Thursday, 23 January 2020

धर्म और राजनीति 8

धर्म और राजनीति 8
भारत संवैधानिक रूप से धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है,यह संविधान की मूलभूत संरचना में लिखा है जहाँ तक बाद में जोड़ा गया है क्योंकि बंटवारा धार्मिक आधार पर हुआ था।परंतु यह कोई विवाद का विषय नहीं है,वर्तमान में समस्त विश्व एक हो चुका है केवल चंद घंटों में आप कहीं भी पहुंच सकते हैं अर्थात वैश्वीकरण हो गया हैं एवं हम एक नयी दुनिया की ओर जा रहे हैं।भविष्य के 50 वर्षों में शायद शिक्षा और समृद्धि से हर व्यक्ति के लिए समस्त दुनियां एक हो जाए अतः भाषा,रंग,धर्म,पहनावा सबके अलग होंगे परंतु प्रतिबंधित कोई नहीं कर पायेगा😁जिसे जो पसंद होगा अपने मानसिक स्तर और पसंद के अनुसार अपनाएगा यही सत्य है,प्यार से स्वीकार करो तो ठीक है अन्यथा महाकाल का पहिया तो रूकने वाला नहीं है।
परिवर्तन प्रकृति का नियम है☺
धर्मनिरपेक्षता आखिर है क्या?भारत कभी धर्मनिरपेक्ष रहा ही नहीं है फिर भी भारतीय संविधान में 42 वें अनुच्छेद को संशोधित कर भारतीय धर्मनिरपेक्षता को तुष्टिकरण की राजनीति और एक भ्रामक रूप दिया गया और यह महान कार्य 1976 में हुआ,जातियों में बंटे हिंदू समाज को अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक के खेल में भ्रमित किया गया पूर्ण गलत कार्य हुआ और इसी को बचाने के लिए सड़क पर नौटंकी चल रही है।
Secularism in India
This article may be unbalanced towards certain viewpoints. Please improve the articleby adding information on neglected viewpoints, or discuss the issue on the talk page(December 2017)
With the Forty-second Amendment of the Constitution of India enacted in 1976,[1] the Preamble to the Constitution asserted that India is a secular nation.[2][3] Officially, secularism has always inspired modern India.[2] In practice, unlike Western notions of secularism, India's secularism does not separate religion and state.[2] The Indian Constitution has allowed extensive interference of the state in religious affairs.[4]
India does partially separate religion and state. For example, it does not have an official state religion and state-owned educational institutions cannot impart religious instructions.[5] In matters of law in modern India, however, the applicable code of law is unequal, and India's personal laws – on matters such as marriage, divorce, inheritance, alimony – varies with an individual's religion.[6][7] Muslim Indians have Sharia-based Muslim Personal Law, while Hindu, Christian and Sikh Indians live under common law. The Indian Constitution permits partial financial support for religious schools, as well as the financing of religious buildings and infrastructure by the state.[8] The Islamic Central Wakf Council and many Hindu temples of great religious significance are administered and managed by the Indian government.[7][9] The attempt to respect unequal, religious law has created a number of issues in India such as acceptability of child marriage,[10] polygamy, unequal inheritance rights, extra judicial unilateral divorce rights favorable to some males, and conflicting interpretations of religious books.[11][12]
Secularism as practiced in India, with its marked differences with Western practice of secularism, is a controversial topic in India. Supporters of the Indian concept of secularism claim it respects "minorities and pluralism". Critics claim the Indian form of secularism as "​pseudo-secularism​".​[2]​[13]Supporters state that any attempt to introduce a uniform civil code, that is equal laws for every citizen irrespective of his or her religion, would impose majoritarian Hindu sensibilities and ideals.[14][7] Critics state that India's acceptance of Sharia and religious laws violates the principle of Equality before the law.[15][16]
वास्तविक रूप से सेकुलरिज्म एक पाश्चात्य शब्द है।
हम धर्मनिरपेक्ष हैं,हमें स्वीकार है परंतु पूर्ण धर्मनिरपेक्षता पाश्चात्य रूप में लागू करिए अर्थात् धर्म और राजनीति पूर्णतयः अलग अलग अथवा सर्वधर्म समभाव रखिए वर्तमान संशोधित धर्मनिरपेक्षता भी एक विवाद का कारण बनता है।
सम्पूर्ण भारत में कोई भी व्यक्तिगत रूप से भी धर्मनिरपेक्ष नहीं मिलेगा,संशोधित धर्मनिरपेक्षता का प्रयोग ईसाई धर्मांतरण और मुस्लिम चरमपंथी संगठन निजी स्वार्थों के लिए करते हैं।
सुधर जाओ तो ठीक है अन्यथा हम तो कन्नौज के राजा हैं😁😂
जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
विश्व शांति भारत ट्रस्ट

