मित्रो पिछले लेख में हमने धर्म पर संक्षेप में चर्चा की मुझे नहीं लगता है कि धर्म लड़ाई,नीचा दिखाने,भ्रम फैलाने,भयग्रस्त करने जैसी कोई व्यवस्था है भैया कोई भी धर्म हो अत्यंत सहज है एवं धर्म की पहली शिक्षा है कि हम जीवन कैसे जीएं,सभी धर्मों ने ऐसी नीतियाँ विकसित की जिनके द्वारा हम नैतिक स्तर को उच्च हो "तमसो मा ज्योतिर्मय" सीधा और स्पष्ट संदेश हमारे वेद देते हैं कि अंधकार से प्रकाश की ओर चलो बस यही मार्ग परमात्मा तक पहुंचाएगा एवं हर धर्म का अंतिम लक्ष्य भी यही हैंं "आत्मा का परमात्मा से एकाकार"।
"परमात्मा समुद्र है आत्मा उसी का अंश है जैसे ही एकाकार हुआ महामानव प्रकट हुए।"
महामानव जिन्होंने विश्व में परमात्मा के प्रतिनिधि के रूप में संदेश दिए और समाज को संगठित,अनुशासित,आस्तिक बनाकर मनुष्यता की सेवा की जिनके कारण आज समस्त विश्व में करूणा,दया,प्रेम,सहकारिता,भाईचारा,सत्य,सेवा इत्यादि सद्गुण समस्त विश्व में हैं और हमारी सभ्यता विकसित हो रही है,मानवता उत्कृष्ट हो रही है।
यदि हम इतिहास को पढ़ेंगे तो पायेंगे कि समस्त विश्व में आज मानवीय मूल्यों का अत्यधिक सम्मान है और भविष्य में मनुष्यता जितनी तेजी से हिंसा से दूर हटकर शिक्षित और सभ्य विश्व का निर्माण करेगी।वास्तविक आनंद परमात्मा और प्रकृति का तभी ले पायेंगे।
जीसस ने कहा सेवा करिए,मोहम्मद साहब ने कहा भाईचारा कायम करिए,वेद में स्पष्ट कहा गया असतो मा सदगमय, तमसो मा ज्योतिर्मय,सत्य सनातन का आदेश है कि ईश्वर में श्रद्धा विश्वास रखिए मित्रो हर धर्म की स्पष्ट नीति है एवं हर महामानव का स्पष्ट आदेश हैं कहीं कोई समस्या नहीं हैं यदि समस्या है तो अंधश्रद्धा,अशिक्षा,चरमपंथ,अहंकार,उपभोक्तावाद हाँ बस यही समस्याएं हैं भैया मनुष्य भी भोला हैं और परमात्मा भी शैतान तो इच्छाएं,मन,वासना हैं हम आवश्यकता भूल गये और मन के वश में हो गये रही बची कसर उपभोक्तावाद ने पूरी कर दी परंतु यह सब भी आवश्यक हैंं,हमें मन को रोकना नहीं नियंत्रित करना है बस समझ लो समस्या समाप्त हो और भविष्य का यही युद्ध है मित्रो जो सबको लड़ना ही होगा।
"एक युद्ध स्वयं के विरूद्ध "
योद्धा बनिए
सुधीर तिवारी
विश्व शांति भारत ट्रस्ट🙏
"एक युद्ध स्वयं के विरूद्ध "
योद्धा बनिए
सुधीर तिवारी
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