ़ेगी।मजबूत सरकार इसी रणनीति का हिस्सा है और जनता का विश्वास पारदर्शिता से ही जीता जा सकता है,नेतृत्व समस्या का समाधान किस तरीके से और कितनी त्वरित गति से करता है खैर 70 वर्ष पुरानी समस्याओं का अत्यधिक राजनैतिक प्रयोग करते हुए नेतृत्व समाधान की ओर कदम बढ़ा रहा अत्यंत प्रसन्नता की बात है।कश्मीर समस्या हल होने से हिंदु और मुस्लिम सभी के जीवन में अमन,शांति बहाल होगी और वहाँ की आम जनता देश की मुख्य धारा से जुड़ेगी,विकास कार्य होंगे सब अच्छा ही होगा,मित्रो बीमारी पुरानी है अतः इलाज में दर्द भी अधिक होगा धैर्य बनाये रखें राष्ट्रीय एकता और अखंडता और आत्मसम्मान की बात है।हमें सावधानी कहां रखनी लुटेरों पर कारगिल युद्ध में काॅफीन घोटाला कर लिया था अतः विशेष रूप से सजग रहना होगा बड़ा ऑपरेशन है धूर्त अपनी हरकतों से बाज नहीं आयेंगे उधर हमारी सेना देश की रक्षा कर रही होगी इधर भ्रष्ट लूट मचा रहे होंगे इसीलिए हर जगह शतप्रतिशत पारदर्शिता आवश्यक है।सभी सरकारी संस्थानों को ऐसी स्थितियों में विशेष सक्रिय होना चाहिए क्योंकि मीडिया का सारा फोकस एक जगह केंद्रित हो जाता है।ठीक है😂

जय हिंद,वंदे मातरम्।
क्रमशः

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