Sunday, 12 January 2020

धर्म और राजनीति 7

धर्म और राजनीति 7
मित्रो पिछले लेखों में हमने एक निष्कर्ष निकाल लिया था कि धर्म में राजनीति अनुचित है।अब हम पहले वर्तमान स्वरूप देश में जिस तरह की राजनीति का चल रहा है उसे एक सामान्य दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करते हैं और केन्द्र राष्ट्रीय राजनीति को रखते हैं वस्तुतः बिना नीति के आप जीवन की डगर नहीं चल सकते हैं एक घर की व्यवस्था भी राजनीति से ही संचालित होती हैं, पूर्ण व्यवहारिक सत्य है।
हमारे देश में लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था द्वारा शासन-प्रशासन न्याय इत्यादि संचालित है यह हम सबके लिए अत्यंत गौरव की बात है।
विगत समय बहुत तीव्र राजनीतिक हलचल का रहा है और चल रहा है सबसे मजेदार बात यह है कि लाखों करोड़ो की संख्या में जनता सड़क पर है और सही उद्देश्य मालूम ही नहीं है एक ओर जनता सरकार से नफरत और जैसा चल रहा था वैसा ही चलने दो इस कारण से सड़क पर है,नेतृत्व भी नहीं है और उद्देश्य भी नहीं है बस एक उद्देश्य है सत्तापक्ष के खिलाफ नकारात्मक माहौल तैयार करना और मेरा मानना है कि नकारात्मक सोच केवल आत्म विनाश ही करती है और अंत में विपक्ष का वही हाल होना है आप नकारात्मक बने रहिए और सत्य को स्वीकार न करिए परम कल्याण सुनिश्चित है।
सत्तापक्ष केवल शक्ति संतुलन दिखाने और विपक्ष को उकसाने के लिए सड़क पर है,ठीक है लोकतंत्र में बिना अराजकता और हिंसा के प्रदर्शन राजनीति का एक हिस्सा है।
मित्रो महाराष्ट्र राजनीति में हिंदुत्व के आधार पर बना पुराना गठबंधन भाजपा शिवसेना का टूटा और एक नया गठबंधन पैदा हुआ जिसका एकमात्र उद्देश्य भ्रष्टाचार का संरक्षण और सुरक्षित करना है।आखिर ऐसी स्थिति राजनीति में कैसे आयी कि विचारधारा को त्यागकर भ्रष्टाचार को सुरक्षित करना पड़ा,क्योंकि कोई भी ऊपर नेतृत्व में राष्ट्र के लिए त्याग,बलिदान नहीं सौदा करना चाहता है आखिर वर्षों से आनंद ले रहे हैं इसी व्यवस्था का और हमारी सामाजिक व्यवस्था ऐसी है कि यदि भ्रष्टासुर को छेड़ोगे तो उल्टा-सीधा कर देंगे।बिल्कुल नहीं ऐसा कुछ नहीं सच्चाई यह है कि नीयत साफ नहीं हैं, लोकतांत्रिक व्यवस्था की आड़ में आप मुट्ठी बंद किए और यही कारण है कि देश में गरीबी समाप्त नहीं हो रही है और अत्यधिक आर्थिक असमानता है।
मुम्बई राजनीतिक कांड से भारतीय राजनीति की सारी असलियत सामने आ गयी हैं, चंद व्यक्तियों को लाभ दिलाने के लिए सौदा करना और अंतिम रूप चारों ओर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक पर हमला करना हमारे गिरते हुए राजनैतिक स्तर की पराकाष्ठा हैं, कोई भी दल हो सबका प्रबंधन केंद्रीयकृत है।
एकमात्र प्रबंधन का तरीका जातीय समीकरण,क्षेत्रीय समीकरण,मुस्लिम तुष्टिकरण जो धर्मनिरपेक्ष है वह खुलकर करेगा एवं जो हिंदुत्व की बात करेगा वह मुस्लिम नेताओं का तुष्टिकरण करेगा।
भारतीय राजनीति का दायरा अत्यंत संकीर्ण कर दिया गया है,नेता बनते ही चमक धमक में दायित्व भूल जाना और स्वयं को आम आदमी से अलग समझना एवं मतदाता का जाति,धर्म कें जाल में उलझे रहना ही भारतीय राजनीति है।
मुम्बई कांड के तत्काल बाद संसद में बहुत कम समय की उग्र बहस के साथ सीएए/एनआरसी का पास होना सत्तापक्ष की सोची-समझी रणनीति थी क्योंकि मुम्बई राजनीतिक कांड का डैमेज कंट्रोल और तत्काल बाद कांग्रेस का देश बचाओ अभियान में अति उकसाने वाला भाषण और उसके बाद सीएए का विरोध एवं सीएए का समर्थन बस सारे अराजक तत्व और पार्टियों के कार्यकर्ता सड़क पर आ गये,पूरे देश में राजनीतिक नंगनाच,मीडिया का तड़का और मतदाता सहमा हुआ,झटके में कमायी वाला राज्य झारखंड क्षेत्रीय दल को,उधर महाराष्ट्र क्षेत्रीय दल को बस लोजी हो गया क्षेत्रीय क्षत्रपों का तुष्टिकरण भैया कर ली फिक्सिंग लोकसभा का शतरंज तैयार बधाई हो।आरोप राष्ट्रीय स्वयंसेवक पर लगवाते रहेंगे☺
अब जो पूरे देश में चंद मुस्लिम संगठनों से शुरू हुआ बवाल वर्तमान में सीएए विरोध और समर्थन के रूप में आ गया है तो निश्चित रूप से राजनीति भविष्य में हिंदु और मुस्लिम के बीच दूरी बढ़ायेगी और निश्चित रूप से यह बदतमीजी मुस्लिम पक्ष ने शुरू की है दिल्ली से तो वह ही सम्हालने का कार्य करे भैया हम तो पूरे देश की बात करेंगे।
भाजपा को लाभ होगा😊
मतदाताओं को राजनैतिक दलों द्वारा देश में जो सेवा दी गयी है,सबसे अधिक परेशानी हुई है।
मजबूत सरकार है,बेवजह निजी स्वार्थ के लिए आम जनता में नफरत फैलाना पाप है।
मतदाता जानता है कि सभी नेतागण हिंदू-मुस्लिम साथ में बैठकर हिस्सा बांट करते हो,आम आदमी को जाति,धर्म के नाम पर लड़ाने की राजनीति बंद करो।
आम जनता क्या चाहती है समझो धनबल,बाहुबल का उचित प्रयोग सम्माननीय है।
इतिहास पढ़ो समझाने की आवश्यकता नहीं😊

