Sunday, 12 January 2020

धर्म और राजनीति 7

धर्म और राजनीति 7
मित्रो पिछले लेखों में हमने एक निष्कर्ष निकाल लिया था कि धर्म में राजनीति अनुचित है।अब हम पहले वर्तमान स्वरूप देश में जिस तरह की राजनीति का चल रहा है उसे एक सामान्य दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करते हैं और केन्द्र राष्ट्रीय राजनीति को रखते हैं वस्तुतः बिना नीति के आप जीवन की डगर नहीं चल सकते हैं एक घर की व्यवस्था भी राजनीति से ही संचालित होती हैं, पूर्ण व्यवहारिक सत्य है।
हमारे देश में लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था द्वारा शासन-प्रशासन न्याय इत्यादि संचालित है यह हम सबके लिए अत्यंत गौरव की बात है।
विगत समय बहुत तीव्र राजनीतिक हलचल का रहा है और चल रहा है सबसे मजेदार बात यह है कि लाखों करोड़ो की संख्या में जनता सड़क पर है और सही उद्देश्य मालूम ही नहीं है एक ओर जनता सरकार से नफरत और जैसा चल रहा था वैसा ही चलने दो इस कारण से सड़क पर है,नेतृत्व भी नहीं है और उद्देश्य भी नहीं है बस एक उद्देश्य है सत्तापक्ष के खिलाफ नकारात्मक माहौल तैयार करना और मेरा मानना है कि नकारात्मक सोच केवल आत्म विनाश ही करती है और अंत में विपक्ष का वही हाल होना है आप नकारात्मक बने रहिए और सत्य को स्वीकार न करिए परम कल्याण सुनिश्चित है।
सत्तापक्ष केवल शक्ति संतुलन दिखाने और विपक्ष को उकसाने के लिए सड़क पर है,ठीक है लोकतंत्र में बिना अराजकता और हिंसा के प्रदर्शन राजनीति का एक हिस्सा है।
मित्रो महाराष्ट्र राजनीति में हिंदुत्व के आधार पर बना पुराना गठबंधन भाजपा शिवसेना का टूटा और एक नया गठबंधन पैदा हुआ जिसका एकमात्र उद्देश्य भ्रष्टाचार का संरक्षण और सुरक्षित करना है।आखिर ऐसी स्थिति राजनीति में कैसे आयी कि विचारधारा को त्यागकर भ्रष्टाचार को सुरक्षित करना पड़ा,क्योंकि कोई भी ऊपर नेतृत्व में राष्ट्र के लिए त्याग,बलिदान नहीं सौदा करना चाहता है आखिर वर्षों से आनंद ले रहे हैं इसी व्यवस्था का और हमारी सामाजिक व्यवस्था ऐसी है कि यदि भ्रष्टासुर को छेड़ोगे तो उल्टा-सीधा कर देंगे।बिल्कुल नहीं ऐसा कुछ नहीं सच्चाई यह है कि नीयत साफ नहीं हैं, लोकतांत्रिक व्यवस्था की आड़ में आप मुट्ठी बंद किए और यही कारण है कि देश में गरीबी समाप्त नहीं हो रही है और अत्यधिक आर्थिक असमानता है।
मुम्बई राजनीतिक कांड से भारतीय राजनीति की सारी असलियत सामने आ गयी हैं, चंद व्यक्तियों को लाभ दिलाने के लिए सौदा करना और अंतिम रूप चारों ओर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक पर हमला करना हमारे गिरते हुए राजनैतिक स्तर की पराकाष्ठा हैं, कोई भी दल हो सबका प्रबंधन केंद्रीयकृत है।
एकमात्र प्रबंधन का तरीका जातीय समीकरण,क्षेत्रीय समीकरण,मुस्लिम तुष्टिकरण जो धर्मनिरपेक्ष है वह खुलकर करेगा एवं जो हिंदुत्व की बात करेगा वह मुस्लिम नेताओं का तुष्टिकरण करेगा।
भारतीय राजनीति का दायरा अत्यंत संकीर्ण कर दिया गया है,नेता बनते ही चमक धमक में दायित्व भूल जाना और स्वयं को आम आदमी से अलग समझना एवं मतदाता का जाति,धर्म कें जाल में उलझे रहना ही भारतीय राजनीति है।
मुम्बई कांड के तत्काल बाद संसद में बहुत कम समय की उग्र बहस के साथ सीएए/एनआरसी का पास होना सत्तापक्ष की सोची-समझी रणनीति थी क्योंकि मुम्बई राजनीतिक कांड का डैमेज कंट्रोल और तत्काल बाद कांग्रेस का देश बचाओ अभियान में अति उकसाने वाला भाषण और उसके बाद सीएए का विरोध एवं सीएए का समर्थन बस सारे अराजक तत्व और पार्टियों के कार्यकर्ता सड़क पर आ गये,पूरे देश में राजनीतिक नंगनाच,मीडिया का तड़का और मतदाता सहमा हुआ,झटके में कमायी वाला राज्य झारखंड क्षेत्रीय दल को,उधर महाराष्ट्र क्षेत्रीय दल को बस लोजी हो गया क्षेत्रीय क्षत्रपों का तुष्टिकरण भैया कर ली फिक्सिंग लोकसभा का शतरंज तैयार बधाई हो।आरोप राष्ट्रीय स्वयंसेवक पर लगवाते रहेंगे☺
अब जो पूरे देश में चंद मुस्लिम संगठनों से शुरू हुआ बवाल वर्तमान में सीएए विरोध और समर्थन के रूप में आ गया है तो निश्चित रूप से राजनीति भविष्य में हिंदु और मुस्लिम के बीच दूरी बढ़ायेगी और निश्चित रूप से यह बदतमीजी मुस्लिम पक्ष ने शुरू की है दिल्ली से तो वह ही सम्हालने का कार्य करे भैया हम तो पूरे देश की बात करेंगे।
भाजपा को लाभ होगा😊
मतदाताओं को राजनैतिक दलों द्वारा देश में जो सेवा दी गयी है,सबसे अधिक परेशानी हुई है।
मजबूत सरकार है,बेवजह निजी स्वार्थ के लिए आम जनता में नफरत फैलाना पाप है।
मतदाता जानता है कि सभी नेतागण हिंदू-मुस्लिम साथ में बैठकर हिस्सा बांट करते हो,आम आदमी को जाति,धर्म के नाम पर लड़ाने की राजनीति बंद करो।
आम जनता क्या चाहती है समझो धनबल,बाहुबल का उचित प्रयोग सम्माननीय है।
इतिहास पढ़ो समझाने की आवश्यकता नहीं😊

सुधीर तिवारी
विश्व शांति भारत ट्रस्ट 🙏

No comments:

Post a Comment