Thursday, 26 September 2019

गाँधीवाद,धर्म और स्वतंत्रता आंदोलन 2

मित्रो आधुनिक इतिहास में महात्मा गाँधीजी ने भारत के धर्म के मर्म को अर्थात तत्व दर्शन को स्वतंत्रता आंदोलन के नेतृत्व में हथियार बनाया और सफल हुए,अफ्रीका से आकर साबरमती आश्रम से पदयात्रा और श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीराम का सहारा लेकर हमारे स्वतंत्रता आंदोलन की नाव पार करायी।हमें गर्व है अपनी जन्मभूमि पर कि यहाँ विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का विकास हुआ,जिसमें धर्म,अर्थ,विज्ञान हर क्षेत्र में हमारे ॠषियों ने पूर्ण व्यवहारिक और वैज्ञानिक विधि से विकास किया जिसे वैदिक युग कहते हैं।
मित्रो आजकल चर्चा वैश्वीकरण की बहुत की जाती हैं, भैया इतिहास के अनुसार मौर्य साम्राज्य में पश्चिम की रानी थी और विदेशों में सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार पूरे एशिया में किया था।आज जनसंख्या अधिक और आवागमन के साधन आसान होने से वैश्वीकरण में हिस्सेदारी बढ़ गयी है और आम व्यक्ति भी दुनिया के सम्पर्क में है।अति सुंदर बात हैं दुनिया है ही इतनी सुंदर उस पर मनुष्य का जन्म परमात्मा ने दिया किसलिए कि रचना करो,विकास करो।हमारा देश धार्मिक और आध्यात्मिक देश है अतः यहाँ जितने भी परिवर्तन हुए हैं उनका मूल आधार धर्म ही रहा है।यही बात महात्मा गाँधी जी ने समझी और उसका अनुपालन किया और राष्ट्रपिता कहे गये।धर्म के अनुसार स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व ही उन्हें व्यक्ति से दर्शन में परिवर्तित करता है।
हमारे देश के इतिहास को हम हल्की नजर से देखेंगे तो पायेंगे मौर्य शासन के बाद हमारे राजाओं का संगठित न होना और राज्यों का विखंडन उसी दौरान विदेशी आक्रमणों ने धीरे-धीरे हमें कमजोर किया और अंततः अकबर महान ने मुगल साम्राज्य स्थापित किया और हम लगभग उत्तर भारत में पूर्ण गुलाम हो गये।पश्चिम से हमारे पुराने सम्बंध थे अत्याचार और गुलामी हम सहन कर रहे थे कुछ अंग्रेज जहांगीर के शासन में व्यापार के लिए आना शुरू हुए अर्थात नई तकनीक के साथ पश्चिम ने विस्तार शुरू किया।उसके बाद के मुगल शासक औरंगजेब ने गलती कर दी भैया बहुत बड़ी गलती कर दी,मंदिर लूटने तक तो ठीक था इन्होंने क्या किया तलवार की नोंक पर धर्म परिवर्तन मतलब धार्मिक जनता पर अत्याचार घोर पाप क्या हुआ भैया महाकाल का स्मार्ट सिटी कैलाश पर्वत हिल गया और खुल गया तीसरा नेत्र अर्थात दूरदृष्टि,परमात्मा ने भक्तों को सताने वालों पर विशेष दृष्टि लगा दी जो अभी तक लगी है,सुधर जाओ नहीं तो नष्ट हो जाओगे यदि बेवजह की हिंसा धन या स्वयं के अहंकार के लिए करोगे तो तुम शैतान हो और शैतान का परमात्मा क्या करता है,हर धर्म का ज्ञानी व्यक्ति बता देगा।
भैया अंग्रेजों ने हमें शैतानी शक्ति से बचाया हिंसा और धर्म परिवर्तन को रोका,परमात्मा का कार्य किया सेवा की,रक्षा की वही कार्य किया जो राम कृष्ण ने किया था।भोले के भक्तों की रक्षा की महादेव ने कृपा की भैया आशीर्वाद दिया आपका राज्य समस्त विश्व में हो गया ठीक है।
फिर क्या किया आपने भी वही गलती प्रारंभ कर दी,मंदिर तोड़ने लगे और महादेव के भक्तों का इतिहास समाप्त करने लगे।धार्मिक और आध्यात्मिक देश में धर्म को छेड़ने लगे,सभ्यता और संस्कृति को छेड़ने लगे भैया हम भारतीय पहले ही इतने उदारवादी हैं कि जो हमें अच्छा लगता है विश्व में किसी भी धर्म या सम्प्रदाय से हो तुरंत स्वीकार कर लेते हैं।फिर आपने ऐसी हिमाकत क्यों की जब हम चरमपंथ से तौबा करते हैं और अपने बच्चों को भी सत्य,प्रेम और अहिंसा सिखाते हैं,आपने भक्तों को सताया क्या हुआ महादेव सक्रिय हो गये और परिणाम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन।
धर्मो रक्षति रक्षतः!

जय हिंद वन्दे मातरम्
सुधीर तिवारी
क्रमशः


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