सुधीर तिवारी
विश्व शांति भारत ट्रस्ट 🙏

Saturday, 4 January 2020

धर्म और राजनीति 6

धर्म और राजनीति 6

मित्रो आज हम धर्म से विकसित हुई सभ्यता और संस्कृति पर चर्चा करेंगे क्योंकि अक्सर एक मुद्दा समाज में उठता है कि संस्कृति का पतन हो रहा है जबकि वह जेनरेशन गैप होता है जिसे सांस्कृतिक परिवर्तन कह सकते हैं सदैव परिवर्तनशील हैं उसको रोकना असंभव हैं विकास की प्रक्रिया ही बाधित हो जायेगी।
पाश्चात्य दर्शन और भारतीय दर्शन संस्कृति में केवल एक शब्द का अंतर हैं और सत्य यह है कि पाश्चात्य दर्शन भी अति प्राचीन भारतीय दर्शन की ही एक शाखा है जिसे चार्वाक दर्शन के नाम से जानते हैं।
धर्म,अर्थ,कर्म और मोक्ष भारतीय धर्म,संस्कृति एवं दर्शन का समस्त क्षेत्र चार स्तम्भों पर है और पाश्चात्य दर्शन धर्म, अर्थ, कर्म के तीन स्तम्भों पर टिका है बस एक शब्द मोक्ष हमें समस्त विश्व की संस्कृति से भिन्न करता है और वही हमारी शक्ति है एवं यही सच्ची हिंदू संस्कृति है।
परमात्मा तो निर्विवाद है,विवाद का कारण तर्क है😁शरीर है आत्मा है एवं आत्मा परमात्मा का ही अंश है इसलिए सभी धर्म मानवता का संदेश देते हैं।धर्म,अर्थ और कर्म तो लगभग हर व्यक्ति के जीवन से सीधा जुड़ा हुआ है परंतु मोक्ष शब्द पाश्चात्य अथवा विज्ञान स्वीकार नहीं करेगा😂।
मोक्ष अर्थात् बंधन से मुक्त और पाश्चात्य संस्कृति बंधन स्वीकार ही नहीं करती है।जब संस्कृति की बात आती है तो समाज परिधान,भाषा,रंग,शक्ल,खानपान इत्यादि से संबद्ध करता है भैया यह सब तो वातावरण और उपलब्धता एवं मनुष्य के मष्तिष्क की रचनात्मकता पर निर्भर है,इन बातों का संस्कृति से कोई सम्बन्ध नहीं है।
हमारे भारत में जन्म हुआ अम्मा का दुग्धपान करके उनकी गोद में खेलना शुरू हुआ पालने में नहीं यह संस्कृति है।जन्म से लेकर जब तक हवन पूजन करके अस्थि विसर्जन न कर दें और बाप एक ही रहे यह संस्कृति है।स्कूल में,मोहल्ले में किसी लड़की से दोस्ती करने की सोचो और बहिन की जासूस टीम घर में बताकर पूजन करा दे यह संस्कृति है।शादी-ब्याह का मतलब हंगामा मरते दमतक और मरने के बाद भी भूतनी बनकर भी साथ रहे पत्नी पति यह संस्कृति है।एक ही घर दूसरे के बने बनाए काम में फटे में टांग अड़ा दो और दाँत निपोरकर कहना पड़े कोई बात नहीं यही संस्कृति है।तुमसे ज्यादा तुम्हारे बारे में दोस्तों को जानकारी हो और तुम खींसे निकालने के सिवा कुछ न कर सको क्योंकि दोस्त हैं यह संस्कृति है।कुल मिलाकर भारतीय संस्कृति में जन्म से मृत्यु तक स्वतंत्रता नाम की चीज है ही नहीं बुढ़ापे में भी अलग तरह के खूंटे है मित्रो और इन्हीं में आनंद है प्रेम है उत्सव हैं नकारात्मकता के लिए कोई समय ही नहीं।
भारतीय दर्शन एवं संस्कृति उत्सवों की संस्कृति हैं यदि सकारात्मक रहेंगे अन्यथा बंधन हैं।😊
पाश्चात्य संस्कृति में स्वतंत्रता है पर अकेलापन है एवं शरीर और आत्मा का सम्बंध है भैया जीवन भर स्वतंत्र रहे शरीर को दफन कर दिया आत्मा का बंधन उस स्थान से कर दिया आत्मा कभी मुक्त नहीं होगी मृत्युलोक में ही विचरण करेगी।पाश्चात्य दर्शन वालों को शोध करना ही चाहिए।
भारतीय संस्कृति में पूरे जीवन बंधन के साथ आनंद एवं उत्सव हैं जिसे हम परिवार व्यवस्था कहते हैं,विश्व में सर्वोत्तम सामाजिक व्यवस्था है।जैसे ही मृत्यु हुई समस्त प्रियजन आंखो के सामने जलाकर राख बनाते हैं कोई मोह नहीं शरीर से महाज्ञान है तब भी तसल्ली नहीं मिलती राख अस्थि ले जाकर जल में विधिवत् विसर्जित करते हैं,शतप्रतिशत गारंटीड योजना है मोक्ष दिलाने की पंचतत्वों से निर्मित शरीर का पंचतत्वों में विलय आत्मा मुक्त होकर परमात्मा में समाहित हो जाए।
भारतीय संस्कृति ऋषियों द्वारा विकसित पूर्ण वैज्ञानिक संस्कृति है मानो तो मोक्ष है न मानो तो भटकते रहो हां थोड़ा बहुत इन्द्रियों का सुख अधिक ले सकते हो।
सुधीर तिवारी
विश्व शांति भारत ट्रस्ट🙏


