Sunday, 29 December 2019

धर्म और राजनीति 2

धर्म का मर्म
मित्रो सृष्टि का निर्माण और सभ्यता का विकास दोनों घटनाक्रम आज भी विवादास्पद और रहस्यमय हैं,भाषा और लिपि के आने के बाद जो लिखित है,जिसकी गणना कर सकते हैं और जितनी कल्पना कर सकते हैं बस वहीं तक हम सबकी यात्रा पहुंची हैंं चाहे विज्ञान का मार्ग हो अथवा अध्यात्म का एक सीमा पर जाकर मनुष्य की यात्रा समाप्त होकर उसका समर्पण परमात्मा के प्रति हो जाता है अर्थात किसी अज्ञात शक्ति जो सबकुछ नियंत्रित करती है जहां मनुष्य का नियंत्रण नहीं रहता हैंं, संसार में शतप्रतिशत मनुष्य आस्तिक नास्तिक सभी जीवन में ऐसे पलों का अनुभव अवश्य करते हैं।परमात्मा का यही अस्तित्व है जिसे सभी महाज्ञानी स्वीकार करते हैं।
Oh My God सभी के मुंह से अनायास निकलता ही है,विस्मय/भय/आनंद/दुख जब भी प्राकृतिक रूप से हृदय से यह आवाज आये तो परमात्मा का अहसास अवश्य होता है।
मनुष्य ने समाज को अनुशासित और परमात्मा जैसा समाज बने ताकि परमात्मा प्रसन्न रहें,जिन महामानवों ने परमात्मा से साक्षात्कार किया उन्होंने समय समय पर परमात्मा के संदेश के रूप में एक धर्म की व्यवस्था विकसित की ताकि हम अपने अंदर की पशुता को कम करें और परमात्मा के प्रिय बनकर उनके समीप पहुंचे।अपना कल्याण करें एवं मानवता का कल्याण करें,लगभग सभी धर्मों का यही रहस्य और यही शिक्षा है।
परमात्मा समुद्र है उसपर चर्चा करने की हैसियत हम मनुष्यों की नहीं है।
वर्तमान में धर्म के मर्म को हम अपने नजरिए से देखते हैं मित्रो धर्म के द्वारा समस्त संसार में एक शाश्वत सत्य हैं प्रार्थना जिसके द्वारा मनुष्य ईश्वर से अपनी बात अपनी भाषा और भावना में व्यक्त करता हैं जो लगभग सभी की एक जैसी है कि सबका कल्याण हो फिर विवाद कहां है☺अहंकार कि मैं श्रेष्ठ हूँ भैया जब धर्म का कार्य ही श्रेष्ठ बनाकर परमात्मा के समीप ले जाना है तब अहंकार किस बात का जबतक अहंकार है आप परमात्मा तो दूर उसके किसी सच्चे भक्त से भी नही मिल पाओगे।
उसको पाना है तो मैं को मिटाना ही होगा।👍
धर्म का एक और कार्य जो समस्त संसार में है और देशकाल,वातावरण,परिस्थिति,धर्मगुरुओं के अनुसार हर स्थान पर अलग अलग हैं वह हैं संस्कार एवं संस्कृति जिसमें जन्म से मृत्यु तक की सभी क्रियाएँ शामिल हैं समस्त विश्व में भिन्न-भिन्न हैं उनका आनंद लीजिए जो वैज्ञानिक हैं स्वीकार करिए एवं अंधश्रद्धा से बचिए।
संस्कार एवं संस्कृति वैज्ञानिक ही स्वीकार्य होंगे भविष्य में सत्य है।👍
धर्म के संदेश मित्रो सभी धर्मों के कुछ मूल संदेश होते हैं,हमारे आर्य धर्म का श्रेष्ठ मानव बनें,वैदिक धर्म का सत्य,बुद्ध धर्म का शांति,जैन धर्म का अहिंसा,सनातन धर्म का श्रद्धा और विश्वास,इस्लाम का भाईचारा,ईसाई धर्म का सेवा इसी तरह विश्व सभी धर्मों में परमात्मा ने अपने दूत भेजकर मानवता के कल्याण के लिए संदेश भेजे और हम सब उनका पालन भी करते हैं।
आम जीवन में समस्त संसार में परमात्मा के प्रति विश्वास और श्रद्धा रखने वाले मनुष्य काफी हद तक धर्म के नियमों का अनुपालन भी करते हैं और इन्हीं कारणों से रचनात्मकता सदैव विजयी होती है और समस्त संसार का नेतृत्व सकारात्मक व्यक्ति ही करते हैं।
धर्म में राजनीति का क्या काम?
धर्मो रक्षति रक्षतः!
राधे राधे☺जय श्रीकृष्ण
सुधीर तिवारी
विश्व शांति भारत ट्रस्ट🙏

No comments:

Post a Comment