Friday, 3 January 2020

धर्म और राजनीति 5

धर्म और राजनीति 5
मित्रो पिछले लेखों में हमने सैद्धांतिक और आदर्शवाद के मानकों पर धर्म के सिद्धांतों पर चर्चा की जिसमें हमें धर्म में राजनीति की आवश्यकता कहीं समझ में नहीं आयी,धर्म का एक स्तम्भ नीति निर्धारण है जिसके अनुसार व्यक्ति निर्माण से विश्व निर्माण की प्रक्रिया एक विश्वास के द्वारा सम्भव है।
अब हम वर्तमान और व्यवहारिक धर्म के स्वरूप का विश्लेषण करते हैं,निश्चित रूप से हम आत्म निरीक्षण सर्वश्रेष्ठ करेंगे क्योंकि उसकी हमें जानकारी हैं वह हमारी जीवनशैली है।हमारे सनातन धर्म का मूल संदेश हैं श्रद्धा एवं विश्वास और हमारे धर्म का आधार वेद हैं।उपनिषद कहते हैं कि परमात्मा ही है एवं समस्त विश्व यह स्वीकार करता है कि परमात्मा निर्विवाद है।
भैया जब हम आम आदमी की जीवनशैली देखेंगे तो पायेंगे कि श्रद्धा और विश्वास है परंतु अज्ञान के कारण अंधश्रद्धा एवं अंधविश्वास के द्वारा स्वयं अपना शोषण करवा रहा है।
उदहारण के तौर पर हम भोलेनाथ को लेते हैं परमपिता परमेश्वर आदियोगी,आदिनाथ,आदिनर्तक,आदिवैद्य ये समझ लो जो कुछ सब महाकाल से सबकुछ शिवतत्व है।एक लाईन में यूं समझ लीजिए सत्यम शिवम सुंदरम हो गया परमात्मा का साक्षात्कार पहले सत्य के मार्ग पर चलिए तो आनंद ही आनंद है,अज्ञानी बच्चा सत्य मार्गी होता है अथवा महाज्ञानी पंडित सतय मार्गी होता है आप न बच्चे हैं और न पंडित और शिव तत्व को बताओगे कि संहार कर देंगे,भस्म कर देंगे,तांडव करेंगे तो धरती हिलेगी, तीसरी आंख खोल देंगे तो भूकंप आ जायेगा चोर हो बेईमान हो भगवान् के नाम पर भोले लोगों में भय व्याप्त करते हो।
भोलेनाथ से अधिक कौन प्यार कर सकता हैं भैया तुम जहर चढ़ाओ और प्रसन्न ठीक हैं, मित्रो तीसरी आँख को ले लो बहुत सारे मिल जायेंगे बोलेंगे हम दूर से देख लेंगे बाबाजी का घंटा देख लोगे ठग हो और यदि देख भी लोगे तो हमें क्या देखो खोलकर दिखा दो।शिवजी की तीन आँखे जो हमारे शास्त्रों में वर्णित हैं उनका अर्थ है आदिदैविक,आदिभौतिक एवं आध्यात्मिक और जो तीसरी आँख है वह आध्यात्मिक है अर्थात अंतरयात्रा स्वयं को जानो,स्वयं को पहचानो,तुम शरीर नहीं आत्मा हो परमात्मा का अंश शिव का अंश।ध्यान करो👍
मूर्ख कहीं के आज्ञा चक्र पर राख रगड़ने से तीसरी आंख खुलेगी फिर बाथरूम और बेडरूम में झांकने की शक्ति मिल जाएगी साले उललू के पटठे धर्म को अंध श्रद्धा में बर्बाद कर दिया।
अंध श्रद्धा और अंधविश्वास अकेले हमारे धर्म की समस्या नहीं समस्त विश्व में इसका उपयोग भय और भ्रम एवं एक दूसरे को नीचा दिखाने में किया जाता है और सभी धर्म के लोग करते हैं कहते हैं चमत्कार है अरे मनुष्य का जन्म मिला इससे बड़ा क्या चमत्कार होगा,पशु नहीं बने इतना चमत्कार कम है क्या मौज लो डराते क्यों हो।
अब हमें अन्य धर्मों का अधिक ज्ञान नहीं है परंतु इतना अवश्य है कि समाज को दिशा देने वाली शक्तियों में नकारात्मक शक्तियों ने अच्छी खासी घुसपैठ करके धर्म के पहले स्तम्भ नीति को धर्म के ही दूसरे स्तम्भ के द्वारा अत्यंत नुकसान पहुँचाया है।
वैश्वीकरण के इस वर्तमान दौर में हम अपनी आवश्यकताएं पूरी करते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन यदि करते हैं और परमात्मा को याद रखते हैं,इतना ही धर्म पर्याप्त है क्योंकि यदि परमात्मा हृदय में है तो सब ठीक ही करोगे अन्यथा वह करवा लेगा ऐसा मेरा विश्वास ही नहीं अनुभव भी है।
धर्म का दूसरा स्तम्भ ऊर्जा है,यांत्रिक ऊर्जा के बहुत पहले मनुष्य ने आध्यात्मिक ऊर्जा का अहसास किया और स्वयं को परमात्मा की संतान घोषित किया,मनुष्य अनंत ऊर्जा का श्रोत है यह शतप्रतिशत सत्य है अभी विज्ञान ने प्रकृति और जीव के अत्यंत अल्प रहस्य उद्घाटन कर पाये हैं और उपभोक्तावाद में उलझकर मरने मारने पर तैयार हैं, यही सत्य है धर्म के लिए कोई युद्ध नहीं हुए हैं जब हम इतिहास पढ़ेंगे तो युद्ध और हिंसा का मुख्य कारण अहंकार,भोग,साम्राज्य विस्तार,लूट और वर्तमान में व्यापार है।
मित्रो जब धर्म में ऊर्जा की बात आयेगी तो तंत्र,मंत्र,यंत्र का नाम अवश्य आयेगा।सभी धर्म इन चीजों में लिप्त हैं और वर्तमान में जो वैज्ञानिक हैं वह स्वीकार भी हैं,अधिक ज्ञान नहीं है परंतु इन्हीं माध्यमों से समस्त विश्व में नकारात्मक शक्तियाँ भय व्याप्त कर शोषण करने का कार्य और अंध श्रद्धा फैलाने का कार्य करती हैं।
जबकि सभी का मूल उद्देश्य प्रार्थना है,अपने इष्ट को किसी एक विधि के द्वारा प्रसन्न करना और सबका मंगल हो की कामना करना है।हम सब तो परमात्मा को याद रखें बस सबकी सामूहिक प्रार्थना की शक्ति से ही परमात्मा नकारात्मक शक्तियों को सकारात्मक कर देंगे।
कर भला तो हो भला सीधा सा मंत्र है,सदैव सकारात्मक रहिए परमात्मा स्वयं आपके अंदर विराजित हैं।
धर्म नीति और ऊर्जा का सकारात्मक संतुलन है,श्रद्धा और विश्वास परमात्मा पर रखिए।
सभी बिंदुओ पर हल्का विश्लेषण करने के बाद मेरा व्यक्तिगत विचार यह है कि धर्म में राजनीति की आवश्यकता नहीं हैं बल्कि अनुचित है।
अगले लेख में राजनीति में धर्म की आवश्यकता पर चर्चा होगी।
सुधीर तिवारी
विश्व शांति भारत ट्रस्ट🙏

Thursday, 2 January 2020

धर्म और राजनीति 4

धर्म और राजनीति 4
इस लेख में भी धर्म में राजनीति का कोई कार्य नहीं निकला,लिखते हैं देखते कब राजनीति आती है😊😁😂
महामानवों के संदेश
मित्रो संसार में परमात्मा ने व्यवस्था को सुंदर बनाने के लिए महामानवों को समय समय पर भेजा है एवं उनके माध्यम से सत्य का संदेश भिजवाया है हमारे भारतीय दर्शन के अनुसार सत्य ही परमात्मा है अब सत्य क्या है प्रेम,दया,करूणा,वीरता,क्षमा,सेवा,भाईचारा,त्याग, अहिंसा, बलिदान इत्यादि जो मानवता के कल्याण एवं मनुष्यता की उत्कृष्टता के हेतु है वह सत्य है।
यदि कोई भी व्यक्ति एक भी सन्मार्ग का अनुसरण व्यवहारिक जीवन मेंं करता है तो परमात्मा उसकी कदम कदम पर सहायता करते ही हैं,ऐसा मेरा व्यक्तिगत अनुभव है।
हमारे शंकराचार्य जी ने सनातन धर्म में संदेश दिया ईश्वर के प्रति श्रद्धा और विश्वास बस हो गया सारा काम आप आस्तिक हो गये,ईश्वरवादी बना दिया,आध्यात्मिक बन गये आप स्वयं अच्छे रास्ते परमात्मा दिखायेगा।
संघर्ष और कर्म तो परमात्मा भी करते हैं और हम उसकी संतान हैं तो हमें भी करना है।
जीसस ने कहा सेवा करिए अब समस्या यह है कि सेवा का सबसे बड़ा क्षेत्र शिक्षा और स्वास्थ्य वर्तमान में मेवा का क्षेत्र बन गया हैंं फिर भी हम अपना सुधार कर लें सबसे बड़ी सेवा कर दी आज के युग में इतना ही कठिन कार्य है।
सेवा सर्वोत्तम माता-पिता की है,अवश्य करें।
मोहम्मद साहब ने कहा भाईचारा बनाओ भैया मानवता में भाईचारे की बात कही होगी निश्चित मैंने पढ़ा नहीं है परंतु अल्लाह का प्रतिनिधित्व करने वाला बड़ी बात ही करेगा आपने उनकी बात मानी ओआईसी बनाया और मुट्ठी बंद कर ली बड़ी बात में शर्त डाल प्रथम भाईचारा मुस्लिम से होगा उसके बाद देखेंगे।
भाईचारा के साथ माता-पिता,भाई-बहन सारे समाज को सम्मिलित करें और बंद मुट्ठी खोलें तब अल्लाह प्रसन्न होंगे,साम्राज्य विस्तार अब सम्भव नहीं है।
हमारे गुरू गोविंद सिंह जी की शिक्षा तो उनका स्वयं का जीवन है आज उनकी जयंती है कोटि कोटि नमन,पूरे परिवार का बलिदान धर्म की रक्षा के लिए कर दिया भैया धर्म बदल कर वह भी शहंशाह की तरह जीवन जी सकते थे।आज उनके बलिदान से हमारा अस्तित्व सुरक्षित है।
त्याग और बलिदान सर्वश्रेष्ठ पूजा है।धर्म में त्याग का इसीलिए विशेष महत्व है।
महावीर जैन ने घोर तप किया और अहिंसा का मार्ग उत्तम बताया और अपने शिष्यों को पालन करने को कहा।
भगवान् गौतम बुद्ध ने शांति का संदेश दिया है।
मित्रो सभी महामानव जो अवतरित हुए सभी की शिक्षाओं में नैतिकता की शिक्षा है और सत्य के मार्ग पर चलने को कहा गया है,तभी तो हमें परमात्मा की कृपा प्राप्त होगी और हम गर्व से कह सकेंगे की हम परमात्मा की संतान हैं और उसकी इस बगिया में केवल माली का कार्य करेंगे,बंदर नहीं बनेंगे बगिया सजायेंगे उजाड़ेंगे नहीं।
अतः धर्म नीति की शिक्षा हैं जो हमें और समस्त संसार को श्रेष्ठता की ओर ले जाता है।
सुधीर तिवारी
विश्व शांति भारत ट्रस्ट🙏

Wednesday, 1 January 2020

धर्म और राजनीति 3

मित्रो पिछले लेख में हमने धर्म पर संक्षेप में चर्चा की मुझे नहीं लगता है कि धर्म लड़ाई,नीचा दिखाने,भ्रम फैलाने,भयग्रस्त करने जैसी कोई व्यवस्था है भैया कोई भी धर्म हो अत्यंत सहज है एवं धर्म की पहली शिक्षा है कि हम जीवन कैसे जीएं,सभी धर्मों ने ऐसी नीतियाँ विकसित की जिनके द्वारा हम नैतिक स्तर को उच्च हो "तमसो मा ज्योतिर्मय" सीधा और स्पष्ट संदेश हमारे वेद देते हैं कि अंधकार से प्रकाश की ओर चलो बस यही मार्ग परमात्मा तक पहुंचाएगा एवं हर धर्म का अंतिम लक्ष्य भी यही हैंं "आत्मा का परमात्मा से एकाकार"।

"परमात्मा समुद्र है आत्मा उसी का अंश है जैसे ही एकाकार हुआ महामानव प्रकट हुए।"
महामानव जिन्होंने विश्व में परमात्मा के प्रतिनिधि के रूप में संदेश दिए और समाज को संगठित,अनुशासित,आस्तिक बनाकर मनुष्यता की सेवा की जिनके कारण आज समस्त विश्व में करूणा,दया,प्रेम,सहकारिता,भाईचारा,सत्य,सेवा इत्यादि सद्गुण समस्त विश्व में हैं और हमारी सभ्यता विकसित हो रही है,मानवता उत्कृष्ट हो रही है।
यदि हम इतिहास को पढ़ेंगे तो पायेंगे कि समस्त विश्व में आज मानवीय मूल्यों का अत्यधिक सम्मान है और भविष्य में मनुष्यता जितनी तेजी से हिंसा से दूर हटकर शिक्षित और सभ्य विश्व का निर्माण करेगी।वास्तविक आनंद परमात्मा और प्रकृति का तभी ले पायेंगे।
जीसस ने कहा सेवा करिए,मोहम्मद साहब ने कहा भाईचारा कायम करिए,वेद में स्पष्ट कहा गया असतो मा सदगमय, तमसो मा ज्योतिर्मय,सत्य सनातन का आदेश है कि ईश्वर में श्रद्धा विश्वास रखिए मित्रो हर धर्म की स्पष्ट नीति है एवं हर महामानव का स्पष्ट आदेश हैं कहीं कोई समस्या नहीं हैं यदि समस्या है तो अंधश्रद्धा,अशिक्षा,चरमपंथ,अहंकार,उपभोक्तावाद हाँ बस यही समस्याएं हैं भैया मनुष्य भी भोला हैं और परमात्मा भी शैतान तो इच्छाएं,मन,वासना हैं हम आवश्यकता भूल गये और मन के वश में हो गये रही बची कसर उपभोक्तावाद ने पूरी कर दी परंतु यह सब भी आवश्यक हैंं,हमें मन को रोकना नहीं नियंत्रित करना है बस समझ लो समस्या समाप्त हो और भविष्य का यही युद्ध है मित्रो जो सबको लड़ना ही होगा।
"एक युद्ध स्वयं के विरूद्ध "
योद्धा बनिए
सुधीर तिवारी
विश्व शांति भारत ट्रस्ट🙏

Sunday, 29 December 2019

धर्म और राजनीति 2

धर्म का मर्म
मित्रो सृष्टि का निर्माण और सभ्यता का विकास दोनों घटनाक्रम आज भी विवादास्पद और रहस्यमय हैं,भाषा और लिपि के आने के बाद जो लिखित है,जिसकी गणना कर सकते हैं और जितनी कल्पना कर सकते हैं बस वहीं तक हम सबकी यात्रा पहुंची हैंं चाहे विज्ञान का मार्ग हो अथवा अध्यात्म का एक सीमा पर जाकर मनुष्य की यात्रा समाप्त होकर उसका समर्पण परमात्मा के प्रति हो जाता है अर्थात किसी अज्ञात शक्ति जो सबकुछ नियंत्रित करती है जहां मनुष्य का नियंत्रण नहीं रहता हैंं, संसार में शतप्रतिशत मनुष्य आस्तिक नास्तिक सभी जीवन में ऐसे पलों का अनुभव अवश्य करते हैं।परमात्मा का यही अस्तित्व है जिसे सभी महाज्ञानी स्वीकार करते हैं।
Oh My God सभी के मुंह से अनायास निकलता ही है,विस्मय/भय/आनंद/दुख जब भी प्राकृतिक रूप से हृदय से यह आवाज आये तो परमात्मा का अहसास अवश्य होता है।
मनुष्य ने समाज को अनुशासित और परमात्मा जैसा समाज बने ताकि परमात्मा प्रसन्न रहें,जिन महामानवों ने परमात्मा से साक्षात्कार किया उन्होंने समय समय पर परमात्मा के संदेश के रूप में एक धर्म की व्यवस्था विकसित की ताकि हम अपने अंदर की पशुता को कम करें और परमात्मा के प्रिय बनकर उनके समीप पहुंचे।अपना कल्याण करें एवं मानवता का कल्याण करें,लगभग सभी धर्मों का यही रहस्य और यही शिक्षा है।
परमात्मा समुद्र है उसपर चर्चा करने की हैसियत हम मनुष्यों की नहीं है।
वर्तमान में धर्म के मर्म को हम अपने नजरिए से देखते हैं मित्रो धर्म के द्वारा समस्त संसार में एक शाश्वत सत्य हैं प्रार्थना जिसके द्वारा मनुष्य ईश्वर से अपनी बात अपनी भाषा और भावना में व्यक्त करता हैं जो लगभग सभी की एक जैसी है कि सबका कल्याण हो फिर विवाद कहां है☺अहंकार कि मैं श्रेष्ठ हूँ भैया जब धर्म का कार्य ही श्रेष्ठ बनाकर परमात्मा के समीप ले जाना है तब अहंकार किस बात का जबतक अहंकार है आप परमात्मा तो दूर उसके किसी सच्चे भक्त से भी नही मिल पाओगे।
उसको पाना है तो मैं को मिटाना ही होगा।👍
धर्म का एक और कार्य जो समस्त संसार में है और देशकाल,वातावरण,परिस्थिति,धर्मगुरुओं के अनुसार हर स्थान पर अलग अलग हैं वह हैं संस्कार एवं संस्कृति जिसमें जन्म से मृत्यु तक की सभी क्रियाएँ शामिल हैं समस्त विश्व में भिन्न-भिन्न हैं उनका आनंद लीजिए जो वैज्ञानिक हैं स्वीकार करिए एवं अंधश्रद्धा से बचिए।
संस्कार एवं संस्कृति वैज्ञानिक ही स्वीकार्य होंगे भविष्य में सत्य है।👍
धर्म के संदेश मित्रो सभी धर्मों के कुछ मूल संदेश होते हैं,हमारे आर्य धर्म का श्रेष्ठ मानव बनें,वैदिक धर्म का सत्य,बुद्ध धर्म का शांति,जैन धर्म का अहिंसा,सनातन धर्म का श्रद्धा और विश्वास,इस्लाम का भाईचारा,ईसाई धर्म का सेवा इसी तरह विश्व सभी धर्मों में परमात्मा ने अपने दूत भेजकर मानवता के कल्याण के लिए संदेश भेजे और हम सब उनका पालन भी करते हैं।
आम जीवन में समस्त संसार में परमात्मा के प्रति विश्वास और श्रद्धा रखने वाले मनुष्य काफी हद तक धर्म के नियमों का अनुपालन भी करते हैं और इन्हीं कारणों से रचनात्मकता सदैव विजयी होती है और समस्त संसार का नेतृत्व सकारात्मक व्यक्ति ही करते हैं।
धर्म में राजनीति का क्या काम?
धर्मो रक्षति रक्षतः!
राधे राधे☺जय श्रीकृष्ण
सुधीर तिवारी
विश्व शांति भारत ट्रस्ट🙏